पानीपत। सिविल अस्पताल में बढ़ रही डिलीवरी की संख्या को देखते हुए सिविल सर्जन ने अब प्रसूताओं को डिलीवरी के तुरंत बाद दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करने के निर्देश दिए हैं। प्रसूताओं को उन्हीं केंद्रों में रेफर किया जाएगा जहां से उन्हें सिविल अस्पताल भेजा गया है। ऐसे में सिविल अस्पताल के प्रसूति वार्ड में व्यवस्था बनी रहेगी। एक बेड पर दो- दो प्रसूताओं को नहीं लेटाना पड़ेगा। फिलहाल सिविल अस्पताल में एक दिन में 25-30 डिलीवरी होती है। पिछले आठ माह में सिविल अस्पताल में 5978 डिलीवरी हो चुकी है। अस्पताल में प्रसव के लिए 40 बेड हैं। 12 बेड सिजेरियन के लिए हैं। अब डिलीवरी के बाद प्रसूताओं को 24 घंटे तक अस्पताल में ही रखा जाता है। इसलिए बेड की संख्या कम होने के कारण एक बेड पर दो दो प्रसूताओं को लेटाना पड़ता है। ऐसे में इनमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अब सिविल सर्जन ने पीएमओ को पत्र लिखकर प्रसूताओं को डिलीवरी के तुरंत उसी सेंटर पर रेफर करने को कहा हैं जहां से उन्हें सिविल अस्पताल रेफर किया गया है।
वैसे तो समालखा, नारायणा, सिवाह व ददलाना को डिलीवरी केंद्र बनाया गया है, लेकिन यहां डिलीवरी महज नाम मात्र ही होती है। आठ माह में यहां 50 से भी कम डिलीवरी हुई है। यहां आने वाली गर्भवतियों को सिविल अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
प्रसूति वार्ड की नर्सों की माने तो प्रसूताओं को डिलीवरी के बाद जब दोबारा उसी केंद्र पर रेफर किया जा रहा है तो वो वहां जाने को भी तैयार नहीं है। प्रसूताएं सिविल अस्पताल में ही रहना चाहती हैं। वापस रेफर करने पर तीमारदार नर्सों से उलझ रहे हैं। ये अब समस्या पैदा हो गई है।
सिविल अस्पताल में डिलीवरी की संख्या बढ़ रही है। एक बेड पर दो दो प्रसूताओं को न लेटाना पड़े। इसलिए प्रसूताओं को डिलीवरी के बाद उन्हीं सेंटर पर रेफर करने के निर्देश दिए हैं जहां से गर्भवतियों को सिविल अस्पताल रेफर किया गया था। इससे व्यवस्था बनी रहेगी।
- डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन पानीपत।