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Panipat News: ऑस्ट्रेलिया और यूएसए के दो युगल समेत देशभर के 96 जोड़ों ने किया सामूहिक विवाह

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समालख। संत निरंकारी मंडल द्वारा तीन दिवसीय वार्षिक संत समागम के तीसरे दिन वीरवार को सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां हरियाणा समेत देशभर के 96 जोड़ों की शादी कराई गई। इनके साथ ही ऑस्ट्रेलिया व यूएसए से आए दो जोड़ों ने सामूहिक विवाह समारोह में भारतीय परंपरा के अनुसार विवाह किया। सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने इन जोड़ों को सुखी जीवन का आशीर्वाद दिया। नए जोड़े आशीर्वाद पाकर खुशी से झूम उठे।
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उल्लेखनीय है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल समालखा में आयोजित इस कार्यक्रम में हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, मध्य प्रद्रेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त दूर ऑस्ट्रेलिया, यूएसए देश से शामिल लगभग 96 नव युगल एक दूसरे के हुए। इस दौरान सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज व निरंकारी राजपिता ने उनको मंगलमयी जीवन की कामना का आशीर्वाद दिया। निरंकारी मिशन के अधिकारीगण, वर-वधू के माता-पिता, सगे-संबंधी व मिशन के अनेक श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे।

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निरंकारी लावों का हिंदी भाषा में पहली बार किया गायन
संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंद्र सुखीजा ने बताया कि सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आरंभ पारंपरिक जयमाला व निरंकारी शादी के विशेष चिह्न सांझा-हार द्वारा किया। इसके उपरांत भक्तिमय संगीत के साथ मुख्य आकर्षण के रूप में निरंकारी लावों का हिंदी भाषा में प्रथम बार गायन हुआ। जिसकी प्रत्येक पंक्ति में नव विवाहित युगलों के सुखमयी गृहस्थ जीवन के लिए अनेक कल्याणकारी शिक्षाएं प्रदान की गईं। नव विवाहित युगलों पर सतगुरु माता, निरंकारी राजपिता व उपस्थितजनों ने पुष्प वर्षा की। उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह आयोजन अपनी सादगी बिखेरता है। इसमें जाति, धर्म, वर्ण, भाषा जैसी संकीर्ण विभिन्नताओं से ऊपर उठकर एकत्व का सुंदर स्वरूप प्रदर्शित करता है।
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गृहस्थ जीवन में नर और नारी दोनों का समान स्थान : सुदीक्षा महाराज
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि गृहस्थ जीवन के पवित्र बंधन में नर और नारी दोनों का समान स्थान होता है। जिसमें कोई बड़ा या छोटा नहीं होता। अपितु दोनों की महत्ता बराबर होती है। यह एक अच्छी साझेदारी का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि साझा हार एकता के भाव को दर्शाता है। इसी तरह गृहस्थ जीवन में रहकर सभी रिश्तों को महत्व देते हुए सबके प्रति आदर भाव अपनाकर अपनी जिम्मेदारियों को निभाना है। गृहस्थ जीवन के सभी कार्यों को करते हुए नित्य सेवा, सुमिरन व सत्संग के साथ इस निरंकार का आसरा लेकर सुखद जीवन जीना है।
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