श्राद्ध पांच सितंबर से हो रहे शुरू, तर्पण की तैयारियां शुरू
पांच सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध से लेकर 19 सितंबर अमावस्या तक चलेंगे श्राद्ध
अनुज शर्मा
पानीपत। पांच सितंबर से पितृ पक्ष की शुरूआत होगी। तर्पण की तैयारियां शुरू हो गई। श्राद्ध अर्थात पितृ पक्ष के दौरान हिन्दू अपने पितरों को श्रद्धांजलि देते हैं। जिसमें मुख्य रूप से अपने पितरों को याद करते हुए भोजन अर्पित किया जाता है। पितृ पक्ष को श्राद्ध और कनागत भी कहा जाता है जो अक्सर भाद्र पद महीने में अनंत चतुर्दशी के बाद आते हैं।
श्री गीता मंदिर के आचार्य विष्णु दत्त ने बताया कि इस साल श्राद्ध पांच सितंबर से शुरू होकर 19 सितंबर तक चलेंगे। हिंदुओं में श्राद्ध को काफी अहम मानते हैं। ऐसा इसलिए है कि श्राद्ध कर अपने पितरों को मृत्यु चक्र से मुक्त कर उन्हें मोक्ष प्राप्त करने में मदद करता है। श्राद्ध कर वर्तमान पीढ़ी अपने पूर्वजों के प्रति अपने ऋण को चुकाती है। उन्होंने बताया कि हमारी तीन पूर्ववर्ती पीढ़ियां पितृ लोक में रहती है। जिसे स्वर्ग और पृथ्वी के बीच का एक क्षेत्र माना जाता है। जिस पर मृत्यु के देवता यम का अधिकार होता है। ऐसा माना जाता है कि अगली पीढ़ी में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो पहली पीढ़ी उनका श्राद्ध करके उन्हें भगवान के करीब ले जाती है। वहीं ध्यान रहे कि सिर्फ आखिरी तीन पीढ़ियों को ही श्राद्ध करने का अधिकार होता है।
ऐसे करें श्राद्ध के दौरान पूजा
आमतौर पर बड़े बेटे या परिवार के बड़े पुरुष सदस्य द्वारा ही श्राद्ध का अनुष्ठान किया जाता है। पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए की जा रही प्रार्थना के बीच कुछ भी अशुभ नहीं होना चाहिए। दो ब्राह्मणों को भोजन, नए कपड़े, फल, मिठाई सहित दक्षिणा दान करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि उन्हें जो कुछ दिया गया है वो हमारे पूर्वजों तक पहुंचता है। ब्राह्मणों को दान देने के बाद गरीबों को खाना खिलाना भी जरूरी है। ऐसा कहा जाता है जितना दान दोगे वह उतना आपके पूर्वजों तक पहुंचता है।
पितरों की शांति और तर्पण के लिए मनाए जाते हैं श्राद्ध
पितरों की शांति और तर्पण के लिए ही श्राद्ध मनाए जाते हैं। श्राद्ध मनाए जाने का एक अपना विशेष महत्व होता है। श्राद्ध करना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना है इससे आपको अपने पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है जिससे आपके घर में खुशहाली रहती है। अपने पूर्वजों को उस दिन याद करके ब्राह्मणों को भोजन, दान आदि देकर पूर्वजों को पहुंचाया जाता है। जिसके बाद घर व परिवार में शांति व वैभव बना रहे।
श्राद्ध में इन बातों का रखे ध्यान
1. श्राद्ध कर्म में गाय का घी, दूध या दही काम में लेना चाहिए।
2. पिता का श्राद्ध पुत्र ही करे।
3. शाम के समय में श्राद्ध कर्म न करें।
4. दूसरे की भूमि पर श्राद्ध न करे।
5. श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन करवाना आवश्यक है। चूंकि ब्राह्मण हीन श्राद्ध से मनुष्य महापापी होता है।
6. श्राद्ध के दिन भोजन के लिए आए ब्राह्मणों को दक्षिण दिशा में बैठाएं।
7. श्राद्ध में जौ, कांगनी, मटर और सरसों का उपयोग श्रेष्ठ रहता है।
5 सितंबर से लेकर 19 सितंबर तक श्राद्ध तिथियां
5 सितंबर - पूर्णिमा श्राद्ध
6 सितंबर - प्रतिपदा श्राद्ध
7 सितंबर - द्वितीया श्राद्ध
8 सितंबर - तृतीया श्राद्ध
9 सितंबर - चतुर्थी श्राद्ध
10 सितंबर - महा भरानी, पंचमी श्राद्ध
11 सितंबर - षष्ठी श्राद्ध
12 सितंबर - सप्तमी श्राद्ध
13 सितंबर - अष्टमी श्राद्ध
14 सितंबर - नवमी श्राद्ध
15 सितंबर - दशमी श्राद्ध
16 सितंबर - एकादशी श्राद्ध
17 सितंबर - द्वादशी श्राद्ध, त्रयोदशी श्राद्ध
18 सितंबर - माघ श्राद्ध, चतुर्दशी श्राद्ध
19 सितंबर - सर्वपितृ अमावस्या