किलोमीटर स्कीम पर चलाई गई निजी बसें करवा रही राजस्व में घाटा, 30 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से हायर की गई है बसें
- हड़ताल के पांचवें दिन हड़ताल के समर्थन में आये 21 सब इंस्पेेक्टर व वर्कशॅाप कर्मचारी
- 35 सरकारी व 21 स्कूली बसों पर निर्भर रहे यात्री
फोटो संख्या : 21 से 24
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। हड़ताल के दौरान प्रशासन द्वारा लोगों को सुविधा देने और बढ़ते नुकसान को रोकने के लिए स्कूली व निजी बसों को किलोमीटर स्कीम पर चलाया जा रहा है। ये बसें 30 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से प्राइवेट स्कूलों व निजी स्कूलों के मालिकों से ली गई हैं। जिनपर एसपीओ ड्राइवर भी प्राइवेट है। ये बसें हड़ताल के दौरान यात्रियों को सुविधा देने में तो समर्थ हो सकती है, लेकिन राजस्व में बढ़ते घाटे को रोकने में ये विफल साबित हुई है। इन बसों के आने से राजस्व में नुकसान और अधिक बढ़ा है। वहीं एक ओर जैसे-जैसे हड़ताल लंबी खींच रही है, वैसे ही हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों के समर्थन में काम कर रहे कर्मचारी बढ़ते जा रहे हैं। शनिवार को डिपो के 21 सब इंस्पेक्टरों सहित कार्यशाला के कर्मचारी हड़ताल को समर्थन देते हुए काम छोड़ कर चले गये। जिस कारण रोजाना का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। स्कूलों की बसों पर परिचालक के रुप में एसपीओ को तैनात किया गया है। सुबह से शाम तक ज्यादातर बसें हरिद्वार, शामली, देहरादून, दिल्ली बोर्डर तक चलाई गई हैं।
ऐसे हो रहा है निजी बसों से नुकसान :
हड़ताल के दौरान जब से निजी बसों को बेड़े में शामिल किया है, विभाग को और अधिक घाटा हुआ है। डिपो को अब तक लगभग 32 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। इस बात को रोडवेज विभाग द्वारा लिये गये आंकड़े ही सिद्ध कर रहे हैं। विभाग में हड़ताल के दौरान तीन सरकारी व तीन प्राइवेट बसों का कैश जमा करवाया गया। इनमें तीन सरकारी बसें 232 किलोमीटर चलकर 10 हजार 880 रुपये राजस्व में जमा कराने का काम करती है, वहीं तीन निजी बसों के आंकड़े देखें तो 484 किलोमीटर चलकर केवल 9130 रुपये ही विभाग में जमा करवा सकी है। वहीं विभाग इन बसों के मालिकों को तय रेट पर पैसे देगा, जोकि रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से हायर की गई है। इस हिसाब से विभाग द्वारा बस मालिकों को 484 किलोमीटर के 14 हजार 520 रुपये देने पड़ेंगे। इसमें परिचालकों का वेतन अलग रह गया। वहीं इसमें दूसरी तरफ देखे तो सरकार ने सभी बसें एक रेट पर ली हैं, चाहे उसमें 44 सीट हो या फिर 52, जबकि सरकारी बसों में फिक्स 52 सीटें होती हैं। वहीं इसमें कर्मचारियों द्वारा ये भी सवाल उठाया जा रहा है कि जब वर्तमान में बसों को 30 रुपये किलोमीटर के हिसाब से चलाया जा रहा है, तो आगे 36 से 40 रुपये किलोमीटर क्यों? जब सरकारी बसों की एवरेज कमाई 26 रुपये किलोमीटर है तो वो बसें इससे ज्यादा कमाई कैसे दे सकती है? वहीं किलोमीटर स्कीम पर सवाल उठाते हुए महासंघ यूनियन के प्रधान धर्मपाल ने कहा कि अगर निजी बसें 36 रुपये किलोमीटर के हिसाब से चलेंगी तो वह प्रशासन व खुद को कैसे फायदा करवा सकती है? त्यौहार के समय पर भी जब ये निजी बसें पैसे नहीं कमा पा रही तो आम तौर पर कैसे पैसे कमा सकती है।
21 सब इंस्पेक्टर हुए हड़ताल में शामिल :
पांचवें दिन हड़ताल में 21 सब इंसपेक्टर भी शामिल हो गये। जिसके बाद डिपो में आधे से ज्यादा द तर खाली पड़े रहे। एसआई महाबीर चंदौली, साधुराम, जगबीर, सतपाल, महाबीर, विजय सहित 21 इंस्पेक्टरों ने हड़ताल को अपना समर्थन दिया। इसके अलावा हड़ताल पर बैठे परिचालकों की सं या 138 से बढ़कर 156 पर पहुंच गयी जो ड्राइवरों समेत कुल 286 हो गये। इनके साथ-साथ वर्कशाप के कर्मचारियों ने भी हड़ताल को अपना समर्थन देकर काम छोड़ दिया।
35 सरकारी व 21 निजी बसों पर निर्भर रहीं सवारियां :
सरकार व यूनियनों के बीच बातचीत ना होने का दुख यात्रियों को झेलना पड़ रहा है। पानीपत डिपों से सरकार जहां रोजाना 130 के लगभग बसें चलाती थी वहीं हड़ताल में केवल 50 से 60 के बीच ही बसें चल रही है। जिस कारण यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग निजी वाहनों में धक्के खाने को व बस की छतों पर सफर करने के लिए मजबूर है। निजी बसें भी यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठा रही है। दिल्ली बोर्डर तक जाने का नाम लेकर निजी बस परिचालक यात्रियों को बस में बैठा लेते हैं और दिल्ली बोर्डर पर छोड़ देते हैं। जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हरिद्वार, देहरादून, दिल्ली, शामली व लोकल रुटों पर किया बसों का संचालन : जीएम
डिपो जीएम एसपी प्रमार ने कहा कि उन्होंने यात्रियों को सुुविधा के लिए हरिद्वार, देहरादून, जींद, दिल्ली सहित अन्य लोकल रूटों पर बस चलाई है। हड़ताल के दौरान ज्यादा से ज्यादा बसों को चलाने का प्रयास किया जा रहा है।