पानीपत। चार दिन से लापता दो सगी बहनों की फोटो व्हाट्सएप ग्रुप मेें वायरल होने के बाद उनके माता-पिता तक पहुंचा जा सका। दोनों सगी बहनें है, जिन्हें माता-पिता से मिलवाने में सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई। रेलवे स्टेशन पर गत दो मई को एक ट्रेन के टीटी ने माता-पिता से बिछड़ गईं दो बच्चियों को आरपीएफ पानीपत के सुपुर्द किया था। आरपीएफ ने दोनों बच्चियों को उसी रात पानीपत सीडब्ल्यूसी के माध्यम से शेलटर होम में भिजवा दिया। इसके बाद से सीडब्ल्यूसी टीम के सदस्य बच्चियों के परिजनों तक पहुंचने का प्रयास करने लगे। जिस दौरान चंडीगढ़-हरियाणा के लोगों के साझा व्हाट्सएप ग्रुप में दोनों में से एक बच्ची के स्कूल का पहचान-पत्र वायरल हुआ। इस ग्रुप में पानीपत सीडब्ल्यूसी के एक सदस्य भी जुड़े हुए थे। जिन्होंने पहचान-पत्र पर मौजूद बच्ची के फोटो को मिलाया और स्कूल से संपर्क किया। स्कूल के प्रिंसिपल से बातचीत कर बच्चियों के चंडीगढ़ से ही होने की पुष्टि हुई। इसके बाद वहां की सीडब्ल्यूसी टीम से संपर्क साधा गया। मंगलवार को सभी कागजी कार्रवाई पूरी होने पर बुधवार को लीगल सेल व पुलिस के माध्यम से बच्चियों को चंडीगढ़ सीडब्ल्यूसी टीम को सौंपा जाएगा।
पिता लगाते हैं गोल-गप्पे की रेहड़ी, इंटरनेट के माध्यम से ढूंढ निकाला : सीडब्ल्यूसी सदस्य डॉ. मुकेश आर्य ने बताया कि गत दो मई की रात दो बजे पानीपत आरपीएफ ने उनसे संपर्क किया। जिसमें 10 साल व 7 साल की दो सगी बहनों को रेलवे स्टेशन पर टीटी ने आरपीएफ को सौंपा था। टीटी ने आरपीएफ को बताया था कि दोनों बच्चियां चंडीगढ़ से ट्रेन में बैठी थीं और उनसे टिकट के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया था कि वे खेलती-खेलती ट्रेन में बैठ गईं थीं। बच्चियों को उक्त रात को शेलटर होम भिजवाया गया। बातचीत में पता लगा कि दोनों चंडीगढ़ से ही हैं। सोमवार को पंचकूला के पूर्व विधायक की पत्नी अंजलि डीके बंसल नामक व्हाट्सएप ग्रुप में बच्ची का स्कूल सर्टिफिकेट जारी हुआ। जिसमें बच्ची की गुमशुदगी के बारे में मैसेज था। इस ग्रुप में पानीपत सीडब्ल्यूसी टीम के सदस्य मुकेश आर्य भी जुड़े हुए थे। सर्टिफिकेट में लगी फोटो के आधार पर डिटेल मैच की, तो पाया कि ये ही बच्ची है। सर्टिफिकेट को बच्ची ने भी पहचान लिया। ग्रुप में जिसने ये फोटो डाली, उससे संपर्क किया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद इंटरनेट से स्कूल का नंबर निकाला। जिसके बाद प्राचार्य से बातचीत की, जिन्होंने बच्चियों को पहचान लिया। इसके बाद प्राचार्य की बच्ची से बात करवाई। प्राचार्य से स्कूल रिकॉर्ड में बच्ची के परिजनों का मोबाइल फोन नंबर को सर्च कर उनके परिजनों से संपर्क साधने के बारे में कहा गया है। वहीं बच्चियों ने बताया कि उनके पिता सुकनालेख के आस-पास गोल-गप्पे की रेहड़ी लगाते हैं।