थर्मल। सफीदों से पानीपत की ओर आ रही एक निजी बस के चालक और परिचालक की लापरवाही का खामियाजा आठ साल की मासूम को भुगतनी पड़ी। यह मासूम बच्ची एक घंटेतक रोती रही। बच्ची को नौहरा मोड़ के बजाय सौदापुर उतारकर बस चालक चलता बना। राहगीरों ने बच्ची से नाम पता मालूम कर उसे मौसी के हवाले किया।
जींद जिले के खंड सफीदों के गांव कापड़ों निवासी निर्मला बुधवार को अपनी लड़की के पास दिल्ली जा रही थी। निर्मला ने अपनी आठ वर्षीय बच्ची को नौहरा में अपनी बहन कांता के पास छोड़ना था। चालक ने बस को नौहरा मोड़ पर रोकने के बजाय सौदापुर बस अड्डे पर जाकर रोका और बच्ची को सौदापुर उतार दिया। जबकि कांता नौहरा मोड़ पर अपनी भांजी का इंतजार करती रही। जब बच्ची को मौसी दिखाई नहीं दी तो उसने रोना शुरू कर दिया। राहगीरों ने उसके रोने का कारण पता किया। शुरू में तो लोगोें ने समझा कि शायद बच्ची की मां जानबूझकर छोड़ कर गई है। बच्ची ने बताया कि उसे अपनी मौसी के साथ जाना है। काफी देर बाद लोगों को समझ में आया कि बच्ची की मौसी नौहरा मोड़ पर उसका इंतजार कर रही है। राहगीर बच्ची को लेकर नौहरा मोड़ पर पहुंचे तो बच्ची ने अपनी मौसी को पहचान लिया। कांता ने भी लोगों के साथ अपनी बहन की बात कराई, जिसके बाद कांता को बच्ची सौंप दिया।