सरकार और कर्मचारियों की रस्साकशी में मरीज मुश्किल में, स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाईं एनएचएमकर्मियों ने दो और दिन बढ़ाई हड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सरकार और एनएचएम कर्मचारियों की रस्साकशी में जिले में स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गईं हैं। एंबुलेंस के चक्के थमे हुए हैं तो स्टोर से मरीजों को दवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इससे निपटने के लिए इंतजाम भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। इधर, सरकार की ओर से कोई प्रयास होते नजर नहीं आ रहे हैं, जिसको लेकर एनएचएमकर्मियों ने दो और दिन के लिए हड़ताल बढ़ा दी है। वहीं किसी तरह दवा लेकर गए मरीज के परिजनों का कहना है कि, दवा देने के बाद मरीज को दस्त शुरू हो गई। परिजनों को शक है कि, दवा देने के लिए नियुक्त किए गए ट्रेनी ने सही दवा नहीं दी, इससे तबीयत बिगड़ गई।
हरियाणा एनएचएम कर्मचारी संघ के बैनर तले पूर्व घोषित हड़ताल बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने सिविल अस्पताल के पार्क में सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। जिला प्रधान अमित मलिक ने कहा कि सरकार वादा करने के बाद भी कर्मचारियों की मांगों को लागू नहीं कर सकी। जिसके चलते कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी मांगों को लागू होने तक काम पर आने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में यूनियन ने दो और दिन के लिए हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। एनएचएम कर्मचारियों ने दिनभर की हड़ताल के बाद दोपहर बाद सीएमओ डॉ. संतलाल वर्मा को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
एंबुलेंस सेवा ठप होने से प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों की चांदी
एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के चलते सरकारी एंबुलेंस बुधवार को दूसरे दिन भी ठप रही। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों और तीमारदारों को उठानी पड़ी। मरीजों को पीजीआईएमएस खानपुर और रोहतक जाने के लिए प्राइवेट एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ा। इन सबके बीच प्राइवेट एंबुलेंस चालकों की दिनभर चांदी रही। एक प्राइवेट एंबुलेंस के चालक ने बताया कि उसकी एंबुलेंस सुबह से लेकर शाम तक लगातार चल रही है। वे अपने स्तर पर मरीजों को परेशान नहीं होने दे रहे।
ओपीडी भी लगातार घट रही
एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद सिविल अस्पताल की ओपीडी दूसरे दिन भी घट गई। कर्मचारी संघ के अनुसार बुधवार को 500 ओपीडी हुई है। वहीं सामान्य दिनों में 850 ओपीडी होती थी। एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के पहले दिन मंगलवार को 550 ओपीडी हुई थी। मरीज बुधवार को कम ही अस्पताल में पहुंचे। ऐसे में ओपीडी की खिड़की भी खाली रही।
ये हैं प्रमुख मांग
एनएचएम के तहत 12,500 कर्मचारी काम कर रहे हैं। जिनमें अधिकतर कर्मचारी 15 साल से काम कर रहे हैं। वे कर्मचारियों को स्थायी सेवा सुरक्षा प्रदान करने की मांग कर रहे हैं। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की तरह सर्विस बायलॉज बनाते हुए नियमित वेतन लाभ तुरंत प्रभाव से दिया जाए। एनएचएम कर्मचारियों को केंद्र सरकार की ओर से आरओपी में आठ प्रतिशत की स्वीकृति दी गई है। उसको जल्द ही लागू किया जाए।
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बेटे को दिलवाकर गई थी दवा, लग गए दस्त
नूरवाला निवासी भारती बुधवार को सिविल अस्पताल में अपने बेटे को लेकर आई थी। उसने बताया कि वह अपने लड़के को मंगलवार को सिविल अस्पताल से दवा दिलवाकर गई थी। दवा देने के कुछ देर बाद ही उसके लड़के को दस्त शुरू हो गए। उसको लगता है कि अस्पताल के स्टोर से दवा उल्टी सीधी दी गई है।
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नैन गांव निवासी कमल बुधवार को सिविल अस्पताल में दवा लेने आया था। उसको उसकी छाती में दर्द है और बलगम भी आ रहा है। उसने ओपीडी की पर्ची बनवाकर डॉक्टर से चेकअप कराया। डॉक्टर से दवा लिखने के बाद स्टोर में दवा लेने गया। यहां पर कर्मियों ने वीरवार को दवा लेने आने की कही। उसको मजबूरीवश बाहर से दवा लेनी पड़ी।
वर्जन
एनएचएम कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनको समझाया गया है, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। सिविल अस्पताल में इलाज में कुछ परेशानी है। वे अपने स्तर पर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने को लेकर प्रयासरत हैं।
डॉ. संतलाल वर्मा, सीएमओ, पानीपत।