ग्रामीण इलाकों में जाने वाली 35 बसों में से केवल 25 बसें पांच बजे ही डिपो में हो रही खड़ी, 40 गांव प्रभावित
पानीपत। रोडवेज विभाग ने गत दिनों ही ग्रामीण इलाकों में बस का ठहराव बंद करने के आदेश जारी किये थे, जिसके बाद गांव के सभी रूटों पर रात्रि ठहराव बंद कर दिया था। जिसके बाद विभाग ने डिपो में दस रूटों पर रात्रि ठहराव फिर से शुरू कर दिया था, जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि सभी रूटों पर जल्द ही रात्रि ठहराव शुरु हो जाएगा, लेकिन पांच बजे तक ही सभी बसें डिपो में खड़ी हो रही है। जिस कारण जिले के 40 गांव में यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर से गांव तक जाने वाले यात्रियों को चार या साढ़े चार बजे के बाद बस नहीं मिल रही है। वहीं सुबह जल्दी आने वाले ग्रामिणों को भी बस नहीं मिल रही है। जिस कारण गांव के लोगों को सुबह और शाम प्राइवेट वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हड़ताल के बाद विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा दो फैसले लिए है, जिनके बाद यात्रियों को परेशानी हुई है। अहर कुराना, गोला,चिड़ाना, खानपुर, रेर कलां, बल्ला, खोजकीपुर, भलौर गढ़ी, सींक, गवालड़ा, काकोदा गांव की बस सेवा लागु कर दी गई है। वहीं इसके अलावा जाटल, बादड़, पट्टीक्लयाणा सहित दर्जनों गांवों में अब भी नाइट बंद है।
विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बाद शुरु की गई थी दस रूटों पर बस :
विद्यार्थियों के प्रदर्शन को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में रात्रि ठहराव फिर से शुरु हो गया था। जिसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि सभी गांवों में फिर से रात्रि ठहराव शुरू हो जाएगा। जिनमें सुबह शाम सैकड़ों यात्री यात्रा करते थे। बस बंद होने के कारण गांव के यात्रियों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा था। विद्यार्थियों को बस का पास होते हुए भी किराया देकर सफर करना पड़ रहा है। जिस कारण विद्यार्थियों ने इनसो के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन भी किया था। जिसका नतीजा भी निकला व दस बसें शुरु कर दी गई है।
रात्रि ठहराव बंद होने से घट रहे प्रतिदिन के किलोमीटर :
गांव में बसों का रात्रि ठहराव बंद होने के बाद रोजाना के किलोमीटर घट गये हैं। इसका कारण यह है कि गांव की बसों का एक चक्कर भी घटा दिया गया है। डिपो में रोजाना 43 से 46 हजार किलोमीटर प्रतिदिन बसें चल रही थी, लेकिन अब यह आंकड़ा 33 से 36 किलोमीटर तक का रह गया हैै।
सुबह शाम खाली चल रही बस :डिपो की बस सुबह शाम खाली ही चल रही है, क्योंकि सुबह के समय गांव तक जब बसें जाती है तब गांव के यात्रियों की संख्या लगभग ना के बराबर होती है। इसी कारण सुबह का चक्कर खाली ही चलता है। इसी प्रकार शाम के समय भी गांव से ?यात्रि नहीं आते व गांव से खाली बसें ही चलकर डिपो में आकर खड़ी हो रही है, जिस कारण डिपो में रोजाना लाखों का नुकसान झेलना पड़ रहा है। वहीं दौबारा बस सेवा चालु करने का कारण राजस्व में हो रहा घाटा भी हो सकता है।
निजी वाहनों में करना पड़ता है सफर : विकास
पट्टीकल्याणा निवासी विकास ने कहा कि वह सप्ताह में तीन दिन अंबाला से अपडाउन करता है, लेकिन दिल्ली की बस में समालखा तक लटक कर जाना पड़ता है और वहां से निजी वाहन में ही सफर करना पड़ता है।
निजी वाहन भी नहीं मिलते : अमन
जलमाणा गांव के अमन ने कहा उनके गांव में ना बस जाती ना निजी वाहन। वह आईटीआई में पढ़ता है, छुट्टी शाम पांच बजे होती है। उसके बाद नाइट स्टे बंद होने के कारण गांव के रास्तों पर बसें नहीं चलती। जिस कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
रोहतक के लिए नहीं मिल रही दो घंटे से बस : सुनील
रोहतक निवासी सुनील ने कहा कि उन्हें दो घंटे से रोहतक के लिए बस नहीं मिली है। ऑवरटाइम खत्म होने के बाद हर जगह रूट घट गए है। जिस कारण उनको दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।