पद्मश्री अवार्ड से सम्मनित हुए नरेंद्र कहा पशुपालन नहीं है घाटे का सौदा
इसराना । राष्ट्रपति भवन में डिडवाडी के पशु पालक नरेंद्र सिंह जो पंचायत विभाग में ग्राम सचिव भी है को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया। दिल्ली से पद्मश्री अवार्ड लेकर लौटे पशुपालक नरेंद्र सिंह का ग्रामीणों ने गांव पहुंचने पर अभिनंदन किया। बता दें कि डिडवाडी के पशपालक नरेंद्र सिंह को मुर्रा व साहीवाल नस्ल को संरक्षित करने के बेहतर परिणाम देने व अच्छा कार्य करने पर कुछ दिन पूर्व सरकार द्वारा पद्मश्री अवार्ड देने की घोषणा की थी। नरेंद्र सिंह को दिल्ली में पदमश्री अवार्ड मिलने पर गांव में उत्साह है।
पशुपालक नरेंद्र सिंह ने बताया कि बचपन से उसे पशुओं की देखभाल व लगाव रहता था। उसका घर पर बीतने वाला ज्यादातर समय पशुओं की बेहतर ढ़ंग से देखभाल करने लगता है। चूंकि वह किसान के साथ पंचायत विभाग में ग्राम सचिव भी है। ड्यूटी के बाद पशुओं की देखभाल के समय यही प्रयास रहता है कि कुछ लीक से हट कर किया जाए। करीब बीस साल पहले नरेंद्र सिंह ने दस पशुओं के साथ गांव में अपने प्लाट में डेयरी की शुरूआत की थी। अब भैंस, झोटे व सांड़ समेत आज उनकी डेयरी फार्म पर करीब एक सौ पचास पशु है। उसे वर्ष 2013 व 2015 में राष्ट्रीय अवार्ड, 2017 में गोपाल रतन अवार्ड व वर्ष 2018 में मुर्राह रतन अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। मुर्राह नस्ल का झोटा घोलू, प्रिंस व शहंशाह समेत भैंसों की ख्याति देश भर के अलावा विदेशों में छाने के बाद करीब पांच वर्ष पहले उनकी डेयरी पर कोलंबिया के राजकुमार समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने विजिट कर पशुपालन की तकनीक को नजदीक से जाना था। उनकी डेयरी के हरियाणा साहिवाल सांड़ नंदी व मुर्राह नस्ल की भैंस प्रतियोगिताओं में प्रथम रह कर चैंपियन बनी व झोटा शहंशाह दूसरे स्थान पर रहा है।
पच्चीस करोड़ी शहंशाह रहा चर्चा में
पशु पालक नरेंद्र सिंह ने बताया कि करीब दस साल पहले उसके मुर्राह नस्ल के झाटे घोलू ने धूम मचाई थी। बाद में प्रिंस व अब शहंशाह चर्चा में है। नरेंद्र सिंह ने बताया कि उसके झोटे शहंशाह को खरीदने के लिए देश के अलावा बाहर से भी लोग आए। कीमत पच्चीस करोड़ भी लगाई लेकिन उन्होंने बेचने से मना कर दिया। तभी से शहंशाह पच्चीस करोड़ी के नाम से चर्चा में है।
घाटे का काम नही है पशुपालन व्यवसाय : नरेंद्र सिंह
पशुपालक नरेंद्र सिंह ने बताया कि पशु पालन व्यवसाय को अगर बदलते समय की तकनीक के साथ अपेडेट रह कर किया जाए तो पशु पालन कभी भी घटे का सौदा साबित नहीं हो सकता। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि नई तकनीक से अपडेट रह कर पशुपालन व्यवसाय अपनाए तो बेहतर रोजगार साबित हो सकता है। इस मौके पर पशुपालन विभाग के पूर्व उपनिदेशक डा जयपाल जागलान, सरपंच प्रतिनिधि पूर्ण सिंह डिडवाडी, महाबीर सिंह, सुभाष एडवोकेट, पूर्व सरपंच जयकिशन, अभेराम, रणबीर पुनिया, हरीराम भनवाला व रामंश्वर मौजूद रहे।