सरकार के तीन साल, विकास के नाम पर पत्थर लगे, मूर्त रूप नहीं मिला
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। सरकार के दावों व हकीकत के तीन साल। इन तीन सालों में शहर में ही नहीं जिले में कई परियोजनाओं के पत्थर तो लगे, लेकिन इन परियोजनाओं को मूर्त रूप आज तक नहीं मिल सका। यहीं नहीं सीएम की घोषणाओं पर भी अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। इन योजनाओं का मूर्त रूप न मिलने पर लोगों को खुद परेशानी हो रही है।
प्रदेश में तीन साल पहले आज ही के दिन भाजपा की सरकार बनी थी। भाजपा व पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने उस वक्त सत्ता में आने पर कई तरह की सुविधाएं व नई परियोजनाओं को लेकर आने का दावा किया था। जनता ने उन पर विश्वास भी किया। जिले की चार में से तीन विधानसभाओं में भाजपा के उम्मीदवारों को जीत दिलाई। चौथी सीट निर्दलीय रविंद्र मच्छरौली को मिली थी। रविंद्र मच्छरौली ने भी भाजपा को अपना समर्थन कर दिया था। यानी जिले की चारों विधानसभा सीट भाजपा के खाते में चली गई। लोगों को भी विकास की उम्मीद जगी और सरकार ने भी कई परियोजनाओं के पत्थर लगाए। सरकार के तीन साल में एक भी बड़ी परियोजना को मूर्त रूप नहीं मिल सका है।
बाहरी कॉलोनी मूलभूत सुविधाओं को तरसी, विधायक विस में उठा चुके मामला
शहर में सबसे अधिक करीब 79 कॉलोनी हैं। ग्रामीण विधायक ने बाहरी कॉलोनीवासियों को सरकार आने पर वैध कराने का भरोसा दिया था। विधायक महिपाल ढांडा इस मांग को विधानसभा में उठा चुके हैं, लेकिन बाहरी कॉलोनी वैध नहीं हो सकी। नगर निगम द्वारा इन कॉलोनियों में आरडब्ल्यूए बनाकर आधा बजट स्थानीय लोगों द्वारा जुटाने की कही गई। इन कॉलोनियों में ड्रेनेज तक की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। विधायक महिपाल ढांडा ने विस के तीन दिवसीय सत्र में भी कॉलोनियों में ड्रेनेज व गलियों के लिए 10-20 करोड़ रुपये की राशि मंजूर कराने की बात कही थी।
शुगर मिल को नहीं मिला मूर्त रूप, किसान परेशान
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दो साल पहले डाहर गांव में नए शुगर मिल की आधारशिला रखी थी। मुख्यमंत्री ने अगले एक साल में मिल शुरू कराने का दावा किया था। किसानों को भी इसमें उम्मीद जगी थी। सरकार शुगर मिल की दो साल में एक ईंट तक लगाना तो दूर यह भी तय नहीं कर पाई कि मिल को सरकार चलाएगी या फिर कोई प्राइवेट कंपनी। भाकियू इस बात को कई बार उठा चुकी है, लेकिन शुगर मिल नहीं मिल सका है। किसानों को इस बार का सीजन भी पुराने मिल के सहारे की काटना पड़ेगा। वहीं मिल की कैपेसिटी कम होने पर अपना गन्ना आसपास की मिलों में भी खुद ही लेकर जाना पड़ेगा। ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा ने कहा कि शुगर मिल व बाहरी कॉलोनियों को लेकर लगातार प्रयास किया जा रहा है। बाहरी कॉलोनियों में मूलभूत सुविधा मुहैया कराई जाएंगी।
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शहर में रैनीवेल प्रोजेक्ट मिला और न ही हाली पार्क का मूर्त रूप
