इस वर्ष एशियन चैंपियनशिप व वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाएंगे नीरज व मंजीत
भूपेंद्र आट्टा
पानीपत। साल 2018 में एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों ने इस वर्ष की प्रतियोगिताओं के लिए भी कमर कस ली है। वर्ष 2019 की तैयारियों की जानकारी के लिए अमर उजाला ने स्टार खिलाड़ी नीरज चौपड़ा व मंजीत चहल से बातचीत की। वार्तालाप में दोनों खिलाड़ियों ने अपना इस वर्ष का टारगेट अमर उजाला को बताया। दोनों खिलाड़ियों का ओलंपिक पर फोकस तो है ही, लेकिन इसके साथ-साथ इस वर्ष होने वाली एशियन चैंपियनशिप व वर्ल्ड चैंपियनशिप पर भी दोनों खिलाड़ियों का फॉक्स रहेगा।
नीरज का फॉक्स डायमंड कप पर भी रहेगा।
साक्षात्कार मंजीत चहल
सवाल :- 2019 में आपका क्या लक्ष्य रहेगा ?
जवाब : इस वर्ष दो मुख्य प्रतियोगिता होनी है, एक तो एशियन चैंपियनशिप व दूसरी वर्ल्ड चैंपियनशिप। इन दोनों प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करना ही उनका लक्ष्य है। वह इसके लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं। जबकि हर खिलाड़ी की तरह ओलंपिक को टारगेट करके ही वो तैयारियां कर रहे हैं।
सवाल : आप कितने घंटे प्रेक्टिस कर रहे हैं?
जवाब : मैं रोजाना साढ़े तीन घंटे सुबह व साढ़े तीन घंटे शाम को प्रेक्टिस कर रहा हुं। जोकि दिन में सात घंटे की प्रैक्टिस बनती है। कोच अमरीश कुमार मुझे हर समय ज्यादा से ज्यादा प्रेक्टिस करने के लिए उत्साहित करते रहते हैं।
सवाल : आपने 2010 में कॉवमनवेल्थ में भाग लिया था, जहां आप 9वें स्थान पर रहे थे, लेकिन आपने पिछले वर्ष गोल्ड मेडल जीतकर सभी को हैरान कर दिया। आपके अंदर इतना हौसला कहां से आया?
जवाब : इस सफलता के पीछे मेरे पिता रणधीर सिंह की भूमिका अहम है। मेरे पिता जवानी में कबड्डी और हैमर थ्रो के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने मुझे हर समय खेल का अभ्यास कराते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। मुुुझे याद है कि जब मैं कॉमनवेल्थ के बाद थोड़ा हताश हो गया था, लेकिन लक्ष्य नहीं छोड़ा और कड़ी मेहनत के बाद एशियन गेम्स में 36 साल बाद देश के लिए गोल्ड जीता।
सवाल : आपने खेलना कब शुरू किया था व कॉमनवेल्थ में कैसे पहुंचे ?
जवाब : मैं 12वीं कक्षा तक जींद में ही पढ़ा हूं। शुरू से ही खेलने का शौक था। बीए की पढ़ाई करने के लिए जालंधर चले गये थे। वहां पर वर्ष 2009 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में पहला स्थान हासिल किया था। जहां से मेरे लिए आगे के रास्ते खुले। इसके बाद 2010 में पटियाला में हुई सीनियर इंटर स्टेट में तीसरा स्थान हासिल किया। जहां से मेरा चयन दिल्ली में होने वाले कॉमनवेल्थ के लिए हुआ । बस वहीं से इंटरनेशनल खेलने का मौका मिला। मैं पहला मौका बुना नहीं सका, लेकिन कभी हौसला भी नहीं हारा, उसके बाद मैंने एशियन एथलेटिक चैंपियनशिप में चौथा स्थान हासिल किया। जहां एक मिनट 49 सेकेंड में 800 मीटर पूरे किए थे। मैंने एक मीनट 46 सेकेंढ लाने के लिए दिन रात मेहनत की और एशियन में गोल्ड हासिल किया।
सवाल : आप कितने दिनों में घर पर बात करते हो ?
जवाब : घर पर रोजाना बात हो जाती है। वह फिल्हाल बैंगलुरु में है नेशनल कैंप में ही प्रैक्टिस कर रहे हैं।
साक्षात्कार नीरज चोपड़ा
सवाल :- 2019 में आपका क्या लक्ष्य रहेगा ?
जवाब : इस वर्ष तीन अहम प्रतियोगिताएं होनी है। पहली एशियन चैंपियनशिप, दूसरी वर्ल्ड चैंपियनशिप व डायमंड कप जहां उनका लक्ष्य देश के लिए गोल्ड हासिल करना ही है।
सवाल : आप का 2018 में एक लक्ष्य था कि 90 मीटर कल्ब में शामिल होना है, लेकिन आप केवल दो मीटर से रह गए थे, इसके लिए आप अब क्या प्रयास कर रहे हो।
जवाब : वह इसके लिए इस साल भी प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वह चाहेंगे की इस वर्ष भी 2018 की तरह थ्रो का औसत अच्छा बना रहे। ऐसा नहीं होना चाहिए की एक थ्रो बहुत दूर व एक बहुत कम रह जाए। लगातार औसत प्रफोरमेंस अच्छी रहेगी तो उनका ओलंपिक का सपना भी पूरा होगा व धीरे धीरे ही 90 के मीटर में भी शामिल हो जाएंगे।
सवाल : अपने लक्ष्य को पाने के लिए आप कितने घंटे मेहनत कर रहे हैं?
जवाब : वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए रोजाना आठ से दस घंटे प्रेक्टिस कर रहे हैं। कोच उवे हॉन उनके लिए हमेशा प्रेरणा बने रहते हैं। उनके कोच एकमात्र खिलाड़ी है जिन्होंने 100 मीटर तक थ्रो किया है।
सवाल : आप पिछली साल ऐशियन में गोल्ड लेकर आए, नया रिकॉर्ड बनाया, लेकिन लगातार अच्छी प्रफोरमेंस देते हुए आप कॉंटिनेंटल कप कैसे चुक गए और आपने वहां से क्या सीख ली ?
जवाब : कांटिनेंटल कप में दो थ्रो उनके 80 मीटर से ऊपर रहे थे, लेकिन तीसरा थ्रो आउट ऑफ कोर्ट चला गया था, जो 85 मीटर तक जाना था। वहां से भी उन्हें सिख मिली, कांटिनेंटल कप वर्ल्ड लेवल की टूर्नामेंट है। वैसे वो बात पुरानी हो गई अब आगे के लिए फॉक्स है। अब अपनी तकनीक की जो कमियां हैं उन पर धीरे धीरे सुधार कर रहे हैं।
सवाल : आपकी व्हाट्सएप पर भी प्रोफाइल में फोकस लिखा हुआ है, आपके हिसाब से कामयाब होने के लिए सबसे जरूरी क्या है?
जवाब : कामयाबी के लिए सबसे जरूरी अपने टारगेट पर फॉक्स करना ही है, एक खिलाड़ी को कामयाब होने के लिए बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है। घर से निकलकर ही खिलाड़ी देश का नाम रोशन करता है। टारगेट पर फोकस करके ही टारगेट को हासिल कर सकते हैं।