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90 प्रतिशत उद्योग चले, श्रमिकों का पलायन शुरू

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पानीपत। कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) ने 30 सितंबर के बाद कोयले से चलने वाले उद्योगों पर रोक लगा दी है। सीएक्यूएम ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कोयले पर चलने वाले उद्योगों पर कार्रवाई का निर्देश दिया है। शनिवार व रविवार को अधिकतर उद्योग बंद रहे, लेकिन सोमवार को सेक्टर-29 पार्ट-टू में 90 प्रतिशत उद्योग चलते मिले। काफी उद्योगों की चिमनियों से काला धुआं भी निकलता दिखाई दिया। उद्योगों में लोडेड वाहन आते-जाते रहे। सुबह आठ बजे श्रमिकों का जत्था पैदल, बाइक और ऑटो से औद्योगिक नगरी में पहुंचा और श्रमिकों ने काम किया। वहीं दूसरी ओर उद्योगों के बंद होने के भय से श्रमिकों का पलायन शुरू हो गया है। सोमवार को इंडस्ट्रियल एरिया से श्रमिकों के कई जत्थे अपने सामान के साथ रेलवे स्टेशन की ओर जाते दिखाई दिए। उनका कहना था कि अब वे किसी और जिले में रोजगार ढूंढेंगे।
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सीएक्यूएम ने लगभग 600 ऐसे उद्योगों की लिस्ट तैयार कर ली है, जिन पर कार्रवाई होनी है। मैनेजमेंट ने इन उद्योगों का पूरा डाटा जुटाया है, जिसमें किस उद्योग में कौन सा ईंधन इस्तेमाल हो रहा है। किस उद्योग में पीएनजी की सप्लाई है, किन उद्योगों ने पीएनजी की सप्लाई के लिए अप्लाई किया है। किन क्षेत्रों में पीएनजी की पाइपलाइन नहीं है...आदि बिंदुओं के आधार पर एचएसपीसीबी अब उद्योगों पर कार्रवाई करने के मूड में है।
पीएनजी सप्लाई देने वाली कंपनियों ने पाइपलाइन के काम में तेजी ला दी है। सेक्टर 25 और 29 में पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है। ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में भी लाइन दब चुकी है। अब बापौली रोड और इसराना की तरफ से पाइपलाइन का काम शुरू नहीं हुआ है। जहां पाइपलाइन नहीं है, वहां उद्यमियों को एक दिसंबर तक का वक्त दिया गया है।
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पूर्वांचल कल्याण समिति के अध्यक्ष सुमन झा लगातार श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। उन्होंने अपील की है कि फिलहाल श्रमिक पलायन न करें। इस बारे में पूर्वांचल कल्याण समिति विधायक और उपायुक्त को उद्योगों को बंद न करने के संबंध में ज्ञापन भी देगी।
अक्तूबर की शुरुआत होते ही एयर क्वालिटी इंडेक्स भी बढ़ने लगा है। सितंबर में एक्यूआई ग्रीन जोन यानी 90 से नीचे था। अब पिछले तीन दिनों से एक्यूआई 120 से अधिक है। सोमवार को एक्यूआई 127 दर्ज किया गया है, जो कि चिंताजनक माना जाता है।
शहर के सेक्टर 29 पार्ट टू में 400 डाइंग यूनिट हैं। हर रोज इन यूनिटों में दो लाख किलो कपड़ा डाई होता है। इनमें कंबल, धागा, बेडशीट, तौलिये व पिलो कवर शामिल है। डाई होने के बाद माल तैयार करने की अगली प्रक्रिया शुरू होती है। 400 डाइंग यूनिट में लगभग 20 लाख किग्रा माल है। डायर्स जल्द से जल्द ऑर्डर पूरा करना चाहते हैं। ताकि उनकी पेमेंट स्टॉक न हो।
उद्यमियों की मांगें -
- जुर्माना कम किया जाए और जेल का प्रावधान हटाया जाए।
- उनको पीएनजी पर बॉयलर को शिफ्ट करने के लिए दो साल तक का वक्त दिया जाए।
- एपीएम 800 से 80 पर लाना मुश्किल है, उनको इसमें राहत मिले।
- बॉयलर विशेषज्ञों की टीम उपलब्ध कराई जाए।
- पीएनजी के दाम स्थिर किए जाएं।
- जहां पीएनजी की पाइपलाइन नहीं है, वहां ये नियम लागू न हों।
- शहर में अडानी के अलावा दूसरी कंपनियां भी आएं। ताकि उन्हें गैस सस्ती मिले।
जल्द शुरू करेंगे कार्रवाई
एक्यूसीएम की ओर से कोयला संचालित उद्योगों पर कार्रवाई के निर्देश मिले हैं। कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। जल्द नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर कार्रवाई करेंगे।
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- कमलजीत सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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