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शहर की नई सरकार ने चंडीगढ़ में सीएम से मुलाकात, लोकेश नांगरू सीनियर डिप्टी मेयर व विजय जैन डिप्टी मेयर की दौड़ में सबसे आगे

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शहर की नई सरकार ने चंडीगढ़ में सीएम से मुलाकात, लोकेश नांगरू सीनियर डिप्टी मेयर व विजय जैन डिप्टी मेयर की दौड़ में सबसे आगे
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पानीपत। नगर निगम चुनाव में जीत दर्ज करते ही अगले दिन सूर्य उदय होते ही शहर की सरकार सीएम मनोहर लाल से मिलने के लिए चंडीगढ़ रवाना हो गई। सभी अपनी अपनी गाड़ियों में स्काई लार्क से रवाना हुए। चंडीगढ़ में विधायक महिपाल ढांडा, रोहिता रेवड़ी, मेयर अवनीत कौर और सभी पार्षदों ने सीएम से मुलाकात की। सीएम ने सभी को जीत पर बधाई दी। सभी को ईमानदारी से काम करने व लोगों की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि विकास कार्यों के लिए ग्रांट की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। सभी मिलजुलकर अपने जिले के लिए कार्य करेंगे। सभी ने सीएम को विश्वास दिलाया कि जो उन्होंने उन पर विश्वास जताया था वो इस पर पूरी तरह से खरे उतरेंगे।
भाजपा के दिग्गज नेता और संघ के बड़े नेता रमेश नांगरू के पुत्र लोकेश नांगरू सीनियर डिप्टी मेयर की दौड़ में अब तक सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं। उनको ही शहर का अगला सीनियर डिप्टी मेयर माना जा रहा है। उन्होंने शहर की सबसे हॉट सीट वार्ड 20 से बुल्लेशाह के नजदीकी आशीष मलिक को रिकॉर्ड 4879 वोटों से हरा दिया। ये जिले में सबसे अधिक वोटों से अंतर की जीत थी। लोकेश नांगरू भाजपा के जिला उपाध्यक्ष भी हैं और उन्होंने सदैव मुख्य धारा में रहकर कार्य किया है। उन्हें इसका ईनाम भी मिल सकता है। बताया जा रहा है कि सभी पार्षद भी उन्हें सीनियर डिप्टी मेयर बनाने पर सहमत है।
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वहीं दूसरी ओर वार्ड 26 से जीत दर्ज करने वाले विजय जैन को डिप्टी मेयर का पद मिल सकता है। विजय जैन सभी विधायकों व बड़े नेताओं के नजदीकी हैं। भाजपा उन्हें डिप्टी मेयर पद देकर बनिया समाज को खुश कर सकती है। इनके अलावा दिग्गज नेता दुष्यंत भट्ट भी इस लाइन में हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि वो सीनियर डिप्टी मेयर या डिप्टी मेयर पद से खुश नहीं होंगे। क्योंकि वो पहले से ही मेयर के लिए लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। उनकी टिकट काटकर ही अवनीत कौर को दी गई थी।
लोकेश नांगरू और दुष्यंत भट्ट ने साढ़े 22 करोड़ का घपला रोककर बचाई थी भाजपा की साख:
नवंबर माह में कुछ जनप्रतिनिधियों ने नगर निगम अधिकारियों से सांठगांठ कर पार्कों की मरम्मत के लिए साढ़े 22 करोड़ का एस्टीमेट तैयार कर दिया था। जिन पार्कों की मरम्मत 5 लाख में हो सकती थी उनके लिए भी एक एक करोड़ का एस्टीमेट बनाया गया था। इस एस्टीमेट से शुरू से ही लोकेश नांगरू व दुष्यंत भट्ट काफी नाराज थे। दोनों ने नगर निगम अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। दोनों का आरोप था कि बड़ा घोटाला करने के