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रोडवेज का निजीकरण बर्दाश्त नहीं : संघर्ष समिति
हरियाणा रोडवेज में 500 निजी बसों को विभाग में शामिल करने का कर रहे हैं विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत।
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में डिपो के कार्यरत कर्मचारियों ने एकत्रित होकर सभा का आयोजन किया। जिसकी अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष विरेंदर सिंह धनखड़ ने की। सभा का संचालन संघर्ष समिति के नेता राम आसरे यादव ने किया। विरेंद्र सिंह धनखड ने राज्य सरकार पर आरोप लगते हुए कहा कि सरकार रोडवेज की तालाबंदी करना चाहती है। गत दिन पहले हरियाणा रोडवेज में 500 निजी बस को विभाग में शामिल किया गया है। राज्य सरकार निजी बस को शामिल कर हरियाणा रोडवेज विभाग का निजीकरण करना चाहते है। उनकी संघर्ष समिति रोडवेज के निजीकरण का विरोध कर रहे है और विरोध करते रहेंगे। उन्होंने कहा उनकी संघर्ष समिति रोडवेज विभाग का निजीकरण कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
कुछ समय पहले महानिदेशक ने 2017 में ऑउटसोर्सिंग के तहत लगे 450 चालकों को निर्णय लिया था। जो निर्णय लिया है, वह कर्मचारी विरोधी हैं। वहीं बताया इस समय पूरे प्रदेश में जनसंख्या को मद्देनजर रखते हुए 14 हजार बस की आवश्यकता है और इन बस के रोडवेज बेडे़ में शामिल होने की वजह से 84 हजार बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा मांग है कि कच्चे कर्मचारियों को नियुक्त तिथि से पक्का किया जाए, कर्मशाला स्टाफ की भर्ती की जाए, सभी रिक्त पडे़ पदों पर पदोन्नति करना, राज्य में चल रहे अवैध वाहनों पर रोक लगनी चाहिए, एसीपी का लाभ सभी को मिलना चाहिए और चालकों और परिचालकों पर गलत तरीके से की जा रही रिकवरी पर रोक लगनी चाहिए।
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने रोडवेज विभाग को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया और अगर उनकी मांगों का समय निवारण किया गया तो वे मजबूरन 3 जून को परिवहन मंत्री के मडलौडा स्थित कार्यालय का घेराव करेगे। इस मौके पर डिपो प्रधान सुल्तान सिंह मलिक, सतीश पंवार, रणधीर शर्मा, धर्मबीर हुड्डा, शमशेर सिंह व दीपक बल्हारा मौजूद रहे।