जगमहेंद्र सरोहा
पानीपत। दशहरा के लिए शहर में भक्ति और साधना का माहौल बनना शुरू हो गया है। इस दिन विशेष रूप से निकाले जाने वाले हनुमान स्वरूपों के लिए जिले के श्रद्धालु 40 दिवसीय (चलिया) कठिन व्रत और साधना अनुष्ठान की शुरुआत करेंगे। कुछ भक्त वीरवार तो कुछ शुक्रवार को व्रत का संकल्प लेंगे।
इस वर्ष 20 अक्तूबर को दशहरा मनाया जाएगा। इसके चलते श्रद्धालु 10 और 11 सितंबर से 40 दिनों के व्रत का संकल्प लेंगे। जिले में करीब 600 हनुमान सभाएं हैं। इनसे जुड़े मुख्य हनुमान स्वरूप और उनके सेवक इस कठिन व्रत का पालन करते हैं। कुछ श्रद्धालु 40 तो कुछ 21 दिन का उपवास रखकर पवनपुत्र हनुमान की आराधना में लीन रहेंगे।
मुल्तान से पानीपत पहुंची ऐतिहासिक परंपरा
इस अनूठी धार्मिक परंपरा का इतिहास विभाजन से पहले पाकिस्तान के मुल्तान शहर से जुड़ा है। बुजुर्गों के अनुसार मुल्तान में बालकृष्ण नारंग हनुमान स्वरूप बनते थे और वहां से हनुमान जी की एक पवित्र मूर्ति साथ लेकर आए थे, जो आज भी सुरक्षित है।
विभाजन के बाद पानीपत में बसी यह परंपरा समय के साथ विस्तार पाती गई। जिले में अब हनुमान स्वरूपों की संख्या करीब 600 है, जबकि उनके साथ व्रत रखने वाले सेवकों और श्रद्धालुओं की संख्या दो हजार से अधिक है।
साधना में करने होते हैं कठोर नियमों का पालन
प्राचीन शिव मंदिर सनातन देव संन्यास आश्रम (रामनगर, तहसील कैंप) के प्रधान सुभाष गुलाटी ने बताया कि 40 दिनों तक व्रतधारियों को बेहद कड़े धार्मिक नियमों का पालन करना होता है। पूर्ण अखंड ब्रह्मचर्य के साथ साधकों को मंदिर परिसर में ही रहना होता है। पूरे दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन किया जाता है और त्रिकाल पूजा-पाठ होता है।
सुबह पांच से सात बजे तक हवन, दोपहर एक से डेढ़ बजे तक विशेष पूजा-अर्चना और शाम छह से रात नौ बजे तक सत्संग व पूजन होता है। नियमों में चूक होने पर व्रत खंडित माना जाता है। 40 दिनों की इस अखंड तपस्या के बाद विजयादशमी पर हनुमान स्वरूपों की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। इनके दर्शनों के लिए शहरभर से श्रद्धालु उमड़ते हैं।