नगर निगम के पालिका बाजार स्थित कार्यालय की कर शाखा ब्रांच में एक बार फिर से प्रॉपर्टी टैक्स का बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें निगम अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर महज दस माह में शहर की 535 प्रॉपर्टियों का कर बगैर आधार और रिकार्ड के माफ कर दिया। माफ किए गए कर की राशि 3 करोड़ 38 लाख रुपये है। इसके साथ ही कुछ केसों में अधिक प्रॉपर्टी टैक्स भी वसूल किया गया है। निगम के पास इस टैक्स को जमा कराने के अधार का रिकार्ड भी नहीं है। प्रॉपर्टी टैक्स में चल रही इस धांधली की जांच तत्कालीन संयुक्त आयुक्त ने की और इसकी रिपोर्ट आयुक्त को सौंप दी है। हैरानी की बात यह है कि इसी दौरान संयुक्त आयुक्त का ट्रांसफर भी हो गया।
तत्कालीन संयुक्त आयुक्त की जांच के मुताबिक 01 अप्रैल 2019 से 11 फरवरी 2020 के दौरान जिन संपत्तियों का संपतिकर माफ या कम किया गया और जिनका कर लंबित था, उनकी ओर से किए गए भुगतान में काफी अंतर मिला। ऐसी संपत्तियों की गहनता से जांच कर चिह्नित किया गया। जिसमें से 535 ऐसी संपत्ति ऐसी मिली, जिसमें धांधली की गई। इनपर कुल संपत्तिकर 5 करोड़ 87 लाख 73 हजार 730 रुपये बकाया था, जिसमें से कर दाताओं ने सिर्फ 2 करोड़ 48 लाख 99 हजार 027 रुपये ही अदा किए गए। बाकी के बचे 3 करोड़ 38 लाख 74 हजार 703 रुपये को नगर निगम की संपत्तिकर शाखा के कर्मचारियों ने बिल पर ही बिना किसी सक्षम अधिकारी की मंजूरी और रिकार्ड के माफ कर दिया।
सभी को नोटिस भेजे, केवल 20 से मिले जवाब
इसके बाद मामले की जांच पड़ताल की गई। बकाया और भुगतान में लाखों रुपये के अंतर होने पर सभी 535 संपत्ति मालिकों को नोटिस भेजे गए, जिसमें से केवल 20 संपति मालिकों ने ही जवाब दिए। कोई भी जांच में शामिल नहीं हुआ।
रिकार्ड, ऑडिट, डिमांड, कलेक्शन, पोस्टिंग तक नहीं
ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि नगर निगम के रिकार्ड में वर्ष 2015-2016 के बाद का कोई भी डिमांड और कलेक्शन मौजूद नहीं है, जिससे की तसदीक की जा सके कि संपत्तिकर मालिकों की ओर से संपतिकर अदा किया गया है या नही। संपत्तिकर मालिकों द्वारा जमा किए गए संपतिकर की पोस्टिंग भी कहीं नहीं की गई है। जिससे कि पता चल सके कि संपत्तिकर की डिमांड कितनी है, जमा कितना हुआ और बकाया कितना है। किसी प्रकार का कोई ऑडिट नहीं किया गया है। डिमांड और कलेक्शन रजिस्टर तैयार करवाने और जमा किए गए गृहकर की प्रति माह और प्रति वर्ष पोस्टिंग करने व ऑडिट करवाने की जिम्मेवारी भी नगर निगम के कर्मचारियों एवं संबंधित अधिकारियों की थी, जिसेे समय रहते पूरा नहीं किया गया। नगर निगम, पानीपत में सिंपलेक्स ई. सलूशन कंपनी की ओर से वर्ष 2016 के बाद संपत्तिकर कर का कार्य किया गया था, उनसे भी संपत्तिकर के ब्योरे की मांग की गई थी, लेकिन उनकी ओर से भी जांच के लिए रिकार्ड दिया गया।
संज्ञान में मामला, होगी कड़ी कार्रवाई
मामला संज्ञान में है। इस विषय पर निगम अधिकारियों को जांच सौंपी जा चुकी है। हर हाल में इस फर्जीवाड़े में शामिल निगम हर कर्मचारी व अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी सूरत में किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
- सुशील कुमार, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।