लिए जरूरत से अधिक का एस्टीमेट बनाया था। इसकी शिकायत उन्होंने सीएम मनोहर लाल को की थी। सीएम ने मनोहर ने इसकी जांच के लिए तकनीकी सलाहकार विशाल सेठ को नियुक्त किया गया था। जांच के बाद मामले में गड़बड़ी गई थी। सीएम ने इन एस्टीमेट को रद्द कर दिया था। सीएम ने निगम आयुक्त प्रदीप डागर का तबादला कर दिया था। सीएम ने इस काम पर लोकेश नांगरू व दुष्यंत भट्ट की प्रशंसा की थी। ऐसा करके उन्होंने पार्टी की साख को बचाया था। उन्हें इसका फायदा मिल सकता है।
विजय जैन इसलिए बन सकती हैं डिप्टी मेयर:
विजय जैन से पहले वार्ड 26 से सुलेख जैन को टिकट दिया जा रहा था। कई बार इस बारे में पंचायत भी हुई। आखिर में टिकट विजय जैन को मिली। विजय जैन की छवि साफ है और सभी विधायकों व बड़े नेताओं के करीबी माने जाते हैं। डिप्टी मेयर का पद देकर भाजपा शहर के 35 हजार बनिया को खुश कर सकती है। इसका फायदा उन्हें विधानसभा चुनाव में मिल सकता है।
शहर में नगर निगम चुनाव की जीत से रोहिता रेवड़ी का बड़ा कद:
नगर निगम चुनाव में जीत दर्ज कराने का बड़ा जिम्मा रोहिता रेवड़ी को दिया गया था। उन्हें पति सुरेंद्र रेवड़ी शहर की राजनीति करते हैं और वो हैदराबादी समाज से संबंध रखते हैं। हैदराबादी समाज की 40 हजार वोट हैं। सुरेंद्र रेवड़ी व रोहिता रेवड़ी ने चुनाव में ग्राउंड पर जाकर कार्य किया। लोगों को संगठित किया और कार्यकर्ताओं को टिकट भी ना मिलने के बाद टूटने नहीं दिया। चुनाव में भाजपा को जीत मिली। इस जीत के बाद सीएम ने उन्हें फोन करके बधाई दी है। इस जीत से उनका कद भी बड़ा है। इस चुनाव को विधानसभा का सेमीफाइनल माना जा रहा था। राजनीतिज्ञों के अनुसार रोहिता रेवड़ी ने 2019 चुनाव के लिए अपनी टिकट भी पक्की कर ली है।
बुल्लेशाह को हुआ बड़ा नुकसान:
कभी शहर की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले बुल्लेशाह को इस नगर निगम चुनाव से काफी नुकसान हुआ है। शहर में कांग्रेस का मतलब सीधा बुल्लेशाह से हैं। 2014 में उनके भाई बलबीर पाल शाह ने चुनाव नहीं लड़ा तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने उन्हें टिकट दी थी। उनको चुनाव में मात मिली, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को टूटने दिया। हताश कार्यकर्ताओं को दोबारा जोड़ना शुरू किया। कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए उनके पास ये सुनहरा मौका था। लेकिन इस चुनाव में भी उनको हार मिली। इससे उनका कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट गया है। कांग्रेस भी अब उनका विकल्प ढूंढने का प्रयास करेगी।
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इन पार्षदों को टिकट मिलने का हुआ था विरोध:
वार्ड 10 से जीत रविंद्र भाटिया को टिकट दिए जाने का काफी विरोध किया गया था। रोहिता रेवड़ी इस वार्ड से तरूण छौक्करा के लिए टिकट चाहती थी। लेकिन नीतिसैन भाटिया के स्पोर्ट के कारण उनको टिकट मिला। वार्ड 26 में विजय जैन का भी काफी विरोध किया गया था। उनको सबसे लेट टिकट मिला। इसी वार्ड से हरीश शर्मा अपने लिए टिकट मांग रहे थे। कई बार पंचायत हुई थी। अंत में उनको टिकट मिला।
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