62 साल पुरानी मिल के कारण जिले के 2475 किसान परिवारों को हो रहा नुकसान, मिल में मंद गति से चल रही पिराई
पानीपत। 1956-57 में शुरू हुई शुगर मिल अपग्रेड न होने के कारण जिले के 2475 गन्ना किसान परिवारों को प्रति एकड़ पचास हजार का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर शुगर मिल को भी इसके कारण करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पंजाब हरियाणा के अलग होने से पहले तीन शुगर मिल लगाई गई थी, जिनमें से एक पानीपत क्षेत्र में थी, दूसरी रोहतक में व एक वर्तमान पंजाब के क्षेत्र में हैं। तीन मिलों में से दो मिल नई बन चुकी हैैं, लेकिन यह मिल हरियाणा का एक ऐंटिक पीस बन चुकी है। इसके बाद की लगी हुई मिल भी अपग्रेड करके नई टेक्नॉलोजी से बनाई जा चुकी है। इतनी पुरानी मिल होने के कारण मिल की रोजाना पिराई क्षमता 18 हजार से घटकर 14 हजार रह गई है। जिसमें भी बीच-बीच में मशीनें खराब होने के कारण कई दिन तक मिल बंद रहती है। पूरे सीजन की पिराई क्षमता 12 हजार क्विंटल प्रतिदिन रह गई है। जिस कारण किसानों का कहना है कि उनको मुढ्डे ईंख में प्रति एकड़ पचास हजार प्रति एकड़ तक का नुकसान हो रहा है। जिले में 2475 किसानों ने अठारह हजार एकड़ में अनुमानित 54 लाख क्विंटल गन्ना उत्पादन किया हुुआ है। जिसमें केवल तीस लाख क्विंटल का ही मिल द्वारा बॉन्ड बनाया गया है। बाकि 24 लाख क्विंटल के लिए किसानों को दूसरे जिलों में गन्ना डालना पड़ेगा। जिस कारण भी किसानों को हजारों का नुकसान होगा। ये सब समस्याएं नई मिल न मिलने के कारण उठानी पड़ रही है। सरकार ने तीन साल पहले डाहर गांव में नई शुगर मिल बनाने की घोषणा की थी, जिसके लिए सरकार ने बजट भी देने की बात कही थी, लेकिन उस जमीन पर सरकार ने भाषण देने के लिए स्टेज बनाकर छोड़ दिया है। शुगर मिल के लिए कोई भी कार्य शुरू नहीं किया गया है।
एक पहलु ये भी है कि शुगर मिल की पिराई क्षमता कुछ ज्यादा कम नहीं हुई हैं, न ही पैदावार अधिक बढ़ी, फिर भी पिछले कुछ वर्षों से नई मिल की आवश्यकता बढ़ी है, जिसका कारण है जिले में कोल्हूओं की संख्या निरंतर घटते जाना। 1990 में जिले में 142 कोल्हू थे, जो रोजाना 100 क्विंटल गन्ने की पिराई कर देते थे, जिस कारण मिल जिले के आधे गन्ने की पिराई कोल्हूओं में होती थी व आधे की शुगर मिल में। जिले में रोजाना 14 हजार क्विंटल के लगभग गन्ना कोल्हूओं में जाता था, लेकिन वर्तमान समय में केवल 12 कोल्हू ही रह गए हैं।