पानीपत। कोरोना काल में सबसे अधिक चिंता बच्चों का कोरोना संक्रमित होना है, क्योंकि बच्चे स्वयं का ध्यान नहीं रख सकते हैं। घर के बड़े ही बाहर से संक्रमण लाकर बच्चों को संक्रमित कर रहे हैं। जिले में अब कोरोना के एक्टिव रोगियों की संख्या 6098 है। इनमें से 620 ऐसे रोगी हैं, जिनकी आयु 15 साल से कम है। अप्रैल में दो ऐसे रोगियों की मौत भी हुई है, जिनकी उम्र 17 साल से कम थी। जिले में कोरोना के रोगियों का आंकड़ा 27 हजार पार हो चुका है। इनमें से साढ़े 3 हजार रोगियों की उम्र 15 वर्ष से कम है। राहत की बात ये है कि बच्चे बड़ों के मुकाबले जल्द कोरोना को मात दे रहे हैं। बच्चों में कोरोना के लक्षण भी गंभीर मिल रहे हैं। 22 वर्ष से अधिक आयु के रोगी औसत 7-10 दिन में कोरोना को मात दे रहे हैं, जबकि बच्चे 6-9 दिन के भीतर ही कोरोना से जंग जीत रहे हैं।
अब चिंता की बात यह है कि अब तक सरकार ने बच्चों को कोरोना से दूर रखने के लिए कोई ठोस प्लानिंग नहीं की है। 18 वर्ष से अधिक आयु वालों को वैक्सीन लगाई जा रही है। बच्चों के लिए वैक्सीन के अब तक द्वार नहीं खुले हैं। इसलिए बड़ों की ही जिम्मेदारी है कि वे परिवार के छोटों का ख्याल रखें। कोविड-19 संक्रमण का खतरा जितना बड़ों को है, उतना बच्चों को भी है।
छोटे बच्चे के लिए मां का दूध आवश्यक : डॉ. निहारिका
सिविल अस्पताल की शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. निहारिका ने बताया कि बच्चा यदि मां के दूध पर निर्भर है तो मां अपनी साफ-सफाई का ध्यान रखें। मास्क पहनकर ही स्तनपान कराए। मां के दूध में एंटीबाडी मिश्रित हैं, जो शिशु को संक्रमण से बचा सकती हैं। मां संक्रमित है तो दूध से बच्चे को संक्रमण हुआ हो, अभी तक ऐसी रिपोर्ट सामने नहीं आई है। बच्चा बड़ा है तो उसे हेल्दी डाइट दें। डाइट में हरी सब्जियां, फल, दूध, अंडा और वेजीटेबल सूप जैसी खाद्य सामग्री को शामिल करें। खेल-खेल में बच्चों की पढ़ाई को जारी रखें। नियमित टीकाकरण को मिस न होने दें, ताकि बच्चे कई तरह के संक्रमण से बचे रहें। किसी बच्चे को तेज बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी-दस्त, डायरिया, पेट में दर्द की समस्या है तो तुरंत अनुभवी चिकित्सक से परामर्श लें। चिकित्सक ने कहा कि कोरोना वैक्सीनेशन जारी है, 45 या इससे अधिक आयु वाले लोग टीका जरूर लगवाएं। परिवार के सभी सदस्यों की इम्युनिटी मजबूत होगी, तो बच्चों को भी संक्रमण का खतरा कम रहेगा।
बच्चों का ऐसे रखें ध्यान
उन्हें घर से बाहर न खेलने दें।
उन्हें मास्क पहनना जरूर सिखाएं।
फिजिकल डिस्टेंसिंग के लाभ बताएं।
हैंडवॉश करना सिखाएं, लाभ भी बताएं।
बाहर लावारिस पड़ी कोई वस्तु न उठाएं।