पानीपत। जिले में एचआईवी एड्स का खतरा लगातार बढ़ रहा है। 2023-2024 के आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। पिछले एक साल में हर माह एचआईवी ने 37 नए केस मिले हैं। इनमें पुरुषों की संख्या महिलाओं की संख्या की तुलना में लगभग ढाई गुना अधिक है। इन संक्रमितों में 90 प्रतिशत संख्या 18-30 साल के बीच के युवाओं की है।
स्वास्थ्य विभाग ने इन संक्रमितों की काउंसलिंग की तो इसमें पता चला है कि युवा सेक्स वर्कर व ट्रांसजेंडर के साथ शारीरिक संबंध बनाने से एचआईवी का शिकार हो रहे हैं। 2021 से पहले तक अधिकतर युवक नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली संक्रमित सूई से एचआईवी पॉजीटिव हो रहे थे। पिछले एक साल में एचआईवी के नए 372 संक्रमित मिले हैं। यह 2022 के मुकाबले 11 प्रतिशत व 2021 के मुकाबले लगभग 35 फीसदी अधिक है।
वहीं 2022 में जिले में एचआईवी से 359 व 2021 में 219 संक्रमित मिले थे। पानीपत में फिलहाल 2126 एचआईवी पॉजिटिव केस स्वास्थ्य विभाग के पास उपचाराधीन हैं, जिसमें 781 महिलाएं और 1277 पुरुष शामिल हैं। 16 ट्रांसजेंडर भी एचआईवी पॉजिटिव हैं। इसके अलावा 52 बच्चे एचआईवी पॉजिटिव हैं। 40 पॉजिटिव मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
लोगों में अब भी एचआईवी के खिलाफ जागरूकता की कमी है। लोग नियमित एचएआईवी जांच कराने से कतराते हैं, इसलिए बहुत ऐसे केस भी होते हैं जब एचआईवी से व्यक्ति या महिला की मौत हो जाती है लेकिन कारण स्पष्ट नहीं हो पाते। लोगों के मन में एड्स का नाम सुनते ही असुरक्षित यौन संबंध की बात दिमाग में आती है जबकि संक्रमित ब्लेड या संक्रमित सूई भी एचआईवी का बड़ा कारण है।
संक्रमित सूई के इस्तेमाल से युवा एचआईवी के साथ साथ हेपेटाइटिस का भी शिकार हो रहे हैं। जो एचआईवी संक्रमित मिल रहे हैं उनमें 10 प्रतिशत युवा हेपेटाइटिस का भी शिकार मिल रहे हैं। 2023-2024 में एड्स संक्रमित 16 महिलाओं ने बच्चे को जन्म दिया है। इनके बच्चे भी एचआईवी संक्रमित मिले हैं। इन सबका जिला नागरिक अस्पताल में इलाज चल रहा है।
2023-2024 में मिले एड्स रोगी
- पुरुष 251
- महिलाए- 105
- ट्रांसजेंडर- 01
- बच्चे - 07
- बच्चियां - 09
लोग जागरूक नहीं : डॉ. वर्मा
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. ललित वर्मा ने बताया कि पिछले साल एड्स संक्रमितों की संख्या काफी बढ़ी है। काउंसलिंग में सामने आया है कि असुरक्षित यौन संबंध बनाने से युवा एचआईवी संक्रमित हो रहे हैं। इसके अलावा नशे के लिए संक्रमित सूई का इस्तेमाल भी एचआईवी का बड़ा कारण है। लोग अब भी एड्स के खिलाफ जागरूक नहीं है। वह समय-समय पर एचआईवी जांच कराने से बचते हैं। एड्स के खिलाफ जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।