संदीप भौरिया
पानीपत। यहां राज्य सरकार की जननी सुरक्षा योजना का हाल खराब है। इसके तहत प्रति महिला दी जाने वाली छह हजार की राशि 2 साल से नहीं मिली है। जिनके बच्चे हुए वे अब स्कूल जाने को तैयार हैं, लेकिन करीब 35 हजार महिलाओं की 22 करोड़ सहायता राशि अटकी पड़ी है।
राज्य सरकार की जननी सुरक्षा योजना प्रसूता महिलाओं के लिए मात्र घोषणा बनकर रह गई। सरकार की ओर से योजना के तहत हर प्रसूता को 6000 रुपये सहायता राशि देने की घोषणा की गई थी। लेकिन 2 साल से लगभग 35 हजार महिलाओं के 17 करोड़ 50 लाख रुपये अब भी बकाया है। फिलहाल प्रसूताओं को केंद्र सरकार की ओर से 700 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है।
औसतन प्रतिदिन 50 डिलीवरी
13 लाख की आबादी वाले पानीपत में हर रोज सिविल अस्पताल समेत 13 स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 50 डिलीवरी होती है। इसमें सिविल अस्पताल में 30 डिलीवरी होती है। समालखा, अहर, बापौली सीएचसी व काबड़ी, कवी, मतलोडा, अहर, समालखा व सिवाह पीएचसी में हर रोज औसतन 20 डिलीवरी होती है। जबकि संसाधनों के अभाव में ददलाना, चुलकाना, खोतपुरा, उग्राखेड़ी, इसराना, नौल्था, मांडी, पट्टीकल्याणा, सींक, नारायणा व रेरकलां पीएचसी में स्टाफ व संसाधनों के अभाव में डिलीवरी नहीं हो रही है।
सिविल अस्पताल में बेड का अभाव
सिविल अस्पताल में हर रोज औसतन 30 महिलाओं की डिलीवरी होती है। प्रसूति वार्ड में मात्र 30 बेड ही उपलब्ध हैं। बेड के अभाव के कारण स्टाफ को कई बार एक बेड पर दो प्रसूता महिलाओं को लेटाना पड़ता है। इससे एक दूसरे से इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है। नई बिल्डिंग शुरू होने के बाद ही प्रसूताओं की ये परेशानी कम होगी।
सिविल अस्पताल व समालखा में ही गायनोकोलाजिस्ट उपलब्ध
जिले में डॉ. शशि लता, डॉ. मनी, डॉ. सुमन व डॉ. लिपिका व एक समालखा में ही गायनाकोलॉजिस्ट ही उपलब्ध हैं। चार की ड्यूटी सिविल अस्पताल में ही लगाई है। सभी सीएचसी व पीएचसी में एमबीबीएस डॉक्टर ही उपलब्ध हैं। प्रसव के दौरान महिला की तबीयत बिगड़ने पर महिलाओं को सिविल अस्पताल ही लाना पड़ता है। इस कारण महिला की जान को खतरा बना रहता है।
अल्ट्रासाउंड के लिए करना पड़ता है 2-3 दिन इंतजार
सिविल अस्पताल में हर रोज औसतन 150 गर्भवती महिलाएं जांच के लिए आती हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए सुबह 8 बजे ही अल्ट्रासाउंड के सामने लाइन लगनी शुरू हो जाती है। महिलाओं की संख्या अधिक होने के कारण एक दिन में 30-40 गर्भवती महिलाओं के ही अल्ट्रासाउंड हो पाए हैं। ऐसे में महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए 2 से 3 दिन तक इंतजार करना पड़ता है।
स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं
स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसूता व गर्भवती महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। जिले की 19 पीएचसी में से मात्र 8 पीएचसी में ही डिलीवरी सुविधा उपलब्ध है। 11 पीएचसी में केवल प्राथमिक उपचार ही संभव है। सिविल अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए 2-3 दिन तक इंतजार करना पड़ता है।
सभी टेस्ट और जांच होती है मुफ्त
सिविल अस्पताल के प्रसूता महिलाओं को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली 700 रुपये सहायता राशि दी जाती है। स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं की निशुल्क जांच होती है। अल्ट्रासाउंड, गर्भवती महिला के पति की एचआईवी जांच फ्री, टीकाकरण व मुफ्त एंबुलेंस सुविधाएं दी जाती हैं। हाई रिस्क डिलीवरी में सिजेरियन व ब्लड मुफ्त में उपलब्ध कराया जाता है। प्रसूता को 3 दिन तक खाना दिया जाता है। डिलीवरी के 42 दिन बाद तक प्रसूताओं को फ्री एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
इस योजना का अब तक कोई नोटिफिकेशन नहीं आया: डॉ. सुखबीर
जननी योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को जो सहायता राशि मिलनी है, उसका अब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। जैसे ही नोटिफिकेशन आता है, उसके बाद राशि दी जाएगी। तीन साल से ये राशि मिलनी पेंडिंग है।
- डॉ. सुखबीर सिंह, सिविल सर्जन पानीपत।
हाल-ए-जननी सुरक्षा योजना
फोटो संख्या 3
स्कूल जाने की उम्र में पहुंच गए बच्चे पर प्रसूताओं को नहीं मिली सहायता राशि
2 साल से 35 हजार महिलाओं के 21 करोड़ रुपये पेंडिंग
19 में से मात्र 8 पीएससी में डिलीवरी सुविधा उपलब्ध