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ऐसी लिखी गई अवनीत की जीत की इबादत:

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ऐसी लिखी गई अवनीत की जीत की इबादत
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सुबह आठ बजे मत गणना शुरू हुई। पहले ही बूथ पर अवनीत कौर को 667 वोट मिले वहीं अंशु को मात्र 161 मत मिले। यहीं से उन्होंने लीड बनानी शुरू की।
पहले दो बूथों पर 1006 की लीड उनके पास हो गई।
9 बजे तक दो वार्ड 17 बूथों पर मतगणना हुई।
वार्ड 1 में अवनीत को 4269 वोट मिली। जबकि अंशु को 1434 मत मिले। यहां पर अवनीत 3 हजार वोट से आगे हो गई।
सवा 9 बजे कांग्रेस के नेता बुल्लेशाह ने मशीनों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए वहां वॉक आउट कर दिया।
वार्ड में 2 में अवनीत को 5029 वोट मिले। यहां पर अवनीत की लीड 6 हजार वोट की हो गई थी।
साढ़े 12 बजे तक मतगणना चलती रही, लेकिन को किसी भी वार्ड में हार नहीं मिली।
सभी 26 वार्डों के 278 बूथों में से 12 बूथों को छोड़ सभी पर अवनीत प्रथम रही।
12 बजे अवनीत कौर मत गणना सेंटर पर पहुंच गई थी। उनके साथ परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, महिपाल ढांडा, रोहिता रेवड़ी भी थी।
जिस वक्त अवनीत 40 हजार वोट से आगे चल रही थी उसी वक्त उनको बधाई देने वालों का तांता लग गया था।
अधिकारिक तौर पर डेढ़ बजे अवनीत कौर को शहर का मेयर घोषित कर दिया गया।
दोपहर को भाजपा ने रोड शो किया।
दो बजे बुल्लेशाह ने अपने निवास पर पत्रकार वार्ता की और भाजपा पर मशीनों में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया।
बुल्लेशाह ने कहा कि भाजपा ने उन्हें मशीनों से हराया है, अगर भाजपा शहरवासियों से उन्हें हरा दे तो वो राजनीति छोड़ देंगे।

इन वार्डों में की महिलाओं ने जीत हासिल:
26 में से 11 वार्डों पर पर महिलाओं ने अपना कब्जा कर लिया है पानीपत। शहर के नगर निगम पर महिलाओं का कब्जा रहा है। 26 में से 11 महिलाओं ने पार्षद पद पर कब्जा किया है। वहीं 14 महिलाएं इस लड़ाई में रनरअप भी रही है। चुनाव में 16 पुरूष पार्षद चुने गए हैं। पानीपत को पहली बार मेयर भी महिला ही मिली है। महिलाओं की जीत पर शहर की सामाजिक संस्थाओं में भी खुशी है। भाजपा के प्रदेश परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, महामंत्री संजय भाटिया ने इन महिला पार्षदों को जीत पर बधाई दी है और जो महिलाएं रनरअप रही है उनका हौसला बढ़ाया है।
ये महिलाएं चुनी गई:
वार्ड 1 से भाजपा प्रत्याशी अनीता परूथी ने 1541 वोटों के अंतर से वार्ड पांच प्रत्याशियों को हराकर पार्षद पद का स्थान हासिल किया है। वहीं वार्ड 3 से भाजपा प्रत्याशी अंजली ने भी 3769 वोटों से पांच प्रत्याशियों को हराकर पार्षद बनी है। वार्ड आठ से भाजपा प्रत्याशी चंचल ने 951 वोट से दो प्रत्याशियों को हराकर पार्षद बनी है। वार्ड 11 भाजपा प्रत्याशी कोमल सैनी ने भी 1250 वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। वार्ड 14 से कांग्रेस प्रत्याशी शकुंतला ने 74 वोट के अंतर से तीन प्रत्याशियों को हराकर पार्षद बनी। वार्ड 15 से निर्दलीय प्रत्याशी सुमन ने 189 वोट के अंतर से चार प्रत्याशियों को हराकर पार्षद बनी है। वार्ड 17 से प्रमोद देवी ने 1232 वोट के अंतर से चार प्रत्याशियों को हराया। वार्ड 19 से भाजपा प्रत्याशी निशा ने 972 वोट से सात प्रत्याशियों को हरा कर पार्षद बनी है। वार्ड 22 में निर्दलीय प्रत्याशी चंचल ने 435 वोट से प्रत्याशियों हराकर जीत हासिल की। वार्ड 24 में भाजपा प्रत्याशी मंजित कौर ने 173 से प्रत्याशियों को हराकर पार्षद पद की कुर्सी संभाली।
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ऐसी होगी नई कैबिनेट:
26 नए पार्षदों में से 4 को छोड़ दे तो सभी पार्षद 50 से कम उम्र के ही हैं। सबसे युवा पार्षद रविंद्र 23 वर्षीय व निशा 24 वर्षीय है। 12 पार्षद 35 वर्ष आयु से कम है। 10 पार्षद 40 व 45 वर्ष के बीच के हैं। 5 पार्षद ही अनुभवहीन है। 21 पार्षद पहली बार पार्षद बने हैं। इसलिए कैबिनेट को अनुभव लेने में कुछ समय लगेगा। अभी शहर के मुद्दे समझने के लिए उन्हें ग्राउंड पर कार्य करना पड़ेगा। पांच पार्षद पहले पार्षद रह चुके हैं। अवनीत कौर शहर की मेयर है। उनकी उम्र 26 वर्ष है। वो प्रदेश की सबसे कम उम्र की मेयर है। इसलिए कैबिनेट यंग ही रहेगी।
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कांग्रेस पर परिणाम का असर:
शहरी विधानसभा से कांग्रेस के बड़े नेता बलबीर पाल शाह पांच बार विधायक रह चुके हैं। स्वास्थ्य कारणों से वो राजनीति से फिलहाल दूर हैं। कांग्रेस की टिकट पर 2014 में उनके छोटे भाई बुल्लेशाह ने चुनाव लड़ा था, लेकिन वो हार गए थे। बुल्लेशाह अपनी जमीन मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। वो भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खासे करीबी माने जाते हैं। कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ने से मना करने के बाद उन्होंने अपने उम्मीदवार उतारे थे। यहां हार के बाद उनके कैरियर पर इसका खासा असर पड़ सकता है। इस चुनाव को विधानसभा का सेमिफाइनल माना जा रहा था। बुल्लेशाह से कांग्रेस से टिकट के प्रबल दावेेदार है, लेकिन इस हार से उनकी टिकट भी खतरे में पड़ सकती है। कांग्रेस भी हार के बाद शहर में अपना दूसरा नेता खड़ा करने का प्रयास करेगी। बताया गया है कि बुल्लेशाह को भीतरी घात ने ही मात दी है।
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