कल्पद्रुम समव शरण महामंडल विधान में भजनों पर झूमते बच्चे। संवाद
पानीपत। जिनवाणी विद्या भारती स्कूल में 11 दिवसीय श्री 1008 कल्पद्रुम समव शरण महामंडल विधान का शनिवार को तीसरा दिन रहा।
यह आयोजन जैन संत समर्पण सागर महाराज के सानिध्य में धूमधाम से आयोजित किया गया। समव शरण महामंडल विधान के तीसरे दिन जिनेंद्र भगवान का अभिषेक और शांति धारा संपन्न हुई। समव शरण में 108 दीपों की माला से जिनेंद्र भगवान की आरती की।
शनिवार को लगभग जिनेंद्र भगवान को 250 अर्घ समर्पित किए गए। समव शरण के चारों दिशाओं के अंदर यह अर्घ चक्रवर्ती और इंद्रों की ओर से समर्पित किए गए।
इंद्रों के द्वारा रजत पुष्पों से पुष्प वृष्टि की गई। जैन संत समर्पण सागर महाराज ने कहा कि कंजूस व्यक्ति भगवान की भक्ति नहीं कर सकता।
पूजन की सामग्री भक्तों के मन को प्रसन्नता और भावों की विशुद्धि का कारक है। यह विधान पूजन जैन पंचायत का नहीं है और न ही मेरा है। यह विधान जिनेंद्र भगवान का है और भगवान के समव शरण के अंदर सभी समान होते हैं। वहां कोई छोटा बड़ा नहीं होता है।
रविवार को 64 चंवर जिनेंद्र भगवान को ढो राहे जाएंगे। दिगंबर जैन पंचायत के द्वारा सभी अतिथियों का सम्मान और महाराज को श्रीफल भेंट किया गया। संध्या के समय सांस्कृतिक कार्यक्रम गए। अंतिम पूजा में मंत्रोचारण के साथ आहुति दी गई और आरती की गई।
कल्पद्रुम समव शरण महामंडल विधान में भजनों पर झूमते बच्चे। संवाद
कल्पद्रुम समव शरण महामंडल विधान में भजनों पर झूमते बच्चे। संवाद