बुखार के मरीजों को बता रहे डेंगू, लैब पर मरीजों का तांता
अमर उजाला ब्यूरो
समालखा। जिले में पीड़ितों को प्रापर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, डॉक्टरों की कमी का सामना कर रहे सरकारी अस्पतालों का फायदा निजी अस्पताल उठा रहे हैं। किसी को वायरल भी हुआ तो निजी क्लीनिक, झोलाछाप या प्राइवेट डॉक्टर उसे डेंगू का भय दिखाकर मनचाहे फीस वसूल रहे हैं। निजी चिकित्सक, लैब वालों से मिलीभगत करके कमीशन के फेर में मरीजों को दौड़ा रहे हैं और कमीशन वसूल रहे हैं। स्वास्थ्य प्रशासन के नाक के नीचे धंधा चल रहा है, मगर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि करीब एक महीने से शहर में वायरल, डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सरकारी अस्पताल, प्राइवेट अस्पताल व लैब पर मरीजों का तांता लगा रहता है। जिसमें अधिकतर खांसी, जुकाम और वायरल बुखार से पीड़ित होते हैं, लेकिन प्राइवेट चिकित्सक उन्हें डेंगू का भय दिखाकर टेस्ट कराते हैं और अपने यहीं ही उनका उपचार शुरू कर देते हैं। सोमवार को मीडिया ने शहर के करीब दर्जन भर झोलाछाप और प्राइवेट क्लीनिक पर जाकर जांच की तो लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का एक बड़ा धंधा चल रहा था।
प्लेटलेट्स कम हुई तो डेंगू
क्लीनिकों में डॉक्टर अपने यहां और प्राइवेट लैब में ही जांच कराकर प्लेटलेट्स की जांच कराते हैं और प्लेटलेट्स कम हुई तो वे उसे डेंगू बताने से पीछे नहीं हटते। लोग भय के कारण उनकी बात पर ही विश्वास कर लेते हैं, जबकि डेंगू की जानकारी के लिए एलाइजा टेस्ट जरूरी है।
एलाइजा की नहीं जानकारी एनएस-1 पॉजीटिव तो भी डेंगू
शहर में कहीं भी डेंगू की जांच की सुविधा नहीं है और कुछ प्राइवेट लैब संचालक अपने यहां एनएस-1 की जांच करते हैं और पॉजीटिव पाए जाने पर उसे ही डेंगू करा दे रहे हैं, जबकि डेंगू की पुष्टि केवल एलाइजा टेस्ट से होती है। ये सुविधा केवल पानीपत के सिविल अस्पताल में ही उपलब्ध है।
मरीजों को चढ़ाई जा रही आरएल, डीएनएस और मल्टी विटामिन
प्राइवेट क्लीनिक में चिकित्सक और झोलाछाप अपने यहां पहुंचने वाले बुखार से पीड़ित तकरीबन हर मरीज को रिंगर लैक्टेट (आरएल), डीएनएस चढ़ाने के साथ ही मल्टी विटामिन का इंजेक्शन लगा रहे हैं। कई तो एक मरीज को दिन में दो से तीन दफा ये दवा देते हुए उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। मेडिकल स्टोर पर आरएल का मूल्य 22 रुपये, डीएनएस का 18 रुपये और मल्टी विटामिन इंजेक्शन 20 रुपये का है। जबकि प्राइवेट डाक्टर इसके लिए सैकड़ों रुपये वसूल रहे हैं। इन बोतलों के ढेर इन क्लीनिक के बाहर देखे जा सकते हैं।
नहीं है मरीजों का रिकार्ड
प्राइवेट चिकित्सक व लैब संचालकों को केवल अपनी कमाई से मतलब है और उनके पास मरीजों के किसी तरह के कोई रिकॉर्ड नहीं है। एक प्राइवेट क्लीनिक पर मीडिया से बात करते हुए लैब संचालक ने बताया कि उनके पास मरीजों का रिकॉर्ड नहीं है। उसने भी माना कि वह केवल एनएस-1 की जांच करते हैं और मरीज को डॉक्टर के पास भेज देते हैं। इसके बाद डॉक्टर द्वारा किए जाने वाले इलाज की कोई जानकारी नहीं है और न ही इससे उनका कोई मतलब होता है।
सरकारी अस्पताल बना रहा डॉक्टर की कमी का बहाना
सीएचसी समालखा में भी प्रतिदिन तीन सौ से चार सौ ओपीडी आ रही हैं। शहर में भी आए दिन वायरल और डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। प्राइवेट चिकित्सकों व लैब संचालकों की लूट से भी स्वास्थ्य विभाग अनजान नहीं है। इसके बावजूद भी वह डॉक्टर की कमी की बात कहकर अस्पताल से बाहर क्षेत्र में दौरा नहीं करने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।