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2 लाख 90 हजार में से 1 लाख 16 हजार लोगों के बिजली बिलों में आ रही गड़बड़ी, बिजली निगम व निजी कंपनी आमने-सामने

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फोटो 13 से 15
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2.90 में से 1.16 लाख लोगों के बिजली बिलों में गड़बड़ी
-निगम बोला-प्रशिक्षित नहीं निजी कंपनी के कर्मचारी, रीडिंग में गड़बड़ी, कंपनी बोली-एमसीओ नहीं चढ़ाने से दिक्कत
भूपेंद्र आट्टा
पानीपत। बिजली निगम में रोजाना कोई न कोई शिकायत गलत बिल आने की आती रहती है। गत दिनों हुए बिजली निगम के खुले दरबार में भी 50 प्रतिशत समस्याएं गलत बिलों से संबंधित थीं। रोजाना ऐसे मामले सामने आते रहते हैं जिनमें किसी का बिल आमतौर पर 500 से 1000 तक आता था, वहीं बिल अब लाखों रुपये का आ रहा है। इसको ठीक करवाने के लिए उपभोक्ता को बिजली निगम के धक्के खाने पड़ते हैं। गलत बिल आने के पीछे निगम ने जो डाटा तैयार किया है, उसमें वह रीडिंग लेने वाली निजी कंपनी बीसीआईटीएस को जिम्मेदार ठहराते कहते हैं। क्रॉस चेकिंग के दौरान एवरेज 40 प्रतिशत बिजली के बिल गलत पाए गए हैं। पानीपत सर्कल में दो लाख 90 हजार बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से एक लाख 16 हजार लोगों के बिजली बिल गलत मिले हैं।

इन डिवीजन में इतने प्रतिशत बिल गलत
सनौली सब डिविजन के एसडीओ रामेंद्र मलिक ने बताया कि उसके एरिया में 29 हजार कनेक्शन है। इनमें जुलाई में 53 प्रतिशत और अगस्त में 47 प्रतिशत रीडिंग गलत पाई गई थी। मॉडल टाउन सब डिविजन में जुलाई में 55 प्रतिशत, अगस्त में 45 प्रतिशत रीडिंग गलत पाई गई है। किला क्षेत्र में तो जुलाई माह में 75 प्रतिशत रीडिंग गलत मिली थी और अगस्त में वह 53 प्रतिशत रीडिंग गलत मिली है। इसी प्रकार अन्य क्षेत्रों में भी अनुमानित 40 प्रतिशत रीडिंग गलत मिली है।
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गलत बिल भेजने का जिम्मेदार कौन
इन गलतियों के लिए बिजली निगम रीडिंग लेने वाली और बिल वितरित करने वाली निजी कंपनी बीसीआईटीएस को जिम्मेदार बता रही है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस कंपनी के कर्मचारी ठीक से कार्य नहीं कर रहे। इस कारण लोग गलत बिलों की समस्या से परेशान हो रहे हैं। निजी कंपनी के पास प्रशिक्षु कर्मचारी काम कर रहे हैं। वहीं कंपनी के अधिकारी इसके लिए निगम को जिम्मेदार बता रहे हैं।

ऐसे आ रहा है गलत बिल : पंकज
बीसीआईटीएस कंपनी के अधिकारी पंकज से बात की गई तो उसने कहा कि निगम अपनी गलतियां छुपाने के लिए निजी कंपनी पर आरोप लगा रहा है। निगम द्वारा मीटर चेंज करने के बाद अपने रिकॉर्ड में मीटर चेंजिंग ऑर्डर (एमसीओ) नहीं चढ़ाई जाती। इस कारण बिजली के बिल गलत आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी का मीटर 5000 रीडिंग के बाद बदला जाता है व उसकी एमसीओ रिकॉर्ड में नहीं चढ़ाई जाती तो नए मीटर की 200 रीडिंग 95 हजार 199 रीडिंग के बराबर कैलकुलेट की जाएंगी। अगर एमसीओ रजिस्टर में नहीं चढ़ाया जाता तो बिल बनाते समय पिछला डाटा ज्यों का त्यों रखके उससे आगे की सभी यूनिटें कैलकुलेट कर ली जाती है। जैसे किसी का मीटर 5000 यूनिट पर रुका था तो एमसीओ ना चढ़े होने के कारण नए मीटर की रीडिंग 5000 से आगे कैलकुलेट की जाएंगी। इसमें मीटर संख्या का 1 राउंड(99999) पूरा मानकर नए मीटर की नई रीडिंग उसमें जोड़ दी जाती हैं। जो सभी कैलकुलेट की जाती हैं। इस वजह से लोगों के बिल लाखों रुपये के आते हैं। उन्होंने बताया कि किला क्षेत्र में 5 से 6 हजार मीटर ऐसे हैं जिनकी एमसीओ पेंडिंग रहती है जब तक वह पूरी नहीं होगी बिल इसी तरह गलत आते रहेंगे। अन्य क्षेत्रों में बिल गलत आने का कारण बिजली निगम द्वारा एमसीओ रिकॉर्ड में ना चढ़ाना ही है।

