माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। पढ़ने वाले बच्चों के सुरक्षित सफर के लिए सरकार ने 10 साल पहले सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी बनाई तो जरूर थी, लेकिन इस पॉलिसी को न तो स्कूल संचालकों और न ही ठेके पर चलने वाले वाहन संचालकों ने माना। नतीजन इसके दुष्परिणाम सामने आए। जिसका खामियाजा मासूमों को भुगतना पड़ रहा है।
कनीना स्कूल बस हादसे के बाद यमुनानगर में ऑटो पलटने के हादसे के बाद जिला प्रशासन ने तो इस पर कार्रवाई की सुध ली लेकिन, सरकार ने फिर भी शैक्षणिक संस्थानों को 10 दिन की मोहलत देकर उनसे अपने वाहनों के दस्तावेज और फिटनेस समेत पॉलिसी के नियमों का लागू करवाने की ढील दे दी है। हालांकि अगर इस पॉलिसी के निर्धारित 20 मानकों को पूरी तरह से लागू कर दिया जाए तो स्कूल बच्चों को सफर सुगम हो सकता है।
निर्धाारित मानकों के अनुसार स्कूली वाहनों पर पीला पेंट होना चाहिए, बीच में नीले रंग की पट्टी होनी चाहिए। सामने सफेद, पीछे लाल और बाकी जगह पीली रिफ्लेक्टिव टेप होनी चाहिए। ट्रांसपोर्ट कमिशनर हरियाणा से मंजूर डीलर या मैन्यूफैक्चरर से स्पीड गवर्नर और जीपीएस लगा होना चाहिए। बस के आगे पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए, अगर किराए की बस है तो इस पर ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। स्कू
ल बस की फिटनेस सही हो, धुआं ज्यादा न देती हो, ड्राइवर, कंडक्टर या सहायक अच्छी तरीके से कुशल होने चाहिए। सभी वाहनों के पास कैरियर का परमिट और परमिशन होनी चाहिए। स्कूल बस ड्राइवर के पास हैवी लाइसेंस हो, उसे पांच वर्ष का अनुभव भी होना चाहिए। ड्राइवर के रेड लाइट जंप करने, ओवरटेकिंग जैसे तीन से ज्यादा चालान नहीं होने चाहिए। स्कूल बस में लगाया सहायक बच्चों को लाने ले जाने में जिम्मेदार और कुशल होना चाहिए।
शहर में कहीं भी स्कूल वाहन की गति 50 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सभी शैक्षणिक संस्थानों के अंदर पार्किंग और चहारदीवारी होनी चाहिए। इसी क्षेत्र में वाहन स्कूली बच्चों को उतारे या चढ़ाएगा। सभी वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र होने चाहिए। वाहन पर स्कूल का नाम, रूट और समय सारणी लिखी होनी चाहिए।
इस पर स्कूल, वाहन मालिक समेत पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर अंकित होना चाहिए। वाहन चालकों व सहायकों को तीन साल में एक बार ट्रांसपोर्ट विभाग की ओर से आयोजित रिफ्रेश कोर्स में भाग लेना चाहिए। तीन साल में एक बार वाहन चालक को सिविल सर्जन से अपना मेडिकल फिटनेस करवाना अनिवार्य है।
ड्राइवर व सहायक पूरी यूनिफार्म में हों, उनके नाम की प्लेट वर्दी पर हो, जिसमें उनका लाइसेंस नंबर तक लिखा होना चाहिए। कोई भी शैक्षणिक वाहन अपनी सीटिंग क्षमता की डेढ़ गुणा से ज्यादा सवारियां या बच्चों को नहीं ले जा सकता। स्कूल वाहन के शीशे किसी भी प्रकार की फिल्म या पर्दाें से ढके हुए नहीं होने चाहिए।
सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी लागू करवाने को लेकर लगातार चेकिंग की जा रही है। स्कूल संचालकों, ड्राइवरों व सहायकों को लगातार जागरूक किया जाता रहा है। अब नियमों का पालन न करने वालों के चालान भी किए जा रहे हैं। ऐसे 12 स्कूल के चालान कर 1.20 लाख का जुर्माना लगाया गया है। - राजेश मलिक, एमवीआई, आरटीए।