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अब डाइंग यूनिट को मिलेगा नहरी पानी, नहीं करना पड़ेगा भूमिगत जल का दोहन

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पानीपत। आचार संहिता हटते ही डायर्स को बड़ा तोहफा मिला है। अब पानीपत की डाइंग इंडस्ट्री को भूमिगत जल का दोहन नहीं करना पड़ेगा। यूनिट को सीधा बिंझौल नहर से नहरी पानी मिलेगा। जिससे कपड़े की रंगाई होगी। इस योजना पर 10 करोड़ 5 लाख रुपये का खर्च आया है। सेक्टर 29 पार्ट टू से एनएफएल के नीचे से होते हुए यमुना लिंक नहर तक 29 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई गई है। सोमवार को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने इस योजना का शुभारंभ डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा की फैक्टरी नंबर 200 में नहरी पानी निकालकर किया है। इस योजना के शुरू होते ही डायर्स में खुशी है। डायर्स ने इस पर सरकार का आभार भी व्यक्त किया है।
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बता दें कि 2004 में सरकार ने सेक्टर 29 पार्ट टू को डाइंग यूनिट के लिए बसाया था। यहां पर 550 डाइंग यूनिट चलते हैं। ये यूनिट ही सबसे अधिक पानी का इस्तेमाल करते हैं। अब तक डाइंग यूनिट को भूमिगत जल का ही दोहन करना पड़ रहा था। इसलिए भूमिगत जल का स्तर भी लगातार गिर रहा था। इसके अलावा डायर्स को टैंकर से भी पानी मंगवाना पड़ था। जिससे डायर्स पर काफी बोझ भी पड़ रहा था। भूमिगत जल बोर्ड की भी पानीपत डाइंग यूनिट पर सीधी नजर थी। बोर्ड ने कई बार इन यूनिट को चेतावनी भी दी थी कि वो भूमिगत जल निकालने के लिए एनओसी लें। कई यूनिटों को बंद करने के भी निर्देश दिए जा चुके थे। पिछले साल एचएसवीपी ने डायर्स की मांग पर नहरी पानी को डाइंग यूनिट तक पहुंचाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। दिल्ली पैरलल नहर से डाइंग यूनिट तक पानी लाने का ठेका ठेकेदार चांद हुड्डा को दिया गया था। चार माह में इस कार्य को पूरा कर लिया गया। 10 करोड़ पांच लाख की लागत से पाइप लाइन बिछाने का कार्य पूरा हुआ है।
6 रुपये प्रति किलोलीटर देना होगा चार्ज : एचएसवीपी ने अब तक 350 डाइंग यूनिट में पानी के मीटर लगवा दिए हैं। फिलहाल 40 प्रतिशत पानी निकल रहा है। डायर्स को 1 हजार लीटर पानी इस्तेमाल करने पर 6 रुपये विभाग को देने होंगे। ये पहले से 50 प्रतिशत सस्ता पड़ेगा। पहले डायर्स को एक किलोलीटर पानी इस्तेमाल करने पर लगभग 14 रुपये खर्च करने पड़ते थे।
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इस योजना के शुरू होने से डायर्स को काफी लाभ मिलेगा। डायर्स को पानी के लिए काफी परेशानियां हो रही थी। मजबूरन कई डायर्स को भूमिगत जल का भी इस्तेमाल करना पड़ रहा था। भूमिगत जल प्राधिकरण भी इस पर सख्त है। अब डायर्स को नहरी पानी मिलेगा। इससे भूमिगत जल स्तर भी प्रभावित नहीं होगा। इसके लिए सभी डायर्स सरकार के आभारी हैं।
भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
डायर्स की मांग पर सरकार ने इस प्रोजेक्ट को शुरू किया था। 29 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन से डायर्स को पानी मिलेगा। इस प्रोजेक्ट पर 10 करोड़ 5 लाख रुपये का खर्च आया है।
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डीके मलिक, एसडीओ एसएचवीपी
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