अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। प्रदेश में संविधान बचाओ संघर्ष समिति की ओर से हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा के पीछे किसी असामाजिक तत्व का हाथ है। यह बात संविधान बचाओ संघर्ष समिति के वरिष्ठ सदस्यों ने मंगलवार को बैठक के बाद जारी एक विज्ञप्ति में कही है।
संविधान बचाओ संघर्ष समिति के नेता प्राण रत्नाकर व नारायण पुनिया ने दावा किया है कि दलित समाज का कोई व्यक्ति हिंसा जैसा अपराध कर ही नहीं सकता है। दलित समाज के लोग स्वभाव व चरित्र से सहनशील होते हैं। वह कानून का पालन करते हैं। बैठक में नरायण पुनिया, सुनील भोरिया, गोविंदा लोहाट, रविन्द्र नाफरिया ने सरकार से मांग की है कि 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान हिंसा की घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जब तक जांच रिपोर्ट आ नहीं जाती है तब तक किसी निर्दोष दलित को गिरफ्तार न किया जाए। दलित नेताओं ने कहा कि हिंसा में उन लोगों का हाथ हो सकता जो दलित व गैर दलित को लड़ा कर अपना हित साधना चाहते हें। प्राण रत्नाकर ने एलिवेटेड व सड़क पर जाम के लिए हिसार के जिम्मेवार लोगों के बारे में पुलिस को जानकारी दे दी है। पानीपत के संघर्ष समिति के लोगों ने शांति प्रिय तरीके से अपना प्रदर्शन का प्लान तैयार किया था। हिसार से लोगों का आना अभी भी उनकी समझ में नहीं आ रहा है।
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हिंसा तोड़-फोड़ में दलित शामिल नहीं, उच्चस्तरीय जांच की मांग
- किसी निर्दोष दलित को न किया जाय गिरफ्तार- प्राण रत्नाकर