ऑन ड्यूटी पक्के बिजली कर्मचारियों की मौत हुई तो परिवार को मिलेंगे 30 लाख, कच्चे कर्मचारी को दस लाख
पानीपत। बिजली निगम ने पक्के व कच्चे कर्मचारियों के लिए एक बीमा योजना निकाली है, जिसके तहत ऑन ड्यूटी पक्के कर्मचारी की मौत पर उसके परिवार को तीस लाख रुपये सहायता दी जाएगी। वहीं इस योजना में कच्चे कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। अगर कच्चे कर्मचारी की ऑन ड्यूूटी मौत हो जाती है, तो उसके परिवार को सहायता के रूप में दस लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके लिए निगम ने एक निजी बैंक के साथ अनुबंध किया है। अनुबंध के तहत निगम के 70 प्रतिशत कर्मचारियों के सैलरी अकाउंट उस निजी बैंक में होने अनिवार्य है। जनवरी में ही निगम द्वारा सभी के सैलरी अकाउंट शिफ्ट कर दिए जाएंगे। निगम का यह अनुबंद पांच साल के लिए हुआ है। वैसे तो यह स्कीम पिछले कई माह से चल रही थी, लेकिन पहले वाले निजी बैंक ने इसको बंद कर दिया व सहायता देने के नाम पर हाथ खड़े कर दिए। यूनियन नेता देवेंद्र हुड्डा ने कहा कि इस साल ड्यूटी के दौरान 108 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। पहले जिस बैंक के साथ अनुबंद था, उसने स्कीम से विड्रा कर लिया। हुड्डा ने कहा कि निगम में हर साल 70 के लगभग कर्मचारी अपनी जान गंवाते हैं। एक सर्वे के अनुसार सरकारी विभागों में सबसे ज्यादा जोखिम बिजली निगम के कर्मचारी को रहता है, लेकिन निगम के कर्मचारी को जोखिम भत्ता नहीं दिया जाता।
पक्के कर्मचारियों के लिए स्कीम के लाभ
1. जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट पर स्कीम उपलब्ध है।
2. प्राकृतिक मृत्यु पर ढ़ाई लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। बिना किसी प्रीमियम के।
3. हादसे के कारण मौत होने पर तीस लाख रुपये, बिना किसी प्रीमियम के ।
4. कर्मचारी की हादसे के कारण हुई मृत्यु पर उसके परिवार को चार साल तक हर साल एक लाख रुपये पढ़ाई के नाम पर भत्ता दिया जाएगा।
5. कर्मचारी के लिए जीरो बैलेंस फैमिली अकाउंट की स्कीम भी है, जो बिना किसी मिनीमम बैलेंस की शर्तों पर चलेगा। जिसमें कंपनी द्वारा ऑफ ड्यूटी के हादसे पर भी 11 लाख रुपये की सहायता मिलेगी। जिसके लिए कंपनी ने कुछ शर्तें भी रखी है।
कच्चे कर्मचारियों के लिए स्कीम के लाभ :
1. जीरो बैलेंस सैलरी अकाउंट खुलेगा
2. प्राकृतिक मृत्यु पर एक लाख रुपये की सहायता
3. हादसे के कारण मृत्यु पर परिवार को दस लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
4. फैमिलढी अकाउंट पर भी कच्चे कर्मचारियों के लिए ऐक्सीडेंटल बिमे के नाम पर 11 लाख रुपये रखे गए हैं, जिसमें कंपनी की कुछ शर्तें पूरी करनी पड़ेेगी।
निगम को करने पड़ेंगे एक बैंक से दूसरे बैंक में सैलरी अकाउंट ट्रांसफर :
बिजली निगम के सैलरी अकाउंट पहले एक निजी बैंक में थे, जिन्हें अब दूसरे निजी बैंक में शिफ्ट किया जाएगा। अनुबंध के तहत 70 प्रतिशत अकाउंट निजी बैंक में होने जरूरी है। वहीं यूनियन कर्मचारी देवेंद्र हुड्डा ने कहा कि निगम को किसी एक अच्छे से बैंक के साथ अनुबंध करना चाहिए, जो बीच में ही विड्रा ना करे, कर्मचारियों के लिए बार बार सैलरी अकाउंट बदना कठीन है।
स्कीम की शर्तें :
स्कीम के तहत केवल 70 वर्ष तक के कर्मचारियों को इसमें शामिल किया गया है। स्कीम का फायदा केवल उन्हीं को मिलेगा, जिसकी अंतिम सैलरी उनके निजी बैंक के सैलरी अकाउंट में ही आई हुई हो। कर्मचारी का प्राइमरी अकाउंट सैलरी अकाउंट ही होना चाहिए। मृत्यु के बाद 90 दिनों के अंदर बीमा क्लेम करना अनिवार्य है। कागज जमा करवाने के लिए 180 दिनों का टाइम दिया जाएगा। कागजात पूरे होने के बाद 90 दिनों के अंदर क्लेम राशि दी जाएगी।