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16 साल की रजनी कर रही देश का नाम रोशन, पीएम ने भी मन की बात में की रजनी की सरहाना

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16 साल की रजनी कर रही देश का नाम रोशन, पीएम ने भी मन की बात में की रजनी की सरहाना
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पानीपत। पानीपत हरियाणा के गांव बुआना लाखू की रजनी कश्यप 16 साल की उम्र में देश का नाम रोशन कर रही है। रजनी ने दस वर्ष की आयु में खेलना शुरु किया था। उनके पिता जसमेर गांव में लस्सी बेचने का काम करते हैं व उनकी माता ऊषा खेत में मजदूरी करती है। हाल ही में सर्बिया में हुई नेशंस जूनियर चैंपियनशिप उन्होंने अपने नाम की थी व गोल्ड मेडल जीता था। उसके बाद 11 से 18 दिसंबर चंडीगढ़ में हुई दूसरी सब जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। रजनी अपने वजन वर्ग में पहले दिन से चैंपियन है। उन्होंने 32 किलोग्राम भार वर्ग में खेलना शुरू किया था और अब 46 किलोग्राम वर्ग में खेल रही हैं।
उनको पांच साल पहले गांव के बॉक्सिंग कोच सुरेंद्र कुमार से खेलने की प्रेरणा मिली थी। पांच साल पहले मेडल जीतने के बाद कोच सुरेंद्र का गांव में स्वागत होते देख रजनी ने मन में ठान ली थी कि वो भी मेडल जीत कर लाएगी व उनका भी गांव में स्वागत होगा। रजनी सुबह शाम प्रेक्टिस करती है और दिन में अपनी मां के साथ खेत में काम करती है। रवीवार को पीएम ने मन की बात कार्यक्रम में भी रजनी का जिक्रा करते हुए कहा कि रजनी ने मुक्केबाजी में मेडल जीतने पर अपना मेडल सबसे पहले कपड़े में लपेटकर पिता जी को समर्पित किया। रजनी के पिताजी जसमेर सिंह दूध और लस्सी का काम कर रहे हैं।
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रजनी ने बताया कि उनकी सफलता का श्रेय पिता जसमेर सिंह, मां उषा, कोच सुरेंद्र व खेलो इंड़िया में कोच अमन प्रीत कौर को जाता है।मेरे पिता ने गाँव से लस्सी इकट्ठा करके बेचने के लिए रोजाना पानीपत जाते हैं और मेरी माँ खेतों में काम के लिए जाती है, उन्होंने कहा कि मैं भी अपनी मां के साथ खेतों में काम करने के लिए नियमित रुप से जाती थी। जबसे उन्होंने खेलना शुरु किया है तब से ही मैरी कॉम उनकी रोल मॉडल रही है। वहीं प्रधानमंत्री द्वारा उनकी सरहाना पर उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है। 13 जनवरी से पुणे में आयोजित होने वाले खेलो इंडिया टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक हासिल करने का उनका अगला लक्ष्य हैं। अप्रैल से वह कोच खेलो इंडिया में चयनित होने के बाद से ही वह रोहतक के राजीव गांधी खेल परिसर में कोच अमन प्रीत कौर के पास कोचिंग ले रही है।
रजनी के पिता जसमेर सिंह ने कहा, यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारे नाम पर चर्चा की और यह केवल मेरी बेटी रजनी के कारण हुआ। मेरी पाँच बेटियाँ हैं और एक बेटा और रजनी तीसरे नंबर पर है। उन्होंने कहा कि परिवार के सभी सदस्यों के लिए आजीविका का प्रबंधन करना बहुत कठिन हैं, मैं अपनी बेटी के लिए मुक्केबाजी उपकरणों का प्रबंधन करने में समर्थ नहीं था, लेकिन मुक्केबाजी के प्रति उनकी दीवानगी ने हमारी मानसिकता को बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। उनकी बेटी
बॉक्सिंग कोच सुरेंद्र मलिक ने कहा वह आमतौर पर पांच साल पहले सरकारी स्कूल के मैदान में अभ्यास कर रहे बच्चों को देखने आया था। जहां रजनी भी खेल रही थी, उन्होंने कुछ बच्चों के दौड़ने का ट्रायल लिया जहां रजनी ने प्रथम स्थान हासिल किया। वह उसी समय समझ गये थे कि रजनी जन्म से ही खिलाड़ी है। तब उन्होंने रजनी को कोचिंग देने का निर्णय लिया।
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उसने वर्तमान वर्ष में पांच राष्ट्रीय और एक अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट जीते है। दिसंबर माह में चंडीगढ़ में आयोजित दूसरे सब जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक और सर्बिया में इस वर्ष अगस्त में सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज के खिताब के साथ आयोजित द्वितीय राष्ट्र जूनियर विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा स्कूल नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड, खेलो इंडिया में गोल्ड, सीबीएसई में गोल्ड मेडल जीता है।
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