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जिला बार एसोसिएशन की नई कमेटी में दरार

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पानीपत। वाहन पार्किंग के ठेकेदार पर बकाया राशि को लेकर 28 दिन पहले नव चयनित जिला बार एसोसिएशन की नई कमेटी के बीच दरार आ गई हैं। ये दरार इस कद्र बढ़ गई है कि कमेटी के सभी 5 सदस्य दो टीमों में बंट गए। एक टीम में प्रधान, उप-प्रधान, कैशियर व संयुक्त सचिव एकजुट हो गए। वहीं इन चारों ने वीरवार को बार एसोसिएशन स्थित प्रधान के चेंबर में प्रेसवार्ता कर सचिव पर रिश्वत मांगने सहित कई आरोप लगाए। आरोप लगाते हुए सभी ने सचिव का कमेटी से बायकाट करने का फैसला लिया और सचिव को भविष्य में किसी भी मीटिंग का संदेश तक न देने की बात पर सहमति जताई। वहीं इस बारे में सचिव का कहना है कि उन्होंने प्रधान के कई घोटाले पकड़ लिए है, जिसकी भनक प्रधान को लग गई है, इसी के चलते प्रधान ने कमेटी को अपने साथ जोड़कर ये झूठे आरोप जड़े हैं।
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सचिव पर रिश्वत मांगने सहित कैंटीन संचालक को परेशान करने का आरोप : वीरवार को प्रधान शेर सिंह खर्ब के चैंबर में प्रेसवार्ता की गई। जिसमें प्रधान के साथ उपाध्यक्ष आनंद दहिया, संयुक्त सचिव नरेंद्र बजाज व कैशियर ललित कुमार मित्तल मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में कमेटी के पांचवें सदस्य सचिव गुरविंद्र सिंह पर एक के बाद एक कई आरोप जड़े। उन्होंने कहा कि सचिव चुने के 3 दिन बाद से ही गुरविंद्र ने रिश्वत मांगना शुरू कर दिया था। सबसे पहले उसने वाहन पार्किंग के ठेकेदार एडवोकेट संदीप जागलान से उसकी राशि बकाया होने की बात कह कर एक लाख रुपये की मांग की। इसके बाद उसने कोर्ट कांप्लेक्स स्थित राजेंद्र फ्रूट वाले से उसकी जगह का किराया 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये व कैंटीन संचालक इंद्र की कैंटीन का किराया 10 हजार से बढ़ा कर 15 हजार रुपये करने की बात कही। ऐसा न करने के एवज में सचिव ने उनसे कुछ हिस्सा देने की बात कही। इस आरोप को फ्रूट वाला राजेंद्र व कैंटीन संचालक इंद्र ने भी सही बताया। आरोप है कि सचिव सभी को लंच टाइम में अपने चैंबर में बुलाकर इस तरह की बात करते थे।
यूं हुुआ शुरू हुआ विवाद : पार्किंग ठेकेदार विशाल व पार्टनर एडवोकेट संदीप जागलान ने ये पार्किंग 16 जुुलाई 2018 को 19 लाख 11 हजार 800 रुपये में छुटवाया था। जिसका एक साल का समय 15 जुलाई 2019 को पूरा होना है। उसने बार खाते में 7 लाख 50 हजार रुपये जमा करवा दिए थे। ठेकेदार पर 6 लाख 83 हजार रुपये बकाया था। जिसे उसे 15 अप्रैल तक जमा करवाने थे। इसकी आखिरी तारीख 30 अप्रैल की थी। इसके चलते सचिव ने ठेकेदार को 20 अप्रैल को नोटिस जारी किया। जिसमें उन्होंने बकाया न जमा करवाने पर ठेका निरस्त करने की बात कही थी। नोटिस के बाद ठेकेदार ने 2 लाख रुपये जमा करवा दिए थे। बाकी की रकम जमा न करवाने पर सचिव ने आम सभा बुलाकर, ठेका जारी रखने या निरस्त करने के निर्णय पर बात करने के लिए प्रधान से आम सभा बुलाने का आग्रह किया। लेकिन प्रधान ने उन्हें सभा की अनुमति नहीं दी, तो सचिव ने बुधवार को खुद अपने स्तर पर ही मीटिंग की। जिसमें कुछ ही वकील शामिल हुए। इससे आहत प्रधान सहित कमेटी के अन्य तीनों सदस्यों ने वीरवार को प्रेस वार्ता कर मामले में और भी कई कड़ी जोड़ दी है।
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मुझ पर लगाए सभी आरोप झूठे हैं। प्रधान शेर सिंह खर्ब के पिछले कार्यकाल से अभी तक के कार्यकाल में किए गए प्रधान के घोटालों की सूची मेरे पास है। प्रधान ने हाल ही में गत वर्ष का सालाना बजट पेश किया था। जिसमें उन्होंने 30 लाख के करीब बार की बचत दिखाई थी। जब मैंने सचिव पद का कार्यभार संभाला, तो देखा कि बार के अकाउंट में सिर्फ 28 हजार रुपये है। कंस्ट्रक्शन सोसायटी के अकाउंट अलग हैं, जिसमें 10 लाख रुपये हैं। मुझे बार के किसी भी कार्यक्रम के बारे में नहीं बताया जाता है।
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- एडवोकेट गुरविंद्र सिंह, सचिव
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