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स्वास्थ्य विभाग एक बच्चे के टीकाकरण व दवा पर खर्च रहा 21 हजार, फिर भी 22 प्रतिशत वंचित

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स्वास्थ्य विभाग एक बच्चे के टीकाकरण व दवा पर खर्च रहा 21 हजार, फिर भी 22 प्रतिशत वंचित
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पानीपत। जिले में टीकाकरण दुरुस्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर बच्चे पर 21 हजार रुपये खर्च कर रहा है। अब भी विभाग 22 प्रतिशत बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा। टीकाकरण के मामले में पानीपत राज्य में सातवें स्थान पर है। 4 साल पहले जिले में टीकाकरण का प्रतिशत केवल 24 था। टीकाकरण को प्रोत्साहन देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 7 जिलों में मोबाइल रीचार्ज सिस्टम भी शुरू किया है। जिले में हर साल 40 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। 2 साल तक की उम्र के 80 हजार बच्चे होते हैं लेकिन जागरूकता के अभाव में 22 हजार बच्चों को टीकाकरण नहीं हो पाता। तीन माह पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने रूबेला का इंजेक्शन लगाना भी शुरू किया है। इस एक इंजेक्शन की कीमत 7 हजार रुपये है। वंचित रहने वाले बच्चों में अधिकतर प्रवासी व बाहरी कॉलोनियों के बच्चे अधिक हैं। 21 हजार रुपए एक बच्चे पर खर्च होने के बाद भी टीकाकरण का जमीनी स्तर पर ना पहुंच पाना विभाग के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है।
रविवार को 87346 को पिलाई गई पोलियो की दवा:
स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को पांच साल तक के 87346 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई। इसके लिए 719 सेंटर बनाए गए थे। 100 से अधिक टीमों का इसके लिए गठन किया है। इन टीमों का सुपरविजन डॉक्टर व एएनएम कर रही है। सोमवार व मंगलवार को भी ये अधियान जारी रहेगा। सोमवा को स्कूलों में जाकर दवा पिलाई जाएगी।
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विभाग की चुनौतियां: स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को टीकाकरण के प्रति जागरूक करने के लिए निचले स्तर पर आशा वर्करों की नियुक्ति की है। आशा वर्करों को घर-घर जाकर बच्चों को लगने वाले इंजेक्शन के बारे में बताना होता है। विभाग अनुसार ही इस स्तर में अब भी सुधार की गुंजाइश है। आशा वर्कर लोगों को टीकाकरण के बारे लोगों को सही प्रकार से जागरूक नहीं कर पा रहीं। लोग टीकाकरण के लिए सीएचसी व पीएचसी में जाकर लंबी लाइनों में नहीं लगना चाहते। अगर श्रमिक तबके के लोग बच्चे को टीकाकरण के लिए पीएचसी में लेकर जाते है तो उनको एक दिन की दिहाड़ी का नुकसान होता है।
बाहरी कॉलोनियों में टीकाकरण करना बड़ी चुनौती: डॉ पासी
डॉ. मनीष कुमार पासी ने कहा कि टीकाकरण में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। विभाग हर बच्चे पर 21 हजार रुपये खर्च कर रहा है। प्रवासी लोग व बाहरी कॉलोनी में टीकाकरण करना सबसे बड़ी चुनौती है। काफी लोग टीकाकरण कराना नहीं चाहते। अब टीकाकरण सेवा कॉलोनियों के आसपास ही देने का प्रयास है। इसके लिए विभाग अपनी और से प्रयास कर रहा है।
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धीरे-धीरे हो रहा सुधार : डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नवीन सुनेजा ने कहा कि टीकाकरण सेवा में जिले में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। विभाग की कोशिश है कि अधिक से अधिक टीमें बनाकर लोगों तक पहुंचा जाए और उन्हें इसके प्रति जागरूक किया जाए।
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