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सिविल अस्पताल में नहीं पैट सेल एकत्रित करने की मशीन, हर माह खानपुर रेफर होते हैं ऐसे 50 मरीज

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सिविल अस्पताल में नहीं पैट सेल एकत्रित करने की मशीन, हर माह खानपुर रेफर होते हैं ऐसे 50 मरीज
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। जिन हृदय रोगियों, दमा सहित अन्य रोगियों में लंबे समय से खून की कमी होती है उनमें इसकी मात्रा को पूरा करने के लिए पैट सेल, गाड़ा खून की कोशिकाओं की आवश्यकता पड़ती है। वहीं पानीपत के शहरी व ग्रामीण अंचल में हर माह ऐसे लगभग 50 मरीज सामने आते है लेकिन पानीपत में ब्लड कम्पोनेंट सेपरेटर मशीन नहीं है। जिस कारण रेडक्रॉस पैट सेल खानपुर मेडिकल कॉलेज करनाल से मंगवाने पड़ते हैं। सिविल अस्पताल में आने वाले इस प्रकार के मरीजों को खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में जिले के इस प्रकार के मरीज दूसरे जिलों पर ही निर्भर हैं। रेडक्रॉस में हादसों में घायल होने जरूरतमंदों के लिए हर माह 700 यूनिट ब्लड उपलब्ध होता है। रेडक्रॉस जरूरत के अनुसार ही ब्लड एकत्र करता है। इसके लिए हर माह औसतन 7 ब्लड कैंप लगाए जाते हैं। रेडक्रॉस थैलीसीमिया एनीमिया के मरीजों के लिए भी रक्त उपलब्ध कराता है लेकिन रेडक्रॉस के सामने भी रक्त को लेकर परेशानियां हैं। रैडक्रॉस के सचिव विकास कुमार ने बताया कि पानीपत में पैट सेल उपलब्ध नहीं हो पाते है इसलिए इसके जरूरतमंद मरीजों के लिए करनाल खानपुर से पैट सेल उपलब्ध कराए जाते हैं। वह पैट सेल की मशीन को पानीपत में भी उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।
रेडक्रॉस को रक्त के सबसे अहम पार्ट पैट सेल को दूसरे जिलों से उपलब्ध कराना पड़ता है। इसके लिए रेडक्रॉस को कुछ घंटे जरूर लगते हैं। पैट सेल को शहर में उपलब्ध कराने के लिए रेडक्रॉस ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। ताकि थैलीसिमिया एनीमिया के मरीजों को जिले में ही पैट सेल मिल सकें।
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क्या होती है पैट सेल
स्वास्थ्य विभाग के पास पैट सेल को लेकर कोई योजना नहीं है। वहीं, ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन द्वारा ब्लड से प्लाजमा निकाला जाता है। प्लाजमा निकालने के बाद ब्लड में आरबीसीए डब्ल्यूबीसी प्लेटलेट्स बच जाते हैं। इसे पैट सेल कहते हैं।
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यह पैट सेल सभी प्रकार के मरीजों को नहीं दिया जाता है। यह सिर्फ उन मरीजों को दिया जाता है, जिनमें लंबे समय से खून की कमी हो। पैट सेल की कम मात्रा देने पर मरीज में हीमोग्लोबिन की मात्रा जल्द पूर्ण हो जाती है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ दिनेश दहिया ने बताया कि पैटसेल थैलीसीमिया के मरीजों के लिए भी काफी आवश्यक होता है। इसके अलावा ह्रदय रोगी दमा रोगी जिनमें खून की लंबे समय से कमी हो। उनको पैट सेल दिए जाते हैंए ताकि उनमें हीमोग्लोबिन जल्द पूरा हो जाए। पैट सेल से साइड इफेक्ट दिल पर प्रभाव नहीं पड़ता। जिले में हर माह ऐसे लगभग 50 मरीज सामने आते हैं। सिविल अस्पताल से ऐसे मरीजों को खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।
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