पानीपत। जल प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी से यमुना में बिना ट्रीटमेंट छोड़े जा रहे अपशिष्ट जल की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही ड्रेनों और ट्रीटमेंट प्लांटों की गहन मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं।
उपायुक्त ने सोमवार को जिला सचिवालय में आयोजित बैठक में जल और वायु प्रदूषण की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की कार्यप्रणाली तथा ड्रेनों में छोड़े जा रहे अपशिष्ट जल पर विस्तार से चर्चा की गई।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीईटीपी और एसटीपी की वर्तमान स्थिति पर आधारित तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत की जाए। उपायुक्त ने कहा कि जल प्रदूषण केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। स्वच्छ जल हर नागरिक का अधिकार है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी विभागों की जिम्मेदारी है।
ड्रेनों की निगरानी बढ़ेगी
उपायुक्त ने ड्रेन नंबर-1, 2, 6 और 8 की विशेष निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन ड्रेनों में गिरने वाले अपशिष्ट जल की नियमित जांच की जाए और प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि मंगलवार को वे स्वयं पानीपत और समालखा क्षेत्र के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण करेंगे, जहां सीईटीपी, एसटीपी और ड्रेनों की स्थिति का मौके पर जायजा लिया जाएगा।
बैठक में एसडीएम पानीपत मनदीप कुमार, एसडीएम समालखा अमित कुमार, एसडीएम इसराना नवदीप नैन, नगर निगम के चीफ इंजीनियर रमेश बागड़ी, एचएसपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल और एचएसवीपी के कार्यकारी अभियंता जगमाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।