पानीपत। 1857 की क्रांति का देश के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन में आजादी के दीवाने जंग में कूद पड़े थे। स्वतंत्रता आंदोलन से हरियाणा भी अछूता नहीं रहा और आंदोलन की आग मेरठ से अंबाला, पानीपत, गुरुग्राम, रेवाड़ी, मेवात, सोनीपत समेत हरियाणा के अधिकतर क्षेत्रों में फैल गई। हरियाणा के प्रख्यात इतिहासकार एवं प्रोफेसर केसी यादव के अनुसार 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन में हरियाणा भर में 3467 लोगों की मौत अंग्रेजों से जुल्म से मौत हुई थी। 115 गांव जला दिए गए थे। अंग्रेजों ने कुछ को पकड़ कर फांसी पर लटका दिया तो कुछ को गोली से उड़ा दिया। इस पर भी बस नहीं चला तो कई गांवों को जलाकर राख कर दिया गया। अकेले पानीपत में भी 179 लोगों की जान गई थी। वहीं, 22 गांवों को फूंक दिया गया था।
क्रांतिकारी सिपाही मंगल पांडेय के नेतृत्व में 10 मई 1857 को प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत की गई थी। स्वतंत्रता संग्राम का सबसे ज्यादा असर दक्षिणी हरियाणा में पड़ा, जहां गुर्जरों ने अंग्रेजों का पुरजोर विरोध किया। 13 मई को जब गुड़गांव और अन्य जिलों में भी यह आग भड़की तो हरियाणा से बहुत से वीर इसमें शामिल हो लिए। इनमें कई वीरों ने अपनी जान गंवाई। हरियाणा उस समय पंजाब प्रांत का हिस्सा था। इतिहासकार बताते हैं कि इतिहास उठाकर देखिए, हर जर्रा खून से भीगा दिखाई देगा। आजादी की जंग जीतने में जहां देश के जवानों ने कोई कसर नहीं छोड़ी, वहीं अंग्रेजों ने भी क्रूरता की हदें पार कर दी थी। स्वतंत्रता आंदोलन की आग में पूरा हरियाणा जल उठा था।
उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी हरियाणा के गुर्जर और जाट युवा भी स्वतंत्रता संग्राम में कूद गए। गुरुग्राम में 50 लोगों को अंग्रेजों ने या तो गोली मार दी या फांसी पर लटका दिया। गुरुग्राम जिले में 479 देशभक्तों की जान गई। मेवात में 1019 लोगों की जानें गईं। इस दौरान अंग्रेजों ने यहां के नौ गांवों को पूरी तरह जला दिया था, जिसमें 328 लोगों की पहचान हुई थी। रेवाड़ी में 128 लोगों की जान गई, लेकिन 75 की ही पहचान हुई। वहीं, फरीदाबाद में 180 लोग मारे गए, जिनमें से 167 की पहचान हुई। इसके अलावा, प्रदेश के ही 21 गांवों को अंग्रेजों ने जला कर खाक कर दिया। इसमें महेंद्रगढ़ में 485 लोगों की जानें गईं, जिनमें से 29 की ही पहचान हो सकी।
आंदोलन की अगुवाई करने वाले झज्जर रियासत के नबाब अब्दुल रहमान को अंग्रेजों ने फांसी पर लटका दिया। साथ ही वहां लोगों पर कई अत्याचार किए। झज्जर में 88 मरे थे, जबकि दो गांव जला दिए गए। रोहतक में 100 लोग मारे गए थे, यहां भी दो गांव जला दिए गए थे। अंग्रेजों की जुल्म का सिलसिला थमा नहीं। पानीपत में 179 लोगों की जान गई थी। 22 गांवों को फूंक दिया गया था। करनाल में 31, कुरुक्षेत्र में 42, अंबाला में 200 लोगों की मौत हुई थी। सोनीपत में 87 लोगों की जान गई। कई गांव तबाह कर दिए गए। भिवानी में 30 लोग इस गदर में मारे गए थे। एक गांव अंग्रेजों ने जला दिया था। हिसार में 232 लोगों की मौत हुई थी। चार गांव जला दिए गए थे। सिरसा में 203 लोगों की मौत हुई थी। आठ गांव जला दिए गए थे।