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-काला आंब में मनाया गया 257 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शौर्य दिन समारोह

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शौर्य दिन समारोह में पानीपत की तीसरी लड़ाई की याद को किया ताजा,
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मराठा बोले सरकार के सहयोग लिए बनाएंगे अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्मारक
नागपुर महाराष्ट्र के महाराजा मुद्दोजी राजे भोसले ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत
-पानीपत, करनाल व कुरुक्षेत्र समेत 14 प्रदेशों के मराठे व रोड़-मराठा कार्यक्रम में हुए शामिल
फोटो-8 से 15
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। युद्धों की धरती पानीपत की सरजमीं पर पानीपत के तीसरे युद्ध के 257 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शौर्य दिन समारोह में महाराष्ट्र के मराठों व प्रदेश समेत 14 राज्यों के रोड़-मराठे भारी उत्साह के साथ शामिल हुए और अपने पूर्वजों की शहीदी भूमि को नतमस्तक होकर श्रद्धांजलि दी। काला आंब स्थित स्थल पर एक बार मराठों व अहमदशाह अब्दाली के बीच हुए पानीपत के तीसरे युद्ध की याद ताजा हो गई।
काला आंब पर शौर्य दिन समारोह का आयोजन मराठा जागृति मंच और रोड़-मराठा एकता संघ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। मुख्यातिथि नागपुर के महाराजा मुधोजी राजे भौंसले ने शिरकत की। जबकि अध्यक्षता मराठा जागृति मंच के अध्यक्ष वीरेंद्र मराठा ने की। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. वसंत केशव मोरे व एडवोकेट सुरेंद्र धवले सम्मानित अतिथि रहे। वीरेंद्र मराठा ने समारोह में अतिथियों का शाल और स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया। महाराजा मुधोजी राजे भौंसले और डॉ. वसंत केशव मोरे ने मराठों का भगवा ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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मुख्यातिथि मुधोजी राजे भौंसले ने कहा कि पिछले कुछ सालों से इतिहासकारों की खोज से पता चला है कि हरियाणा का रोड़ समाज पानीपत के तीसरे युद्ध के बचे हुए मराठों के वंशज हैं, तब से उन्हें बहुत खुशी हुई है। उन्होंने कहा कि मराठा एक वीर पराक्रमी कौम है, जिसने आज ही के दिन 14 जनवरी 1761 को पानीपत के इस मैदान में हजारों की संख्या में अपने अद्वितीय पराक्रम व कौशल का परिचय देते हुए देश की सीमाओं और अस्मिता की रक्षा की थी। उस लड़ाई के दौरान जो मराठा जिंदा बच गए थे, उन्होंने कुरुक्षेत्र के आसपास के जंगलों में रहकर अपनी जान बचाई थी और इतिहासकारों की गहन खोज से यह राज खुला है कि हरियाणा के विभिन्न जिलों में रहने वाले रोड़ जाति के लोग ही उन जिंदा बचे मराठों के वंशज हैं। वीर मराठों ने 1761 में अहमदशाह अब्दाली और उसकी सेना को मानसिक तौर पर भी हरा दिया था। विदेशियों के नजरिये से बेशक मराठा पराजित हुए थे, लेकिन एक देशभक्त के नजरिये से देखें तो ये हार नहीं थी। क्योंकि अब्दाली दिल्ली के तख्त पर बैठने की हिम्मत न कर सका था और वापस अपने देश चला गया था। महाराष्ट्र व अन्य राज्यों के मराठा राजपरिवारों से आए कार्यक्रम के अतिथियों ने कहा कि हरियाणा में बसने वाला रोड़ समाज पानीपत के तीसरे युद्ध के बचे हुए मराठों के वंशज है। मंच के अध्यक्ष वीरेंद्र मराठा ने कहा कि 1761 के इतिहास पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। उनकी ऐसी कल्पना है कि देश सभी मराठे प्रण लें कि उन्हें एकबार काला आंब में जरूर पहुंचना है। इससे ऐसा जागृति आएगी जैसी छत्रपति शिवाजी महाराज के समय में आई थी। इसके बाद पूरे भारत देश के मराठा जागृत हो जाएंगे। मराठा ने कहा कि 14 जनवरी का दिन सारे देश के मराठों के लिए एक त्योहार के रूप में मनाया जाना चाहिए। आने वाले समय में यहां एक अंतरराष्ट्रीय स्मारक बनेगा और आंब पर मेला लगा करेगा और पूरे देश से मराठा लोग एवं देशभक्त पानीपत पहुंचेंगे।

पानीपत व करनाल से शोभायात्रा के रूप में पहुंचे
काला आंब पर समारोह के आयोजन से पहले मराठा सेना शोभायात्रा निकाली गई। इसमें पानीपत के तीसरे युद्ध को झांकियों के माध्यम से दर्शाया गया। शोभायात्रा में छत्रपति शिवाजी महाराज, जीजामाता व मराठा सेना के तोपखाना प्रमुख इब्राहिम खान गार्दी की झांकी शामिल रही। शोभायात्रा में सैकड़ों की संख्या में लोग ढोल नगाड़ों और वीरता की धुन पर युद्धभूमि में पहुंचे। शोभायात्रा ने तीसरे युद्ध के इतिहास को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

काला आंब में बनाया जाएगा स्मारक
नागपुर के महाराजा छत्रपति मुधोजी राजे भौंसले ने कहा कि सरकार के सहयोग से बिना यहां पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्मारक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए वह पूरे देश के मराठों से संपर्क कर सहयोग देने का आह्वान करेंगे।

हरियाणा का रोड़ समाज हमारा भाई है : विधायक मुले
पूना से भाजपा विधायक जगदीश मुले ने कहा कि उन्होंने इतिहास को गहनता से पढ़ा है। वे इस निचौड़ पर पहुंचे हैं कि हरियाणा का रोड़ समाज पानीपत के युद्ध में बचे हुए मराठों सैनिकों का वंशज हैं। मुले ने कहा कि वीरेंद्र मराठा ने इस इतिहास की खोज की। वह उनके इस कार्य से सहमत हैं।

दो पुस्तकों का किया विमोचन
मुख्यातिथि मुधोजी राजे भौंसले द्वारा डॉ. वसंत केशव मोरे द्वारा मराठी में लिखी गई पुस्तक शौर्य तीर्थ पानीपत और शिवाजी राव चौहान द्वारा लिखी गई पुस्तक छत्रपति शिवाजी की स्त्री नीति का विमोचन किया गया। वीरेंद्र मराठा ने बताया कि शौर्य तीर्थ पानीपत पहली ऐसी पुस्तक है, जो मराठा इतिहास पर मराठी में लिखी गई है।
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क ार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में पूना के विधायक जगदीश मुले, मराठा महासंघ के अध्यक्ष अनिल पाटिल, पुणे बाबाराजे जाधवराव, संभाजी ब्रिगेड़ महाराष्ट्र के प्रदेशाध्यक्ष मनोज आखरे, एडवोकेट सुचेता पाटेकर, सतारा महाराष्ट्र से डॉ. शिवाजीराव चव्हाण, अमर जाधव, डॉ. सुभाष जाधव, प्राचार्य भानुदास मोहिने, बाबाजी राजे, वामनराव वासुदेव भिलारे, एडवोकेट सुरेंद्र धवले, महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव हरियाणा सुनीता बतान, प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. वसंत केशव मोरे, मिलिंग पाटिल, डॉ. मांगेराम मराठा व परमाल सिंह मौजूद रहे।
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