पानीपत। महंगे शौक और पैसा कमाने का शॉर्टकट रास्ता युवाओं को सलाखों के पीछे पहुंचा रहा है। नशा तस्करी में संलिप्त ज्यादातर मामले में शॉर्टकट तरीके से पैसा कमाने के लिए तस्करी करना ही सामने आया है। पुलिस ने एक सप्ताह में नशा तस्करी के पांच अलग-अलग मामले पकड़े जिनके तार भी यूपी, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश से जुड़े है। तस्कर कम दाम में मादक पदार्थ खरीदकर लाते हैं। पानीपत और आसपास के जिलों में तीन से चार गुना अधिक पैसों में सप्लाई करते हैं।
पानीपत में नशा तस्करी के खिलाफ पुलिस की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। एक ओर तो लोगों को नशा न करने के लिए जागरूक किया जाता है। वहीं दूसरी ओर नशा तस्करों पर भी शिकंजा कसा गया। पिछले एक सप्ताह में पुलिस ने नशा तस्करों पर बड़ी कार्रवाई की है। 29 मार्च को पुलिस टीम ने 452 ग्राम अफीम के साथ यूपी के सहारनपुर के तस्कर मुर्तजा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने सहारनपुर से नशे की खेप पानीपत पहुंचाना स्वीकार किया था। इसके बाद 31 मार्च को सीआईए-1 की टीम ने 1.90 किग्रा गांजा के साथ पूर्णिया बिहार के नशा तस्कर मुकेश को पकड़ा था। पूछताछ में आरोपी ने बताया था वह डाडोला में किराये पर रहता है और बिहार से दो किग्रा गांजा खरीदकर लाया था। पुलिस ने आरोपी को रिमांड पर लेकर नेटवर्क को खंगालने का प्रयास किया।
वहीं, दो अप्रैल को सीआईए-2 की टीम ने सनौली टोल प्लाजा के पास से रवि उर्फ भालू को गिरफ्तार किया था। आरोपी के कब्जे से 2.70 किग्रा चरस बरामद की गई थी। पूछताछ में सामने आया था वह चरस की खेप उत्तराखंड के ऋषिकेश से छह लाख रुपये में खरीदकर लाया था और महंगे दाम में पानीपत में सप्लाई करनी थी। यही नहीं सोमवार को पुलिस ने 12 किग्रा गांजा के साथ एक आरोपी यूपी के गाजीपुर निवासी भरत गुप्ता को गिरफ्तार किया था। आरोपी मध्यप्रदेश से गांजा की खेप खरीदकर लाया था।
सबकी कहानी एक जैसी, शार्टकट तरीके से चाहिए पैसा
पुलिस ने नशा तस्करों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की। प्रत्येक मामले में एक जैसी की कहानी सामने आई। नशा तस्कर यूपी, उत्तराखंड, बिहार और मध्यप्रदेश से कम दाम में मादक पदार्थ खरीदकर लाते हैं। इसके बाद पानीपत व आसपास के जिलों में सप्लाई करती हैं। पानीपत में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं। जिस कारण यहां गांजा की मांग भी अधिक रहती है। जिस कारण मध्यप्रदेश से पानीपत पहुंचने पर गांजा के रेट में दो से तीन गुणा तक बढ़ जाती है।
नशा तस्करी के मामलों में पुलिस आरोपियों से सख्ती से पूछताछ कर रही है, जिससे नशे के नेटवर्क को तोड़ा जा सके। सप्लायर तक पहुंचने के लिए भी टीमें दबिश दे रही हैं।
-सतीश वत्स, डीएसपी मुख्यालय।