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जब भाला टूटने पर फूट फूटकर रोए थे नीरज...

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जब भाला टूटने पर फूट फूटकर रोए थे नीरज...
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पानीपत। नीरज चोपड़ा ने 9 साल पहले पानीपत के शिवाजी स्टेडियम से जैवलिन थ्रो करनी शुरू की थी। दोस्त जयबीर से प्रेरित होकर नीरज ने भाला फेंकना शुरू किया था। चाचा भीम बताते हैं कि उसने नीरज को 8 हजार रुपये का जैवलिन खरीदकर दिया था। एक दिन नीरज ने जैवलिन थ्रो किया और भाला पत्थर पर जा लगा। आगे से भाले की नोंक टूट गई। जब वो शाम को नीरज को घर के लिए लेने के लिए स्टेडियम में गए तो नीरज एकांत में बैठकर रो रहा था। उसने नीरज से बहुत पूछा लेकिन उसने रोने का कारण नहीं बताया। फिर उसके दोस्त ने बताया कि भाले की नोंक टूट गई है इसलिए वो रो रहा है। इस पर वो हंसने लगा था। फिर उसने नीरज से पूछा कि नया भाला कितने का आएगा। नीरज ने जब भाले की कीमत 50 हजार रुपये बताई तो वो भी चिंतित हो गए थे। लेकिन उन्होंने इस बारे में अपने परिवार में बात की और नीरज के लिए वह 50 हजार रुपये का भाला खरीदकर दिया।
13 साल की उम्र में था 80 किलो वजन
13 साल की उम्र में नीरज का वजन 80 किलो से ज्यादा का वजन था और उसके लिए 30 मीटर के रनवे पर तेज स्पीड से भागकर भाला फेंकने में सबसे बड़ी बाधा थी। दोस्त की हौसलाअफजाई, परिजनों का सपोर्ट और खेल के प्रति जुनून से नीरज के कदम बढ़ते गए। वजन घटाने के लिए नीरज गांव से स्टेडियम तक दौड़ते आते, प्रैक्टिस करते और वापस घर तक दौड़ते हुए जाते। इस तरह उन्होंने दो माह तकरीबन 20 किलो वजन घटा लिया।
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16 लोगों की ज्वाइंट फैमिली में रहते हैं नीरज
चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में बीए सेकंड ईयर के छात्र नीरज आजकल वहीं ट्रेनिंग ले रहे हैं। नीरज के पिता चार भाई हैं और 16 लोगों की ज्वाइंट फैमिली है। नीरज की फैमिली पूरी तरह से खेती पर ही डिपेंड है। चार भाइयों और 5 बहनों में सबसे बड़े नीरज ने ज्वाइंट फैमिली की जिम्मेदारियों के बीच यह मुकाम हासिल किया है। पूरी फैमिली में 8 एकड़ भूमि है। पिता सतीश मध्य प्रदेश में खेती करते हैं।
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