नवरात्र आज से, सजे बाजार, खरीदारी करने पहुंचे भक्त
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। शारदीय नवरात्र आज से शुरू होंगे। श्राद्ध समाप्त होने के साथ प्रथम नवरात्र के लिए बाजार सज कर तैयार हो चुके हैं। माता के भक्तजन खरीदारी के लिए बाजारों में पहुंच रहे हैं और कलश व उसके साथ स्थापना में उपयोग होने वाली वस्तुओं की खरीदारी करने में लगे हुए है। उधर देवी मंदिर समेत शहर के कई मंदिर सजकर तैयार हो गए हैं।
पंडित निरंजन पराशर ने बताया कि प्रथम नवरात्र के दिन कलश की स्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को की जाती है। चूंकि प्रतिपदा के रहते हुए ही जो कार्य किया जाएं, वह शुभ माना जाता है। इस बार प्रतिपदा प्रात 10:34 मिनट तक रहेगी। जिस कारण से प्रात 10:34 मिनट से पूर्व ही कलश की स्थापना करना ही शुभ होगा। वहीं सबसे अधिक शुभ समय कलश स्थापना के लिए प्रात 6:00 से 7:30 तक रहेगा।
नवरात्र में कलश पूजा
मां भगवती की पूजा-अर्चना करते समय सबसे पहले कलश की पूजा की जाती है। कलश को मंत्रोच्चारण से साथ पवित्र नदियों का जल भरकर वेदी पर स्थापित किया जाता है। कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखें। कलख के मुख को ढक्कन से ढक देना चाहिए। ढक्कन पर चावल भरकर रखें। कलश के पास मिट्टी के बर्तन में गेहूं, जौ या धान बोए जाते है। नारियल को चुनरी में लपेटकर रक्षा सूत्र से बांधे और इस नारियल को कलश के ढक्कन पर रखते हुए सभी देवताओं का आह्वान करना चाहिए। कलश पर फूल और मिठाइयां चढ़ाना चाहिए। इससे बाद कलश के निकट दुर्गा प्रतिमा के साथ ही नौ दिन तक अखंड दीप जलता है।
प्रथम नवरात्र के दिन होगी शैलपुत्री की पूजा
नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होती है। शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया है। मां शैलपुत्री दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प लिए हुए है। इनका वाहन वृषभ है। नवदुर्गाओं में मां शैलपुत्री का महत्व और शक्तियां अनंत है। कर्ज, व्याधियों, शनि प्रकोप से बचने के लिए शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
हस्त नक्षत्र में घट स्थापना का महत्व
पंडित निरंजन पराशर ने बताया कि इस बार नवरात्र हस्त नक्षत्र में शुरू हो रहा है। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र अगर हस्त नक्षत्र में आए तो उसका विशेष महत्व होता है। इस तरह से यह नवरात्र विशेष शुभकारी है। सुबह 10 बजे से पहले पूरे-पूरे विधि-विधान से की गई पूजा-अर्चना के साथ घट की स्थापना लाभकारी होगी। इससे परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ेगी और साथ ही बीमारियां और कष्ट दूर होंगे।
पूजा में अवश्य ले सफेद और लाल रंग के पुष्प
नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री को सफेद और लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। गाय के दूध से बने पकवान व मिष्ठान का भोग लगाने से मां प्रसन्न होती है। भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करती है। साथ ही भक्त के घर की दरिद्रता को दूर करके उसके घर के सभी सदस्यों को रोग मुक्त करती है। इनको प्रसन्न करने के लिए एक कन्या को कंघा, हेयर ब्रश, हेयर क्रीम या बैंड उपहार में दें। पिपरमिंट युक्त मीठे पान मसालेक का पान, अनार या गुड़ से बने पकवान इस देवी को अर्पण किया जा सकता है। इसके बाद ही सपरिवार आरती करें।
खाली न चढ़ाएं लाल चुनरी
मां दुर्गा को खाली चुनरी कभी ना चढ़ाएं। चुनरी के साथ सिंदूर, नारियल, पंचमेवा, मिष्ठान, फल, सुहाग का सामान चढ़ाने से मां खुश होती हैं और आशीर्वाद देती है। मां दुर्गा की चूड़ी, बिछिया, सिंदूर, महावर, बिंदी, काजल चढ़ाना चाहिए। लाल रंग मां दुर्गा का सबसे खास रंग माना जाता है। इसलिए पूजा शुरू करने से पहले आसन के तौर पर कोई भी वस्त्र बिछाने से अच्छा है कि लाल रंग के कपड़े का इस्तेमाल किया जाए। इसके अलावा मां को लाल चुनरी और कुमकुम का टीका लगाना शुभ है। इसके अलावा ये चीजें भी जरूरी है।