शहरी विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी पेयजल की समस्या है। जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा करीब साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये का रैनीवेल प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। जिसके अंतर्गत यमुना की तलहटी में कुएं खोदकर पानी एकत्रित किया जाएगा और वहां से पानी शहर में सप्लाई किया जाएगा। इसमें 20 प्रतिशत राशि प्रदेश सरकार व 80 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा दी जानी है। यह परियोजना कागजों में अधिकारियों की एक टेबल से दूसरी टेबल तक आने-जाने में रह गई। वहीं हाली पार्क को भी मूर्त रूप नहीं मिल पाया है। करीब 23 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केवल फाइलों में ही अटका हुआ है। शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी ने बताया कि शहर में विकास कराए जा रहे हैं और नई परियोजनाओं को जल्द ही मूर्त रूप दिया जाएगा।
सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग नहीं मिल सकी
सिविल अस्पताल की नई बिल्डिंग पर कई करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। भाजपा सरकार से पहले कांग्रेस की सरकार ने इसकी आधारशिला रखी थी। भाजपा ने तेजी से काम कराने का दावा किया था। नए अस्पताल की बिल्डिंग पूरी तरह से खड़ी होने के बाद अब छोटी-छोटी कमियां निकल रही हैं। पिछले करीब चार माह से बिल्डिंग उद्घाटन के इंतजार में है, लेकिन अस्पताल के नए भवन का उद्घाटन नहीं हो सका है। सिविल अस्पताल के डॉक्टर अपने-अपने कैबिन व ऑफिसों के सपने संजोकर थक चुके हैं।
समालखा को नहीं मिल पाया हथवाला-ढांडा यमुना पुल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने समालखा विधानसभा में हथवाला ढांडा यमुना पुल की आधारशिला रखी थी। करोड़ों रुपये का प्रोजेक्ट अब तक केवल कागजों में ही सिमटा हुआ है। सिंचाई विभाग व दूसरे विभागों ने इस प्रोजेक्ट को लेकर बहुत कुछ करने का दावा किया था। अधिकारियों का दावा था कि सरकार जल्द ही इसका निर्माण पूरा करा देगी। इसके बाद हरियाणा व यूपी के बीच व्यापार बढ़ेगा। लेकिन यमुना पुल निर्माण में आज भी ढाक के तीन पात हैं। समालखा विधायक रविंद्र मच्छरौली ने बताया कि हलके में विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। यमुना पुल की बात को भी मुख्यमंत्री के सामने उठाया जाएगा।
नहीं आई कोई नई इंडस्ट्री
औद्योगिक नगरी में नई इंडस्ट्री आने की उम्मीद थी। खासकर एचएसआईडीसी के रिफाइनरी रोड स्थित सेक्टर को प्लास्टिक पार्क के रूप में डेवलेप करने का विचार था। जिला प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर इसको लेकर प्रयास भी किए गए और दिल्ली में आईओसीएल अधिकारियों के साथ बैठक में पूरा प्रपोजल भी रखा गया, लेकिन यह मामला अब तक सिरे नहीं चढ़ पाया है। एचएसआईडी में अब तक केवल तीन इंडस्ट्री की डेवलप हो सकी हैं। इसरान हलके का गांव खुखराना आज तक शिफ्ट नहीं हो सका है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पिछले दिनों जनता दरबार में स्थानीय लोगों को दिवाली तक नए गांव की आधारशिला रखने का भरोसा दिया था। गांव की अब तक आधारशिला तक नहीं रखी जा सकी है। परिवहन, आवास एवं जेल मंत्री कृष्णलाल पंवार ने बताया कि हलका इसराना समेत जिले में विकास कार्य कराने का प्रयास किया जा रहा है। खुखराना गांव की आधारशिला जल्द ही रख दी जाएगी।
-भाजपा सरकार ने सत्ता में आने से पहले किया था विकास का दावा
-शुगर मिल में दो साल बाद आज भी एक ईंट नहीं लग सकी
-रैनीवेल प्रोजेक्ट भी सरकार नहीं चढ़ा सकी सिरे
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