अधिकतम 20 प्रतिशत पेमेंट काट सकता है निगम
बिजली निगम व निजी कंपनी के बीच मीटर रीडिंग लेने वाले बिल वितरित करने के लिए करार हुआ है। इसमें गलत रीडिंग आने पर निगम कंपनी की 20 प्रतिशत पेमेंट काट सकता है। कंपनी को एक मीटर चेक करने पर निगम की ओर से सात रुपये मिलते हैं। बिल वितरित करने के प्रति बिल डेढ़ रुपया मिलता है। यानी 2 माह के 24 लाख 64 हजार रुपये निगम को देने होते हैं। इसमें से 20 प्रतिशत काटने पर यह राशि 19 लाख के लगभग रह जाती है।

क्या कहते हैं उपभोक्ता
गलत बिलों के बारे में बंसी कॉलोनी निवासी मीना, सोमबीर निवासी वधावाराम कॉलोनी, संजीव निवासी राज नगर ने बताया कि बिजली निगम रीडिंग लेने वाले की गलती ठहराते हैं, रीडिंग लेने वाले बिजली निगम की गलती बताते हैं। इनके बीच में आम आदमी धक्के खाने पर मजबूर है। उनका का बिल 1500 रुपए तक आता था, जो अब 12 लाख रुपये आया हुआ है। इसे ठीक करवाने के लिए वह बिजली निगम के चक्कर काट रही है। वहीं विकास नगर निवासी ईश्वर ने बताया कि उस का बिल हर माह 1200 रुपए तक आता था, लेकिन अब 27 हजार बिल देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। बिशन सरूप कॉलोनी निवासी युधिष्ठिर ने कहा कि उसका बिल हर माह 1200 से 1500 के बीच आता था। अब 15 लाख रुपये का बिल उनके घर भेज दिया गया है। 2 दिन पहले ही प्रधानमंत्री कौशल केंद्र में 6 पाइंट का 4 करोड़ का बिल भेज दिया गया था। जिस को ठीक करवाने के लिए केंद्र के अधिकारी बिजली निगम गए थे।

निजी कंपनी के कर्मचारी नहीं लेकर आ रहे ठीक से रीडिंग : मलिक
सनौली सब डिवीजन के एसडीओ रामेंद्र मलिक का कहना है कि उन्होंने क्रॉस चेक में पाया के 50% के लगभग रीडिंग गलत ली गई है जिसके पीछे निजी कंपनी जिम्मेदार है।
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निजी कंपनियों के कर्मचारी ठीक से कार्य नहीं कर रहे हैं। उन्हें हिदायत दी गई है कि मीटर को ब्लूटूथ से कनेक्ट करके मोबाइल फोन में रीडिंग डाउनलोड करके लेकर आए। अगर वह ऐसा करेंगे तो एक भी बिल गलत नहीं होगा। उन्होंने बताया कि सीईओ को बोल दिया गया है अगर कोई कर्मचारी मैनुअली रीडिंग लेकर आता है तो उसे मान्य नहीं किया जाएगा। फिलहाल कंपनी के साथ हुए करार के अनुसार कंपनी से अधिकतम 20% पेमेंट काटी जा रही है।
- रणबीर देशवाल, एसडीओ मॉडल टाउन
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