पानीपत। इंग्लैंड में बैठे भाई का फर्जी तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के मामले में पुलिस ने आरोपी युवक देवीलाल निवासी रेरकलां को गिरफ्तार किया है। शहर थाना पुलिस ने मंगलवार शाम को आरोपी को रेरकलां से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने एसडीएम कार्यालय में तैनात बाबू और दलालों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से लाइसेंस बनवाना स्वीकार किया है। इसके लिए एक लाख रुपये में लाइसेंस बनवाने का सौदा तय हुआ था। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश कर एक दिन के रिमांड पर लिया है।
शहर थाना प्रभारी दीवान सिंह ने बताया कि जुलाई माह में रेरकलां निवासी सुभाष ने पुलिस को शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराया था। उनका कहना था कि रेरकलां के सुभाष करीब 20 साल से विदेश में रह रहा है। पानीपत एसडीएम कार्यालय में तैनात ड्राइविंग लाइसेंस क्लर्क अंकित ने दलालों के साथ मिलकर आरोपी सुभाष का फर्जी लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनाया है। इसके लिए उनका फर्जी तरीके से मेडिकल कराया गया और फोटो भी सत्यापित किए गए। यहां तक कि फाइल पर लिखा गया कि सामने खड़े व्यक्ति से फोटो का मिलान किया गया है। फाइल पर मोहर लगाकर कंप्यूटर ऑपरेटर अमित को दे दी। जिस पर अमित ने फाइल को ठीक मानकर चेक करके वापस अंकित से मिले दलाल को दे दी। इसके बाद उनका फर्जी तरीके से टेस्ट भी पास कराया गया। 30 अगस्त 2024 को लर्निंग लाइसेंस जारी हुआ। इसके बाद जनवरी 2025 में पक्का लाइसेंस बनवाने के लिए प्रक्रिया शुरू हुई। 28 जनवरी 2025 को फीस भी कटा दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया।
पुलिस तफ्तीश में सामने आया कि फाइल में लगे दस्तावेज, मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी हैं। फाइल में आरोपी के भाई देवीलाल का नंबर दिया गया था। मंगलवार को पुलिस ने देवीलाल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने एक लाख रुपये में लाइसेंस बनवाने का सौदा तय किया था। जिसमें से 50 हजार रुपये एडवांस दिए थे। देवीलाल ने बताया कि उसका बड़ा भाई सुभाष 20 साल पहले टूरिस्ट वीजा पर इंग्लैंड गया था और बाद में वहीं पर छिपकर रहने लगा। अब वह वैध तरीके से भारत वापस नहीं आ सकता था। इसके लिए दस्तावेज की जरूरत थी। इस कारण उसका लाइसेंस बनवाया था। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश कर एक दिन के रिमांड पर लिया है।