अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत।
फर्जी कागजात और जुगाड़ से नगर निगम में काम लेने वाले ठेकेदारों के अब दिन पूरे हो गए हैं। नगर निगम ने नये वित्तीय बजट में ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत तोड़ने के लिए नये मानक जारी किए हैं। मानक को पूरा करने वाले ठेकेदारों को ही काम का आवंटन किया जाएगा। अब नगर निगम ठेकेदारों की बैंक गारंटी व पिछली प्रोफाइल देखकर ही ठेका देगा। ठेकेदार का पूरा बायोडाटा व संसाधनों की भी जांच होगी। विभाग ऐसे नियम तय कर अपनी कार्य प्रणाली में सुधार करने के प्रयास कर रहा है, क्योंकि नगर निगम ने पहले ऐसे ठेकेदारों को ठेका दिया था जिनका बजट एक करोड़ है और उसने साठगांठ कर एक-एक करोड़ के कई ठेके ले लिए थे। इन्हीं कारणों से शहर में कॉलोनियों की गलियों, पार्कों व सार्वजनिक भवनों के निर्माण कार्य पेंडिंग हैं। ठेकेदार नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं और लोग परेशान हैं।
इसलिए किए हैं नए मानक जारी:
नगर निगम में कुल 64 ठेकेदार हैं। जिसमें चार ठेकेदार ब्लैक लिस्टेड हैं। ठेकेदारों की मोनोपोली के चलते विभागीय अधिकारी व नेता से मिलीभगत कर एक साथ कई काम आवंटित करा लिया जाता था। ठेकेदार के पास इतना पैसा नहीं होता था कि एक साथ सभी आवंटित काम को पूरा कर सके। ऐसे में पूरा शहर खुदा हुआ दिखता था। विभागीय अधिकारियों की माने तो कागज पर विकास दिखता था और मौके पर निगम की छवि खराब होती थी। ऐसे में विकास की गति तेज करने और काम में पारदर्शिता लाने के लिए ई-टेंडर के आवंटन में नये मानक जोड़ा है। पहला जिस भी ठेकेदार को काम का आवंटन किया जाएगा। उसकी बैंक गारंटी देखी जाएगी। दूसरा उस ठेकेदार की काम करने की क्षमता कितनी है। निगमायुक्त एस के शर्मा कहते हैं कि बहुत से ठेकेदारों की काम करने की क्षमता एक करोड़ है तो उन्होंने एक-एक करोड़ के पांच काम आवंटित करा रखा है। ऐसे में एक भी काम पूरा नहीं करा पा रहे हैं और विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
इसे भी जाने..
- नगर निगम में 200 करोड़ के अधिक काम का होता है आवंटन।
-ठेकेदार को सीए की ओर से जारी सर्टिफिकेट जमा करवाना होगा। जिसमें उसकी बैंक गारंटी और काम की क्षमता दर्ज होगी।
-गलत कागजात लगा कर काम आवंटित कराने वाले ठेकेदार के साथ उक्त सीए पर भी कार्रवाई की जाएगी।
- क्षमता के आधार पर काम का आवंटन होगा तो समय पर काम पूरा होगा और पारदर्शिता नजर आएगी।
क्या थी परेशानी..
- नेता, मंत्री, विधायक व पार्षद से संबंध रखने वाले ठेकेदार अधिकारियों से मिलीभगत कर एक साथ कई काम आवंटित करा लेते थे।
- क्षमता से अधिक काम आवंटित कराने के कारण समय से काम पूरा नहीं होता था और पेमेंट के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाते थे।
- ऐसे में अधिकारियों से मिलीभगत कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता था।
- सबसे खास बात कि पूरा शहर खुदा पड़ा है। एक भी विकास कार्य समय से पूरा नहीं होता।
ठेकेदारों पर फर्जी सर्टिफिकेट लेकर कांट्रेक्टर के फर्जी लाइसेंस बनवाने के भी लगे आरोप:
भाजपा शहरी क्षेत्र की निगरानी कमेटी के सदस्य रहे विजय सहगल पर आरोप लगे थे कि उन्होंने पीडब्ल्यूडी व जन स्वास्थ्य विभाग से कांट्रेक्टर के फर्जी लाइसेंस बनवाकर नगर निगम में जमा कराए हैं। उन्हें डेढ़ साल पहले 5 करोड़ के विकास कार्यों के टेंडर भी अलॉट हुए। बाद में जांच होने पर ये टेंडर रद्द किए गए। मगर ठेकेदार को राजनैतिक हाथों ने बचा लिया।
यहां यहां पड़े अधूरे काम:
वार्ड 1, 2, 4, 8, 9, 12, 14, 16, 18, 20, 22 व 24 वार्ड की कॉलोनियों में नालों का निर्माण कार्य, पार्कों का निर्माण कार्य, गलियों का निर्माण कार्य, सार्वजनिक भवनों व पार्कों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। अकसर ठेकेदार लोगों को ये कहते सुनाई देते हैं कि नगर निगम से उनका बजट पास होगा उसके बाद कार्य दोबारा चालू होगा। ऐसे में पूरा शहर खस्ता हालत में दिखाई देता है। अब भी शहर में लगभग 150 करोड़ के विकास कार्य रुके हुए हैं।
मेरे वार्ड में परेशानियों का अंबार लगा हुआ है। अधिकारी अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं। वार्ड में नए टेंडर तो निकालना दूर पुराने टेंडर भी नहीं खोल रहे हैं। अधिकारी महज दिखावे के लिए ये निर्देश जारी कर रहे हैं। ऐसी नौटंकी कर सीएम को बरगला रहे हैं। लोग परेशान हैं।
भूपेंद्र सिंह, पूर्व मेयर पानीपत।
विकास कार्य में गति लाने और कार्य में पारदर्शिता को लेकर पहली बार नगर निगम में इन मानकों को जारी किया गया है। इससे जनता को भरी राहत मिलेगी। शहर में विकास कार्य तेजी से होंगे। लोगों की शिकायतें दूर होगी।
एसके शर्मा, नगर निगम आयुक्त पानीपत।
नगर निगम ठेकेदारों की बैंक गारंटी व पिछली प्रोफाइल देखकर ही देगा ठेका
नगर निगम ने ई-टेंडर के आवंटन में जारी किए नये मानक, - बैंक गारंटी के साथ कार्य क्षमता के आधार पर ही होगा आवंटन
- नये वित्तीय वर्ष बजट में पहली बार जुड़े मानक, कार्य में आयेगी पारदर्शिता : निगमायुक्त
फोटो संख्या 9 व 10