पानीपत। केंद्र सरकार ने 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। 2024 की स्वास्थ्य विभाग की टीबी संबंधी रिपोर्ट काफी चिंतनीय है। स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को 2024 की रिपोर्ट सबमिट की है। इसमें एक साल में लगभग 4950 केस मिले हैं। यानि प्रतिदिन 13 से अधिक मरीज मिले हैं। 2023 में प्रति माह 372 की औसत से टीबी के रोगी मिले थे लेकिन 2024 में यह बढ़कर 408 पहुंच गई है।
टीबी के रोगियों की मौत के आंकड़े में कमी लाने में स्वास्थ्य विभाग काफी हद तक कामयाब हुआ है। 2023 में टीबी से 116 लोगों की मौत हुई थी। इस साल 70 लोगों की मौत हुई है। यह पिछले छह साल में सबसे कम है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग 100 दिन तक टीबी खोज अभियान भी चला रहा है। इस अभियान के शुरुआती एक माह में अब तक 25 हजार लोगों की जांच हो चुकी है। औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिक टीबी के शिकार हो रहे हैं। पिछले छह साल में टीबी से जिले में 720 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 21 गांवों को टीबी मुक्त घोषित भी किया है।
बॉक्स
जिले में इलाज की व्यवस्था
- 01 जिला क्षय केंद्र
- 06 टीबी यूनिट (जांच व दवा)
- 12 माइक्रोस्कोपिक केंद्र (जांच केंद्र)
- 175 गांवों में ट्रीटमेंट सुपरवाइजर
वर्जन-
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. ललित वर्मा ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग गंभीरता से काम कर रहा है। 2024 में टीबी के रोगी बढ़े हैं, क्योंकि टीबी जांच भी बढ़ी है। औद्योगिक क्षेत्रों में टीबी का अधिक खतरा है। टीबी खोज अभियान के दौरान जहां भी टीबी के संदिग्ध रोगी मिल रहे हैं। उन्हें जिला नागरिक अस्पताल रेफर किया जा रहा है। इस साल टीबी के अधिक रोगी मिले हैं । यह अभियान 28 फरवरी तक जारी रहेगा। रोगियों से अपील है कि वह इलाज बीच में न छोड़ें। जिन लोगों को नियमित खांसी है। जिनका वजन गिर रहा हो और अधिक पसीना आ रहा हो, वह अपनी टीबी की जांच अवश्य करवाएं। संपन्न लोगों से अपील है कि वह टीबी रोगियों को गोद लेने के लिए आगे आएं।