2016-17 में स्वास्थ्य विभाग ने की 44 निजी अस्पतालों व 88 मेडिकल स्टोर पर रेड, इसलिए लिंगानुपात में थे नंबर वन, इस साल नहीं की कही रेड, 17वें स्थान पर पहुंचा पानीपत
पानीपत। लिंगानुपात में पानीपत पूरी तरह पिछड़ चुका है। पहले स्थान पर रहने वाला पानीपत इस साल प्रदेश में 17 वें स्थान पर खिसक गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को पानीपत से ही बेटी बचाओ बढ़ाओ अभियान की शुरूआत की थी। उस वक्त पानीपत का लिंगानुपात मात्र 791 का था और प्रदेश में 20वें स्थान पर था। पानीपत बेटियों की गर्भ में हत्या करने के लिए भी बदनाम था। अभियान की शुरूआत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों व मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी शुरू की। 2016 में रेड कर 28 निजी अस्पताल लिंग जांच करते पकड़े। इसी साल 42 मेडिकल स्टोर से एमटीपी किट पकड़ी गई। 2017 में 16 निजी अस्पतालों पर रेड की गई और 46 मेडिकल स्टोरों से एमटीपी किट पकड़ी। इन सबको गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भी पांच बार रेड कर लिंगजांच का भंडाफोड़ किया गया। इस कार्रवाई का परिणाम ये रहा कि 2016 में पानीपत का लिंगानुपात बढ़कर 912 और 2017 में 945 हो गया और पानीपत प्रदेश में नंबर वन बन गया। इसके लिए डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सुधीर बत्तरा को सम्मानित किया गया। 2018 में स्वास्थ्य अधिकारियों में तालमेल की कमी व खींचतान के कारण एक भी निजी अस्पताल पर रेड नहीं हो पाई। पीएनडीटी इंचार्ज को बदल दिया गया। मात्र तीन मेडिकल स्टोर पर एमटीपी किट पकड़ी और तीन झोलाछापों पर रेड कर खानापुर्ति की गई। इसका परिणाम ये रहा कि पानीपत का लिंगानुपात नीचे गिर गया। अब पानीपत का लिंगानुपात 945 से गिरकर 891 रह गया। ये प्रदेश में 17वें स्थान पर है। इस लिस्ट में पहले स्थान पर 1000 लड़कों के मुकाबले 938 लड़िकयों के साथ यमुनानगर पहले स्थान पर है। जबकि 862 लिंगानुपात के साथ झज्जर सबसे अंतिम स्थान पर है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आए लिंग जांच के मामले
स्वास्थ्य विभाग ने दो साल में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर व शामली में रेड कर लिंग जांच के पांच मामलों का भंडाफोड़ किया। यहां 10-10 साल से लिंग जांच का काम चल रहा था। जानकारी के मुताबिक पानीपत की काफी महिलाएं वहीं जाकर लिंग जांच कराती थी। से केस अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
लिंग जांच के मामले पकड़े जाने लगे तो बच्चियों को बेसहारा छोड़ना शुरू हुआ:
स्वास्थ्य विभाग ने 2016-17 में जिले भर पर लिंग जांच करने वालों पर अंकुश लगाना शुरू किया और रेड शुरू की तो बेटियों के दुशमनों ने उनको जन्म देकर बेसहारा छोड़ना शुरू कर दिया। 2016 में 5 बेटियों को जन्म के झाड़ियों में फेंक दिया। 2017 में 4 व 2018 में 3 बेटियों को दुत्कार दिया गया।
ये हैं सभी जिलों की लिंगानुपात में स्थिति:
जिला 2016 2017 2018
यमुनानगर 898 943 938
सिरसा 935 928 938
जींद 900 898 931
कुरूक्षेत्र 851 924 924
सोनीपत 901 935 918
करनाल 908 923 918
पंचकुला 923 910 917
फरीदाबाद 895 907 916
नूहं 912 908 915
भिवानी 895 913 914
हिसार 913 921 910
रेवाड़ी 870 893 905
पलवल 913 914 904
अंबाला 912 925 902
गुरूग्राम 883 901 900
महेंद्रगढ़ 850 881 895
पानीपत 912 945 891
रोहतक 905 891 888
फतेहाबाद 918 909 887
झज्जर 884 920 862
अब दोबारा कार्रवाई शुरू करेंगे: डॉ. बत्तरा
एक साल पहले पानीपत लिंगानुपात में पहले स्थान पर था। इसके बाद उनसे पीएनडीटी का चार्ज ले लिया गया था। अब उनको दोबारा पीएनडीटी का चार्ज मिला है। वो दोबारा निजी अस्पतालों व मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई शुरू कर रहे हैं। इसके लिए प्लानिंग चल रही है। अब पानीपत का लिंगानुपात 891 है ये काफी चिंतनीय है। जल्द इसमें सुधार होगा।
सुधीर बतरा, पीएनडीटी इंचार्ज व डिप्टी सिविल सर्जन पानीपत।