फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

55 जमातियों को पुलिस को सौंपा

विज्ञापन
विज्ञापन
स्वास्थ्य विभाग ने आईटीआई में रह रहे 55 जमातियों को पुलिस को सौंप दिया है। ये जमाती तमिलनाडू, असम, मुंबई व दिल्ली के रहने वाले हैं। इन सबकी रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी है और क्वॉरंटीन पीरियड भी पूरा हो चुका है। फिलहाल प्रशासन ने आईटीआई में ही इनकी रहने की व्यवस्था की है। अब ये पुलिस पर निर्भर करता है कि ये उन्हें उनके घर भेजते हैं या लॉकडाउन पीरियड तक यहीं पर रखते हैं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के पास 70 लोग क्वॉरंटीन हैं। इनमें से 65 प्रेम इंस्टीट्यूट, समालखा व एनसी कॉलेज में हैं। जबकि 5 ईएसआई अस्पताल में क्वॉरंटीन हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की 10 टीमों ने शहर के बॉर्डर पर गेहूं काटने आए 450 लोगों की स्क्रीनिंग की है। 10 लोगों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। आइसोलेशन वार्ड में दाखिल करनाल निवासी प्रकाश की हालत स्थिर है। अब भी उसमें कोरोना के लक्षण नहीं मिलें हैं। 21 अप्रैल को उसके दोबारा सैंपल भेजे जाएंगे।
विज्ञापन

नियम पूरे करने पर चलेंगे उद्योग
कोरोना महामारी से निपटने के लिए तय गाइडलाइन पूरे करने पर शहर के औद्योगिक क्षेत्र में भी इंडस्ट्री चल सकती है। 20 अप्रैल से मिलने वाली छूट को लेकर उद्यमियों को उम्मीद है। इसको लेकर इंडस्ट्रीज के मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद विभिन्न औद्योगिक संगठनों के साथ वीडियो कॉंफ्रेंसिंग भी कर रहे हैं। शहरी औद्योगिक एरिया में इंडस्ट्री चलाने के लिए एक शर्त यह भी है कि या तो वर्कर को इंडस्ट्री में रखा जाए या साथ लगती बिल्डिंग में रहने की व्यवस्था हो। ताकि वर्करों को बाहर से आने की आवश्यक्ता ना पड़े। इसके अलावा एक शर्त ये भी है कि 20 अप्रैल से कोई इंडस्ट्री तभी चल पाएगी जब वह अपने वर्करों को मेडिकल बीमा दें। चाहे वह ईएसआई से हो या किसी निजी कंपनी से। बजाय इसके उद्योग नहीं चलेगा। जिसने पहले से ही बीमा कर रखा है उनको परेशानी नहीं आएगी।
9 रिपोर्ट और आई नेगेटिव-
वीरवार रात और शुक्रवार को कुल 9 रिपोर्ट नेगेटिव आई है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है। अब तक 292 रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी है। ये कुल रिपोर्ट का 98 प्रतिशत है।
विज्ञापन

अस्पताल में पीपीई किट का टोटा-
कोरोना से जंग में पीपीई किट के टोटे से डॉक्टरों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। डॉक्टरों व स्टाफ के सामने पीपीई किट को बचाने की भी चुनौती बनी हुई है। किट बनाने वाली कंपनियों ने पीपीई किट के दाम चार गुना तक बढ़ा दिए हैं। जो किट 500 रुपये की मिलती थी अब उसकी कीमत 2 हजार रुपये तक पहुंच गई है। अस्पताल में मात्र 1 हजार किट हैं, जबकि स्टॉक में 5 हजार किट होनी चाहिए। हालांकि आईएमए सिविल अस्पताल के डॉक्टरों की इस संबंध में मदद कर रहा है, लेकिन सरकार की ओर से कुछ खास मदद नहीं मिल रही है।
लोगों से अपील घरों से ना निकलें- डॉ. वर्मा
अधिकतर रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है। कंबाईन से जिले में आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। सभी सरपंचों को निर्देश दिए हैं कि वो कंबाइन पर आने वाले लोगों को गांव में ना आने दें। लोग लॉकडाउन का पालन करें और घरों में रहें। फिलहाल पानीपत में आइसोलेशन वार्ड में एक मरीज दाखिल है। उसकी हालत भी स्थिर है। चार मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं।
विज्ञापन

डॉ. संतलाल वर्मा, सिविल सर्जन पानीपत।
वर्जन
लॉकडाउन तक इन जमातियों को यहीं रखा जाएगा। इनके रहने और खाने की पूरी व्यवस्था कर दी गई है।
सतीश वत्स, डीएसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें