माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महाबीर बांगड़ ने अपनी सेवानिवृत्ति को यादगार बनाते हुए अनोखे अंदाज में विदाई ली। 58 वर्षीय महाबीर बांगड़ रिटायरमेंट के बाद करीब 100 फीट ऊंची हाइड्रा क्रेन की बूम पर सवार होकर अपने पैतृक गांव कवी पहुंचे। इस दौरान उनके आगे थार और स्कॉर्पियो गाड़ियों का काफिला भी चल रहा था। अनोखी विदाई यात्रा को देखकर ग्रामीण भी हैरान रह गए।
महाबीर बांगड़ ने बताया कि वे लंबे समय से अपनी सेवानिवृत्ति को खास अंदाज में मनाने की योजना बना रहे थे। उन्होंने नौकरी के दौरान कई कर्मचारियों की विदाई देखी थी, जिसके बाद उन्होंने तय किया था कि अपनी रिटायरमेंट को यादगार बनाएंगे।
उनके बेटे ने बताया कि परिवार की सहमति के बाद जून की शुरुआत में ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं और रिटायरमेंट से करीब 10 दिन पहले विशेष रूप से हाइड्रा क्रेन बुक की गई थी। क्रेन को फूलों, मालाओं और रंग-बिरंगी चुनियों से सजाया गया था। सुरक्षा के लिए इसकी तकनीकी जांच भी कराई गई थी।
10 मिनट का सफर 50 मिनट में पूरा, पत्नी ने उतारी आरती
महाबीर बांगड़ को 30 जून को मतलौडा तहसील और पानीपत जिला लघु सचिवालय में अधिकारियों और साथियों ने स्मृति चिह्न देकर विदाई दी। इसके बाद वे हाइड्रा क्रेन पर सवार होकर गांव के लिए रवाना हुए और रास्ते भर डीजे की धुन पर नाचते रहे। सामान्यतः मतलौडा से गांव कवी तक का लगभग पांच किलोमीटर का सफर करीब 10 मिनट में तय होता है, लेकिन भीड़ और क्रेन की धीमी गति के कारण यह यात्रा लगभग 50 मिनट में पूरी हुई।
गांव पहुंचने पर उनकी पत्नी शीला देवी ने आरती उतारकर और तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। महाबीर बांगड़ के दो बेटे और एक बेटी हैं, जिनमें बड़ा बेटा चानू अमेरिका में और छोटा बेटा मोहित है।