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विरोध के बीच आज होगा चुनाव

Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
Panipat
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पानीपत। एसडी एजुकेशन सोसाइटी का त्रिवार्षिक चुनाव भारी विरोध के बीच आज एसडी पीजी कालेज में होगा। प्रशासन ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। चुनावों के तुरंत बाद गिनती शुरू होगी और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। एसडी एजुकेशन सोसाइटी हर लिहाज से शहर ही नहीं, बल्कि जिले की सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक है। चुनाव से ठीक एक दिन पहले राजेंद्र गोयल गुट ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया। इस पक्ष के सभी 11 उम्मीदवारों ने चुनाव में मतदान नहीं करने और मतदान स्थल पर न जाने का फैसला लिया है। इस बारे में प्रशासनिक अधिकारियों और आरओ को भी अवगत करा दिया है। गोयल गुट के वरिष्ठ सदस्य अरुण गोयल ने चुनाव को अवैध माना है और इसके विरुद्ध कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है। वहीं जिला प्रशासन ने किसी प्रकार के बहिष्कार की सूचना नहीं होने और नियमानुसार चुनाव कराने की बात कही है।
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ये रहेगा चुनाव शेड्यूल
चुनाव स्थान : एसडी पीजी कालेज
मतदान समय : प्रात: 8 से 3 बजे
गिनती : 4 बजे के बाद।
परिणाम : गिनती पूरी होने के तुरंत बाद

ये है मामला
एसडी एजुकेशन सोसाइटी में सदस्यों को लेकर 2006 से लड़ाई चल रही है। उस समय राजेंद्र गोयल पक्ष द्वारा बनाए गए 93 सदस्यों पर रोशन लाल मित्तल पक्ष ने आपत्ति व्यक्त की थी। जिसका केस आज भी कोर्ट में चल रहा है। इस चुनाव में रोशन लाल मित्तल पक्ष के उम्मीदवार अधिकतर सीटों पर विजयी रहे। इन्होंने भी 13 एक बार और 21 सदस्य दूसरी बार बनाए। राजेंद्र गोयल गुट इन सदस्यों को लेकर कोर्ट में पहुंच गया। जिला कोर्ट ने 7 सितंबर 2012 को 13 सदस्यों को अवैध करार दिया था। इसके बाद दूसरा पक्ष कोर्ट में पहुंच गया। रोशन लाल मित्तल गुट ने 2010 की आम बैठक में 100 नए सदस्यों को बनाने का दावा किया। इसे लेकर गोयल गुट कोर्ट में चला गया। 15 सितंबर 2012 को सोसाइटी का त्रिवार्षिक चुनाव कार्यकाल पूरा हो गया और हाईकोर्ट ने गोयल गुट के 100 सदस्यों को मान्य घोषित कर दिया। उसी समय से सोसाइटी के राजेंद्र गोयल और रोशन लाल मित्तल गुट में तकरार चल रही है। प्रशासन ने इसी बीच 25 नवंबर को सोसाइटी का चुनाव घोषित कर दिया। जिसके बाद भी दोनों गुट लगातार कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं।

विस और लोस के होंगे मापदंड
एसडी एजुकेशन सोसाइटी के चुनाव विधानसभा और लोकसभा चुनाव के मापदंड अपनाए जाएंगे। फर्क समय और बेल्ट पेपर का होगा। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में ईवीएम से मतदान होता है और इसमें बेल्ट पेपर से मतदान कराया जाएगा। इसके लिए शनिवार को एसडी पीजी कालेज स्थित सोसाइटी कार्यालय में रिहर्सल की गई। इसमें सभी अधिकारी और चुनाव पार्टी के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
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पूरे शहर की निगाहें रहेंगी
एसडी एजुकेशन सोसाइटी के चुनाव पर सबकी निगाहें हैं। सबसे अधिक इन शिक्षण संस्थाओं में पढ़ने वाले करीब 25 हजार विद्यार्थी और एक हजार से अधिक स्टाफ सदस्यों की नजर है। यहीं नहीं इनमें पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों भी चुनाव के रिजल्ट के इंतजार में हैं।

25 हजार विद्यार्थी, एक हजार स्टाफ सदस्य
यह जिले की सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक है। इसके अंतर्गत एसडी सोसाइटी, एसडी पीजी कालेज, एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एसडी विद्या मंदिर जूनियर विंग, एसडी विद्या मंदिर सीनियर विंग, एमएएसडी पब्लिक स्कूल, एपिट एसडी इंडिया और एसडी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस आता है। इनमें करीब 25 हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। इन शिक्षण संस्थाओं का शहर में अपना वजूद है। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारियों को भी संस्था के स्कूल और कालेजों में बैठक और कार्यक्रम कराने पड़ते हैं।

प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
प्रशासन ने पूरे चुनाव में राजेंद्र गोयल गुट की अनदेखी हुई है। चुनाव घोषणा के बाद उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रशासन ने उनकी तरफ भी कोई ध्यान नहीं दिया। वे चुनाव विधि के विरोध में हाईकोर्ट में गए और हाईकोर्ट ने हरियाणा सोसाइटी एक्ट 2012 के तहत चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी की और चुनाव स्थगित नहीं किया। वे चुनाव के विरुद्ध कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और चुनाव दोबारा कराने की मांग करेंगे।
अरुण गोयल, वरिष्ठ सदस्य, राजेंद्र गोयल गुट

बायकाट का मतलब नहीं
प्रशासन गुटबाजी में नहीं बल्कि प्रजातंत्र में विश्वास रखता है। एसडी सोसाइटी के चुनाव में भी प्रजातांत्रिक तरीके से चुनाव कराए जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा चुनाव की घोषणा की गई थी और सबको इस विषय में सूचित कर दिया था। सोसाइटी के वरिष्ठ सदस्य अरुण गोयल ने नामांकन भरा था। उन्होंने बाद में अपना नाम वापस ले लिया। वे हाईकोर्ट में गए थे। प्रशासन ने हाईकोर्ट के दिशा निर्देश को ध्यान में रखते हुए उनकी संतुष्टि कर दी है और उनको इसका जवाब दे दिया है। कुछ उम्मीदवारों द्वारा चुनाव बहिष्कार करने का कोई फायदा नहीं है। वे नामांकन भरने के साथ चुनाव प्रणाली का हिस्सा बन चुके हैं।
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अश्वनी मलिक, एसडीएम पानीपत और आरओ सोसाइटी
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