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72 घंटे में भुगतान का दावा फेल, किसानों का लगभग 120 करोड़ रूपए अटका

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फोटो संख्या- 29 से 31
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72 घंटे का दावा, नौ दिन बाद धान का नहीं हुआ भुगतान
पानीपत व बाबरपुर मंडी में हो चुकी है 158180 क्विंटल खरीद, लगभग 120 करोड़ रुपये अटका
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। किसानों को धान खरीद के 72 घंटे में भुगतान किए जाने के दावे किए जा रहे थे लेकिन नौ दिन बाद भी भुगतान न होने से सरकार के दावों की पोल खुल गई। धान की खरीद एक अक्तूबर को शुरू की गई थी। लेकिन पहले दिन खरीदी गई धान का भी भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। इससे किसानों व आढ़तियों में रोष बना हुआ है।
बता दें कि धान खरीद के पहले दिन अर्थात एक अक्तूबर से आठ अक्तूबर की शाम तक पानीपत व बाबरपुर अनाज मंडी में एक लाख 58 हजार 180 क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है, जिसमें पीआर किस्म की धान की खरीद 35 हजार क्विंटल हो चुकी है जबकि 1509 किस्म की खरीद एक लाख 23 हजार क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है। वहीं समालखा, मडलौडा, इसराना और बापौली अनाज मंडियों में भी छह लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीद हो चुकी है। वहीं जिले की छह प्रमुख मंडियों में लगभग 10 लाख क्विंटल की आवक हो चुकी है। एक अक्तूबर को शुरू हुई खरीद के नौ बाद भी खरीदी गई धान का भुगतान नहीं किया जा सका है।
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सूत्र बताते हैं कि जिले की विभिन्न मंडियों में किसानों का लगभग 120 करोड़ रुपये अटका हुआ है। अकेले पानीपत व बाबरपुर मंडी का ही लगभग 30 करोड़ रुपये अटका हुआ है। इससे किसानों व आढ़तियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि नौ दिन से धान की खरीद की जा रही है लेकिन भुगतान को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।
धान की पेमेंट न होने से आढ़तियों व किसानों में रोष
धान खरीद के नौ दिन बाद भी धान की पेमेंट न होने से किसान व आढ़तियों में रोष बना हुआ है। आढ़तियों राजवीर सिंह, ईश्वर सिंह, हरजेंद्र आदि ने बताया कि धान खरीद का अभी तक भुगतान नहीं हुआ है जिससे किसान उनके पास आकर अपना दुखड़ा सुनाते हैं। वहीं किसानों बलवान, रणबीर, नरेश आदि ने बताया कि किसान लगभग छह माह तक किसी प्रकार अपने खर्चों को वहन करते हैं। धान बेचने के बाद ही उन्हें अपने खर्चों व कर्ज को उतारने का मौका होता है लेकिन समय पर भुगतान न होने की वजह से उन्हें लिए गए कर्ज का ब्याज भुगतना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं किसान?
गांव बुड़शाम वासी किसान बलवान ने बताया कि धान की पकी फसल में बारिश होने से पैदावार में गिरावट आई है। प्रति एकड़ होने वाला खर्च भी पूरा नहीं हो रहा। वहीं समय पर भुगतान न होने से दैनिक खर्चों का निवर्हन करने में परेशानी हो रही है।
गांव सुताना वासी किसान रणबीर ने बताया कि पहले तो उन्हें बारिश की मार झेलनी पड़ी जिससे फसल में आधा नुक्सान हुआ है। वहीं धान को गत वर्ष के मुकाबले कम रेट पर खरीदा गया है जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। समय पर भुगतान न होने से उनकी परेशानी बढ़ी हुई हैं।
गांव बिंझोल वासी किसान नरेश व रणबीर ने बताया कि एक तो कुदरत की मार के कारण धान के उत्पादन में गिरावट आई है, दूसरे मंडियों में लगने वाली झार में काफी धान रह जाता है। जबकि दूसरी मंडियों में झार नहीं लगती। उन्हें प्रति एकड़ करीब 30 हजार रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। भुगतान भी समय पर नहीं हो रहा।

किसानों को हो रही दिक्कत
किसान नौ दिन से मंडी में धान को बेच रहा है। बीच में कई बार धान की खरीद न होने से किसानों को दिक्कतें आई, वहीं धान में नमी के नाम पर भी किसानों को धान बेचने में कठिनाइयों से जूझना पड़ा। सबसे बड़ी दिक्कत धान की फसल का भुगतान न होने को लेकर है। हालांकि अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही पेमेंट जारी कर दी जाएगी।
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-धर्मवीर मलिक, प्रधान, अनाज मंडी एसोसिएशन।

धान का भुगतान नियमित रूप से शुरू
ट्रेजरी में कुछ दिक्कत के कारण पेमेंट का भुगतान नहीं किया जा सका था। धान की फसल का नियमित रूप से भुगतान किए जाने की व्यवस्था कर दी गई है। एक दो दिन में नियमित रूप से भुगतान शुरू कर दिया जाएगा।
-अनीता खर्ब, जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग अधिकारी।
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