अब तक कंफर्म हुए 150 डेंगू के मरीज, सेहत महकमा फॉगिंग के लिए भी राजी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। जिले में डेंगू का प्रकोप है, अब तक 150 मरीज कंफर्म हो चुके हैं, लेकिन सेहत महकमा फॉगिंग के लिए भी राजी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि, फॉगिंग से डेंगू का मच्छर नहीं मरता है और टीम लारवा की जांच में जुटी है।
सिविल अस्पताल के साथ प्राइवेट अस्पतालों में डेंगू के मरीज लगातार आ रहे हैं। इस बार सिविल अस्पताल में आने वाले डेंगू के मरीजों की संख्या 150 तक पहुंच गई है। सिविल अस्पताल से ब्लड सैंपल लेकर रैडक्रॉस में जांच कराई जा रही है। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या काफी है। अस्पताल संचालक मरीजों को डेंगू होने की पुष्टि कर रहे हैं, हालांकि विभाग को इसकी जानकारी साझा नहीं कर रहे। स्वास्थ्य विभाग को केवल दस अस्पताल ही रिपोर्ट साझा कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की फॉगिंग न करने के पीछे यह है दलील
स्वास्थ्य विभाग पहले तो खुद फॉगिंग करने में ढुलमुल रवैया अपनाता रहा। अब डेंगू फैल गया है और लोग इसकी मांग उठाने लगे हैं तो स्वास्थ्य विभाग डेंगू का मच्छर मोटा होने की बात कहकर फॉगिंग को मच्छर पर बेअसर बता रहा है। स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय ने भी इसको लेकर गाइडलाइन जारी की है। इससे अधिकारियों ने अब लोगों को जागरूक करना शुरू दिया है। इसको लेकर 13 इंस्पेक्टर, सौ एएनएम, 180 एमपीएचडब्ल्यू और आंगनबाड़ी व आशा वर्कर को जागरूकता अभियान में लगाया हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग ने हाथ खड़े किए तो शहरियों ने खुद थामी फॉगिंग की कमान
शहर में डेंगू पीड़ितों की संख्या बढ़ने से लोगों में खौफ है, शहरवासी इन सबके बीच लगातार फॉगिंग करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग के राजी न होने पर जनप्रतिनिधि आगे आए हैं। जनप्रतिनिधि खुद अपने-अपने एरिया में फॉगिंग कराने में जुटे हुए हैं।
शहर के जनप्रतिनिधि, सामाजिक व धार्मिक कार्यकर्ता डेंगू के मच्छर को खत्म करने के लिए खुद सामने आए हैं। इंसार बाजार के प्रधान गौरव लिखा ने बताया कि उनके पास दो मशीन हैं और वे दोनों मशीनों से शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में लगातार फॉगिंग करने में लगे हुए हैं। एक वार्ड में दो से तीन बार फॉगिंग करनी पड़ती है। इसमें पांच से सात हजार रुपये खर्च आता है।
स्वास्थ्य विभाग की आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल की अपेक्षा इस बार डेंगू बढ़ा है, जबकि मलेरिया के केस कुछ कम हुए हैं। विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में इस बार डेंगू के 150 कंफर्म मरीज आ चुके हैं, जबकि मलेरिया के 40 पॉजीटिव आए हैं। डेंगू के 2016 में 12 मरीज थे, जबकि 2015 में 164 मरीज हो गए थे। वहीं मलेरिया के 2016 में 126 व 2015 में 176 मरीज आए थे।
सिविल और प्राइवेट अस्पताल के टेस्ट में अंतर
विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार सिविल अस्पताल और प्राइवेट अस्पतालों में डेंगू जांच के अंतर है। सिविल अस्पताल में एलाइजा टेस्ट कराया जाता है और इसकी रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर ही उसको डेंगू पॉजीटिव घोषित किया जाता है। वहीं प्राइेवट अस्पतालों व लैब में एंटीजन व एंटी बॉडी टेस्ट किया जाता है। एंटीजन टेस्ट पॉजीटिव आते ही डेंगू घोषित कर दिया जाता है, जबकि एंटी बॉडी टेस्ट पॉजीटिव आने पर पॉजीटिव घोषित किया जाता है।
स्कूलों में बच्चों को पूरे कपड़े पहनकर आने के मैसेज
डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे ने तीन दिन पहले डेंगू को लेकर विभिन्न विभाग के अधिकारियों की मीटिंग ली थी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम व पंचायत विभाग को फॉगिंग कराने की हिदायत दी थी। वहीं शिक्षा विभाग को स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम कराने की कही थी। बताया जा रहा है कि जिला शिक्षा विभाग की ओर से जिले के सभी प्राइवेट व सरकारी स्कूलों को इस बाबत अवगत करा दिया गया। स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों को मैसेज कर दिया गया है। जिसमें बच्चों को डेंगू को देखते हुए पूरे कपड़े पहनकर आने की हिदायत दी गई है।
डेंगू का मच्छर अब मोटा हो गया है। उस पर फॉगिंग का असर नहीं हो पा रहा है। वह एक जगह से दूसरी जगह चला जाता है। ऐसे में डेंगू को कंट्रोल करने के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। स्वास्थ्य विभाग दूसरे विभागों को साथ लेकर जागरूक करने में जुटा हुआ है।
डॉ. संतलाल वर्मा, सीएमओ, पानीपत।