करनाल स्थित गांव पाढ़ा के एक युवक ने मामा भांजा पर अमेरिका भेजने के नाम पर 18 लाख ठगने के आरोप में सेक्टर 13-17 थाना में मुकदमा दर्ज कराया है। पीड़ित ने बताया कि उसे जंगलों के रास्ते से मैक्सिको भेजा गया था, जहां पहुंचते ही मैक्सिको की पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। वहीं, गिरफ्तार होते ही आरोपियों का एजेंट उसे छोड़कर मौके से फरार हो गया था। पीड़ित को 76 दिन हिरासत में रहने के बाद छोड़ा गया। पीड़ित मैक्सिको में इंडियन एंबेसी पहुंचा और वहां से ही परिजनों से संपर्क किया और टिकट कराकर भारत लौटा। पीड़ित ने आरोपियों से पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस को दी शिकायत में पंकज रमन निवासी पाढ़ा, जिला करनाल ने बताया कि उसकी गांव के ही एक युवक नीरज पुत्र राजाराम के माध्यम से 25 मार्च 2019 को पानीपत के अंसल में रहने वाले दुलीचंद उर्फ दीपक नरवाल पुत्र लख्मी के साथ मुलाकात हुई थी। पीड़ित ने बताया कि उसे आरोपी दूलीचंद ने कहा कि उसका लड़का विदेश में सरकारी नौकरी पर कार्यरत है। वह पीड़ित को भी विदेश में नौकरी लगवा सकता है। पीड़ित से आरोपियों ने विदेश भेजने के नाम पर 18 लाख रुपये की मांग की। वहीं परिजनों ने अपनी जमीन बेचकर 18 लाख रुपये तैयार किए। पीड़ित ने नीरज व दीपक नरवाल को पहले 10 लाख रुपये दिए। वहीं, बाकि पैसे मैक्सिको पहुंचने के बाद देने की बात कही। पीड़ित को 31 मई 2019 को मैक्सिको भेजने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट बुलाया और वहीं पर पीड़ित के हाथ में फर्जी दस्तावेज पकड़ा कर विदेश भेज दिया। पीड़ित 3 जून 2019 को मैक्सिको पहुंच गया, जहां पर उसे 1 एजेंट मिला जो उसे जंगल के रास्ते मैक्सिको लेकर पहुंचा। वहीं 19 अगस्त को पीड़ित को मैक्सिको इमिग्रेशन ने पकड़ लिया, जहां पुलिस को देखते ही एजेंट मौके पर ही पीड़ित को छोड़कर फरार हो गया। पीड़ित 76 दिन पुलिस कस्टडी में रहा और रिहाई होने के बाद भारतीय एंबेसी के तहत परिजनों से संपर्क कर भारत लौटा। परिजनों ने आरोपियों से पैसे वापस मांगे तो पहले उन्होंने आश्वासन दिया, लेकिन बाद में साफ तौर से पैसे देने से मना कर दिया। वहीं पुलिस में शिकायत देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित ने निडर होकर पुलिस को शिकायत दी और आरोपियों से पैसे वापस दिलाने की मांग की।
पुलिस से छुड़वाने के नाम पर परिजनों से लिए बचे हुए आठ लाख
पीड़ित के परिजनों ने बताया कि आरोपी नीरज व दीपक ने विदेश भेजने से पहले उनसे 10 लाख रुपये ले लिए थे व बाकि आठ लाख पहुंचने के बाद देने की बात हुई थी। वहीं जब उन्हें पता चला कि पुलिस ने उनके बेटे को हिरासत में लिया है, तो वह आरोपियों के पास पहुंचे। आरोपियों ने बचे हुए आठ लाख की कीमत चुकाने की मांग की। परिजनों ने आरोपियों को आठ लाख भी दिए, लेकिन आरोपियों ने उनके बेटे को नहीं छुड़वाया।
कस्टडी से छूटने के बाद इंडियन एंबेसी के ऑफिस पहुंचा पीड़ित, एमरजेंसी सर्टिफिकेट पर लौटा भारत
पीड़ित ने बताया कि मैक्सिको के कानून के अनुसार प्रार्थी को 76 दिन के बाद रिहा कर दिया था। उसके बाद वह मैक्सिको सिटी में इंडियन एंबेसी के ऑफिस में गया और वहां पर एंबेसी ने उसे को एक एमरजेंसी सर्टिफिकेट (सफेद वीजा) वापसी के लिए दिया। उसके बाद पीड़ित ने परिजनों से फोन से संपर्क किया और वापसी की टिकट कराकर भारत लौटा।