पानीपत। संतों की वाणी रूह की खुराक होती है, क्योंकि उसमें त्याग,तप, प्रेम, विरह और भक्ति के राग और अलंकार होते हैं। यह हर जीव के कल्याण की होती हैं। व्यक्ति को उसके अहंकार संतों तक नहीं आने देते ।
यह विचार सतगुरु कंवर साहेब महाराज ने गोहाना रोड पर स्थित राधास्वामी आश्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा संतों की वाणी जगत के रसों को समाप्त कर परमात्मा की भक्ति का रस जगाती है। रसों का भोग बर्बादी की तरफ लेकर जाती है। मृग, पतंग, हाथी और मछली जब केवल एक रस के कारण जल और मर जाते हैं, ऐसे में उस इंसान की गति सोचो क्या होगी। उन्होंने कहा कि वेद पुराण भी पूरा जोर देकर कहते हैं कि संतों के दर्शन से सारे रोग दोष मिट जाते हैं। व्यक्ति में बसे काम, क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार उनको संतों तक आने में रोकते हैं। इंसान इन सब पर काबू पाना होगा।
उन्होंने कहा कि कामी का गुरु काम, लोभी का गुरु लोभ होता है, लेकिन जिनके हृदय में सतगुरु का वचन है तो उनका समर्पण भी राम ही है। दुख में किसी इंसान के सामने याचना करने से अच्छा है कि हम सीधे प्रभु से ही प्रार्थना कर लें। हमें रिश्ते-नातों का अभिमान है। यह सब हमारा भ्रम है। उन्होंने कहा कि सांस बड़ा अनमोल है। इसको व्यर्थ नहीं खोना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैठते समय व्यक्ति 12, उठते समय 18 और काम के दौरान 30 सांस घटती हैं। उन्होंने कहा कि कलयुग भक्ति के लिए सबसे अच्छा युग है। चूंकि इसी युग में संत सतगुरु ने नाम भक्ति को प्रगट किया। जिसको आठ साल के बच्चे से लेकर साठ साल का बुजुर्ग भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि भक्ति एक दिन का काम नहीं है, यह तो सतत अभ्यास से ही संभव है। मां-बाप,बड़े बुजुर्गों का आदर सत्कार करना चाहिए। बच्चों को अच्छी शिक्षा व संस्कार देने का समय है। समाज को अपना आदर्श रूप दिखाओ। पर्यावरण व जल का संरक्षण करना जरूरी है।