पानीपत। वह बेटी है, बहन है, पत्नी है और मां भी है। वह बेटी बनकर माता-पिता का नाम रोशन करती है, पत्नी बनकर अपने पति का सुख-दुख में साथ देती है और मां बनकर परिवार की जिम्मेदारी उठाती है, लेकिन पुरुष प्रधान समाज में अपनी स्थिति को नहीं सुधर सकी। शिक्षित समाज में उसको अधिकार जरूर दे दिए, लेकिन वे सब कागजों तक सिमटकर रह गए। स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं भी बनाई गई, लेकिन न भ्रूण हत्या रुकी और न ही लिंगानुपात सुधर पाया। जिले में आज भी लिंगानुपात 841 है। महिला आज भी शोषण का सामना कर रही है।
आज विश्व महिला दिवस है। जिले में सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर महिलाओं के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और वक्ता महिलाओं के लिए बड़ी-बड़ी बातें कहेंगे। ये सब उनकी कहने और सुनने तक सिमट गया है। उनको बचाने के लिए सरकारी स्तर पर भी कई योजनाएं बनी, लेकिन सब कागजों तक सिमटकर रह गई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में सेक्स रेशों 841 से आगे नहीं बढ़ पाया है।
नहीं लिया कोई सबक
स्वास्थ्य विभाग द्वारा भ्रूण हत्या को रोकने में व्यापक कदम उठाए गए, लेकिन भ्रूण हत्या को पूरी तरह से रोका नहीं जा सका। गत दिनों सनौली रोड स्थित एक अस्पताल के पास नाले में अलग-अलग दिनों में दो भ्रूण मिले। इनमें से दोनों भ्रूण बच्चियों के थे। इससे पहले सिविल अस्पताल के प्रांगण में भी एक बच्ची का भ्रूण मिला था।
आज भी शोषण का शिकार
महिलाएं आज भी शोषण का शिकार हो रही हैं। जिले में पिछले चार माह में महिलाओं की हत्या कर खुले में फेंकने के चार सनसनीखेज मामले सामने आए हैं। अकेले थर्मल के पास दो महिलाओं के शव मिले थे। जिनमें से एक महिला की हत्या दुराचार के बाद की गई थी। इससे पहले सेक्टर-18 में बाबरपुर नाले के पास एक महिला का शव मिला था। वीरवार को पानीपत-गोहाना बाईपास पर एक महिला का शव बरामद किया था। उसकी हत्या की आशंका जताई गई थी। पुलिस शव की शिनाख्त नहीं करा सकी है।
निर्वाचित महिला भी बनीं स्टैंप
महिलाओं को ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा तक सीटों में आरक्षण तो दिया जा रहा है, लेकिन निर्वाचित महिलाएं घर की चहारदीवारी तक सिमटकर रह गई हैं। कुछ ही महिलाएं अपने अधिकारों को इस्तेमाल कर पा रही हैं। नगर निगम हो या फिर पंचायत समिति की बैठक। हर जगह उनकी जगह पति परमेश्वर मिलेंगे। वे इन हालातों में रबर की स्टैंप बनकर रह गई हैं।
ये हैं विभाग के दावे
स्वास्थ्य विभाग सेक्स रेशों को बढ़ाने के लिए कई योजनाओं का लागू करने का दावा करता है। विभाग की माने तो लाडली व अन्य कई योजनाएं चल रही हैं। विभाग कन्या भ्रूण हत्या को रोकने की दिशा में भी सख्त कदम उठा रहा है और गत दिनों एमटीपी एक्ट के तहत सात-आठ मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं।
वर्जन
जिले में लिंगानुपात बराबर करने को लेकर काफी प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक करने के साथ एमटीपी को लेकर सख्त कदम उठा रहा है और एक्ट के तहत सात-आठ मुकदमे भी दर्ज कराए गए हैं। लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। इससे लिंगानुपात के अंतर को खत्म किया जा सकता है।
डॉ. इंद्रजीत धनखड़, सीएमओ, पानीपत